जीवन मे जितना सीखो उतना कम है, नित्य नया सीखने को मिलता है जहाँ से भी ज्ञान मिले बटोरते चलो

उतई ।न्यू कालेज कालोनी उतई में साहू परिवार के शुभ संकल्प से आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के तहत प्रवचनकर्ता बड़े पुरदा वाले कुमारी अंगेश्वरी पाण्डेय द्वारा ने सुदामा चरित्र को वर्णन करते हुए कहा सुदामा निर्धन नही सुदामा धनवान है सुदामा जी के पास सबसे बड़ा धन संतोष धन था सन्तोष रूपी धन जिसके मन मे हो उसका जीवन सुखमय होता है ,सब तो भगवान के दरवाजे मांगने जाते है लेकिन सुदामा जी तो भगवान को देने गए चार मुठी चाँवल का भोग लगाकर सुदामा जी चतुर्विध पुरुषार्थ धर्म, अर्थ,काम, मोक्ष को प्राप्त कर लिए,सुदामा जी की कथा में भाव मिलता है कि निर्धन और धनवान दोनो का धन है परम् धन इसका त्याग कभी न करे तभी जीवन मे मुक्ति सम्भव है। गरीबी मानव जीवन का अभिशाप है गरीबी में पदार्थ का रंग भी देखने वालों की नजरों में हो जाता है, सबके ऊपर दया की भावना मन मे हो, मंदिर के बाहर बैठे हुए भिखारियों के अंदर मे अगर भगवान का दर्शन न हो और मंदिर के अंदर जा पाषाण की मूर्ति मे भगवान ढूंढे तो भगवान मिलने वाले नही सभी जीव मे प्रभु का दर्शन करे किसी के लिए भेद न करे।
कुमारी अंगेश्वरी पाण्डेय ने आगे कहा गुरु का ज्ञान ही जीवन को मुक्ति के मार्ग में प्रशस्त करता है जीवन भर जितना ज्ञान हो सके एकत्रित करे अपने ज्ञान का अभिमान न करे जीवन मे जितना सीखो उतना कम है नित्य नव नव सीखने को मिलता है जहाँ से भी ज्ञान मिले बटोरते चलो और ज्ञान प्रदाता ही हमारा गुरु है चाहे वह जड़ हो या चेतन, सभी गुरु है, दीक्षा के गुरु एक लेकिन शिक्षा के गुरु अनेक ।
राजा परीक्षित भागवत की कथा सुनकर पंच फल निर्भयता, निःसन्देहता, हृदय में परमात्मा का साक्षात्कार, सर्वत्र परमात्मा का दर्शन, श्री कृष्ण के चरणों मे अपार प्रीति को प्राप्त किये, जीवन मुक्ति को प्राप्त कर राजा परीक्षित भगवद्धाम गए। परीक्षित मोक्ष के बाद भगवान श्री विग्रह मे तुलसी वर्षा के साथ कथा का समापन हुआ।

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