कमीशन खोर शिक्षक ने दिव्यांग बच्चों को भी नहीं छोड़ा तय परीक्षा फीस से अधिक की वसूली ,दिव्यांग हुए योजना से वंचित

परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद। शिक्षकों को गुरु का दर्जा दिया जाता है जो समाज में सबसे सम्मानीय व्यक्ति होता है पर आज के शिक्षक रूपी गुरु, चंद पैसों के लिए अपना ईमान धर्म कर्तव्य और मानवता को शर्मसार करने में पीछे नहीं हटते। ऐसा ही एक मामला देखने को मिला जिला गरियाबंद के फिंगेश्वर विकासखंड के लोहरसी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जहां पढ़ाई में कमजोर या फिर किसी कारणों से अपनी पढ़ाई आगे जारी नहीं रख सके ऐसे बच्चों की पढ़ाई के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने स्कूल के माध्यम से पढ़ाई आगे रख सके इसलिए जगह -जगह ओपन स्कूल सेंटर का आयोजन कर बच्चों को फॉर्म भरवा कर बकायदा उनका एग्जाम ले कर अवसर प्रदान किया जाता है। जिसमें बच्चे सम्मलित होकर अपना भविष्य गढ़ सके।लेकिन विकासखंड फिंगेश्वर के लोहरसी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एक ऐसा ओपन सेंटर है जो हमेशा से विवादों में घिरा रहता है ।जब से यहां ओपन स्कूल के एग्जाम के लिए सेंटर बनाया गया है तब से लेकर आज तक बच्चों को सामूहिक नकल करवाना, बच्चों से अधिक फीस लेना बच्चों को रसीद नहीं देना तथा बिना पेपर में बैठे बच्चों को पास कराने के लिए मोटी रकम की मांग करना जैसे अनेक मुद्दों को लेकर हमेशा चर्चा में रहा है और इन्हीं कारणों से हर बार यहां प्रभारी बदले जाते हैं।वही इस बार ग्राम लोहरसी निवासी जो अपने ही गाव के विद्यालय मे पदस्थ हैं जो ओपन स्कूल के प्रभारी भी है।इस शिक्षक तुलसीराम यादव ने तो मानवता को शर्मसार करने वाले घटना को अंजाम दिया है जिसने आंख से सौ प्रतिशत दिव्यांग ग्राम खट्टी निवासी योगेश पटेल पिता रामसेवक पटेल से परीक्षा फीस ₹2 हजार की वसूली की है जो ब्रेल लिपि से पढ़ाई करता है । जिसमे नियमानुसार दिव्यांग बच्चों को फिश मे छुट व सुविधा होती है जिसके तहत कम से कम फीस लेना है एवं उन्हें सुविधाएं भी देना है पर यहां ऐसा ना कर स्कूल के प्रभारी ने अपने एक अन्य शिक्षक के साथ मिलकर आर्थिक रुप से कमजोर और शारीरिक रूप से दोनों आंख से दिव्यांग युवा छात्र से दो हजार फीस वसूल लिया। जबकि जानकार बताते हैं कि दिव्यांग बच्चों से केवल 1075 रूपए शुल्क लेना था उसमें भी अगर छूट मिलता हो तो यह राशि भी कम हो जाती है।लेकिन कमीशन खोर शिक्षक ने अपने निजी फायदे के बच्चे से ज्यादा फीस वसूली की। इस बात की जानकारी जब हमारे संवाददाता को लगा तो उन्होंने छात्र के घर जाकर जानकारी ली तो योगेश पटेल ने 2 हजार रूपए फीस देने की बात कही तथा शिक्षक ओपन प्रभारी द्वारा रसीद भी नहीं देने की बात बताए। इसी प्रकार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में लगभग 200 बच्चों ने फार्म डाला है । जिसमे महिला व पुरुष परिषार्थी से अलग अलग फार्म शुल्क फीस लेना रहता है पर यहां भी सबको समान फीस लिया गया है और किसी को भी रसीद नहीं दिया गया। मीडिया ने फोन के माध्यम से बच्चों से संपर्क किया तो सभी बच्चों ने बताया कि हमें किसी प्रकार का कोई रसीद नहीं दिया गया है। बहुत सारे बच्चों से अधिक फीस भी वसूली की गई है। जिनका मीडिया के पास ऑडियो एवं वीडियो रिकॉर्ड है । मोटी कमाई के लालच मे इस शिक्षक के वजह से एक बार फिर शिक्षा जगत का छवि धूमिल होने वाला है। ऐसे भी लोहरसी सेंटर के लिए यह् कोई नया मामला नहीं है।यहां कई प्रकार के घपले होते आ रहे हैं इस बार फिर बच्चों को रसीद नहीं दिया जाना बहुत बड़ा गंभीर मामला है ।जब इस बारे मे कुछ जानकारों ने नाम लिखने के शर्त पर बताया की अगर ऊपर से रसीद नहीं मिलता है तो बच्चों को जो फार्म पुस्तिका दी जाती उसके पीछे में राशि एवं सिल सिग्नेचर कर देना है। लेकिन यहां संस्था प्रभारी ने जान कर भी बच्चों को रसीद नहीं दी तथा जिस दिव्यांक से सहानुभूति रखना चाहिए उसके साथ अधिक फीस वसूली कर दिव्यांगों के साथ मजाक किया है । साथ ही जब मीडिया ने बच्चों से जानकारी ,जुटाने लगे तो शिक्षक तुलसीराम ने रजिस्टर लेकर बच्चों के घरों में जा जाकर बच्चों से संपर्क कर फीस अधिक लेने एवं रसीद नहीं देने वाला मामला मत बिगड़ जाए करके बच्चों के घरों में जाकर दस्तखत करवा रहे है । जबकि संस्था के प्राचार्य को ऐसे मामलों में पूरी जवाबदारी जिम्मेदारी होती है जो अपने सारे कर्तव्य अपने शिक्षकों को देकर् अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं ।जबकि ओपन स्कूल से संबंधित कार्य की जिम्मेदारी उनके ऊपर होती है । पर संस्था के प्रमुख की वजह से हर बार यहां घपले और गड़बड़ियां होते आ रहा है ।

वर्जन

इस बारे में प्रभारी ओपन स्कूल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लोहरसी तुलसीराम यादव ने बताया कि जिन्होंने रसीद मांगा है उनको मैं रसीद दिया हूं जिन्होंने नहीं मांगा मैं उसको नहीं दिया बच्चों से ज्यादा फीस नही लिया हूं।बच्चे तो झूठ बोलेंगे ही।

वही इस बारे में संस्था के प्राचार्य एल कवर से पूछे जाने पर बताया कि मैं प्रभार तुलसीराम यादव को दे दिया हूं और उन्हें पूरी जिम्मेदारी सौंप दी है फीस जमा करना फॉर्म भरना सभी कार्य वही देखते हैं। बीच में मैंने उनसे पूछा था सब सही चल रहा है कि नहीं ,तो उसने सब सही चल रहा है बताया था। पूरी जिम्मेदारी उनकी है मैं कुछ नहीं जानता।

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