शादी के प्रलोभन से युवती 6 साल तक हुई शारीरिक शोषण का शिकार,थाने में न्याय की लगाई गुहार पर पुलिस ने कार्यवाही के बजाय मामले को दबाने का किया प्रयास

  • पुलिस ने खुद मनोरोग चिकित्सक बन पीड़ित युवती को मेंटल घोषित कर केश वापस लेने भी बोल दिया

परमेश्वर कुमार साहू@ गरियाबंद। एक तरफ सरकार महिलाओं की सुरक्षा के लिए कठोर कानून और न्याय व्यवस्था के लिए हर संभव प्रयास का दावा करते नहीं थक रहा है तो दूसरी ओर उनके पुलिस विभाग की नुमाइंदे शासन की सारे दावों की पोल खोल रहा है।भले ही सरकार पुलिस प्रशासन को आम नागरिकों के साथ मित्रवत व्यवहार करने तरह तरह के जतन कर रहा हो लेकिन आज भी पुलिस विभाग में कई ऐसे अधिकारी है जो खाकी का दुरुपयोग कर कानून के सारे नियमो की धज्जी उड़ाकर अंग्रेज जमाने के कानून चला रहा है।जिनके कारनामे से विभाग के उच्च अधिकारी आज भी अनजान है।
एक ऐसा ही मामला गरियाबंद जिले के पांडुका थाना क्षेत्र का है जहा पुलिस के कारनामों को सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे।एक पीड़ित लड़की शादी के प्रलोभन से अपने साथ 6 साल से शारीरिक शोषण का आवेदन और अपने आप बीती लेकर न्याय की गुहार लगाने थाना पहुंचती है और थाने में बैठे साहब आवेदन भी ले लेता है और थाने द्वारा कार्यवाही का आश्वाशन देकर पीड़िता को वापस घर भेज देता है।लेकिन जब पीड़ित लड़की आवेदन पर कार्यवाही नहीं होने पर फिर दूसरी बार जब आवेदन के विषय में जानकारी लेने थाना पहुंचती है तो साहब अपने जिम्मेदारियों के विपरीत कार्य करते हुए पीड़िता को केश वापस लेने का दबाव बनाकर थाना से भगा देते है।इतना ही नहीं पीड़िता द्वारा अपने साथ हुए शारीरिक शोषण की पूरा कहानी और सच्चाई बताते हुए थाना के जिम्मेदारों से न्याय की गुहार औ उचित जांच व कार्यवाही की मांग करती है।लेकिन कोइ भी उनके बातों और आवेदन पर कार्यवाही करने से इंकार कर देता है।आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की युवती अपने साथ हुए अत्याचार के विरूद्ध आवाज उठाकर लड़ने हर तरह से कोशिश करती है लेकिन किसी भी प्रकार से सहयोग न मिलने से थक हार चुप चाप बैठ अन्याय सहने मजबूर हो जाती है।लेकिन थाने में बैठे रौबदार साहब को इनकी परेशानियों के प्रति जरा भी दया नही आता है।ये कोई किस्सा या फिर कोई फिल्म का कहानी नही है।ये पाण्डुका थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक युवती की आपबीती और सच्ची कहानी है। जन्हा युवती ने कानून से अपने साथ हुए अन्याय को लेकर पुलिस से न्याय की गुहार लगाया था।लेकिन महीनों बीतने के बावजूद भी उसे न्याय नहीं मिल पाया। न्याय मिलना तो दूर जिम्मेदारों ने उनको फरियावाद को ही अनसुना कर दर दर की जिंदगी जीने मजबूर कर दिया और आरोपी उनकी जिंदगी तबाह कर मौज करने में लगा है।

पुलिस खुद मनोरोग चिकित्सक बन पीड़ित युवती को घोषित कर दिया मेंटल

बताना लाजमी है की पाण्डुका थाना क्षेत्र अंतर्गत जिस युवती ने अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए अकेली थाने पहुंची ,वो काबिले तारीफ है।लेकिन पुलिस की करतूत देखिए जिस पुलिस का काम नियमो के तहत निष्पक्ष जांच और कार्यवाही करना है उसने सारे नियमो को तार तार करते हुए पहले तो उसे केश वापस लेने का दबाव बनाया फिर उसके बाद पुलिस खुद मनोरोग चिकित्सक बन पीड़ित युवती को मेंटल घोषित कर दिया।एक तरफ युवती अपने साथ हुआ घटना से जिस हालात और मानसिक तनाव से गुजर रही है उसका अंदाजा उस युवती के अलावा और कोई नही जान सकता।लेकिन पुलिस प्रशासन उसकी मदद करने के बजाय उसका मजाक उड़ाने में लगे है।पुलिस ने उक्त युवती के साथ जिस तरह व्यवहार किया उससे खाकी के साथ इंसानियत शर्मसार होने लगा है।लेकिन किसी भी जिम्मेदार ने इस ओर कभी ध्यान नही दिया।

खाकी का रौब,पद का दुरुपयोग

शासन और उच्च विभाग द्वारा कानून व्यवस्था और समाज में शांति सुरक्षा की जिम्मेदारी जिनके ऊपर सौंपा है उन्हे अपने कर्तव्य के प्रति कोई सरोकार नहीं है।शारीरिक शोषण के इतने बड़े और गंभीर मामले पर पाण्डुका पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं करना,पीड़िता को केश वापस लेने की बात कहना और उसे खुद मानसिक रोगी कहना ,पुलिस के कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।जिसके चलते आज पीड़ित युवती ने न्याय की उम्मीद छोड़ गुमशुम अपना दर्द सहने पर मजबुर है।मामले में दिलचस्प बात ये भी है की युवती ने जिस युवक पर अपने साथ शादी का प्रलोभन देकर शारीरिक शोषण का आरोप लगाई है उनका मां बाप सरकारी नौकरी में है जो रसूखदार है।जो पैसों और पहुंच का विशेष दमखम रखता है।जिसके सामने कानून भी नतमस्तक हो गए।वही पीड़िता के निवास क्षेत्र में एक पूर्व जनप्रतिनिधि के द्वारा उनके रिशेदार जो थाने में पदस्थ है उनके द्वारा मामले में मिलीभगत कर मामले को दबाने संबंधी जानकारी भी सूत्रों से लगातार प्राप्त हो रही है।पीड़ित युवती ने न्याय पाने हर कोशिश किए लेकिन निराशा के आलावा उन्हें कुछ नही मिला।शासन द्वारा भले ही बेहतर कानून सुविधा की बात कह रहा है लेकिन आज भी पुलिस की छवि नही सुधरी और अंग्रेज जमाने का कानून आज भी खाकी का रौब दिखाकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मामलो को दबाने में महारत हासिल कर लिए है।जब इस मामले को लेकर हमारे संवाददाता ने पाण्डुका के जिम्मेदार थाना प्रभारी से जानकारी लेने पहुंचे तो उन्होंने कुछ बात सुनने से पहले ही अभद्रतापूर्ण व्यवहार करते हुए हमारे संवाददाता को परिसर से बाहर जाने बोल दिया।इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्दी का किस तरह से दुरुपयोग हो रहा है।वही इस तरह के मामलो को उजागर करने वाले रिपोर्टरों के साथ ओछी मानसिकता रखते हुए फर्जी कार्यवाही करने से भी बाज नहीं आते है।

महिला हिंसा का स्लोगन केवल दीवारों को बढ़ा रही है शोभा

गौरतलब है की शासन द्वारा महिला हिंसा रोकने हर संभव प्रयास कर रहे है जिसे इंकार नहीं किया जा सकता ।जिसके अलग से बजट राशि बनाकर लाखो खर्च कर रहा है।तो वही जागरूकता लाने तरह तरह के प्रयास कर दीवारों में लेखन कर प्रचार प्रसार भी कर रहे है।लेकिन जिम्मेदारो की लापरवाही से महिला हिंसा का लेख केवल दीवारों की बस शोभा बढ़ा रहे है लेकिन धरातल कुछ और ही बयां कर रही है।वही बीते माह महिलाओं की सुरक्षा संबंधी एक बड़ा कार्यक्रम जिला मुख्यालय में महिलाओं की सुरक्षा और उनको अधिकार दिलाने आयोजित हुआ था।जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में महामहिम राज्यपाल को आमंत्रित किया गया था लेकिन कुछ कारण से राज्यपाल तो नही पहुंचे लेकिन जाने माने पद्म श्री से सम्मानित और कलाकार जैसे राजनीतिक नेत्री कार्यक्रम में जरूर पहुंचे थे। जन्हा महिलाओ की सुरक्षा और अधिकार संबंधी बड़ी बड़ी बाते हुई,पर वह बाते केवल सभा और संबोधन तक ही सीमित रह गया।लेकिन जमीनी हकीकत में आज भी महिलाओ व लड़कियों को सुरक्षा और अधिकार सहित उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।जो दुर्भाग्य की बात है।

दो बार युवती का कराया गर्भपात ,मानसिक दौर से गुजर रही है पीड़िता

आपको बता दे की पीड़ित युवती ने अपना आप बीती मीडिया की टीम को बताया। युवक द्वारा पीड़ित युवती को शादी का प्रलोभन देकर 6 साल तक शारीरिक संबंध बनाया।जिस दरमियान युवती दो बार गर्भवती भी हो गई।लेकिन युवक द्वारा शादी का भरोसा देकर युवती को एक बार फिर झांसा दे दिया और युवती का जबरन गर्भपात करा दिया।सूत्रों के माने तो युवती को गर्भपात कराने और मेडिसिन देने में क्षेत्रीय स्वास्थ विभाग में जुड़े कर्मचारियों की मिलीभगत की बात सामने आ रही है।जो काफी गंभीर और कानून के विपरित मामला है।पीड़ित युवती आज भी न्याय की आस में टकटकी लगाए बैठी है।लेकिन किसी भी तरह से मदद न मिलने से उनके उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।पीड़िता अपना आप बीती मीडिया को बताते हुए फुट फुट कर रोती रही।

इस मामले को लेकर गरियाबंद एसपी झाड़ू राम ठाकुर और डीएसपी चंद्रेश ठाकुर को फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन दोनो अधिकारियों का नंबर आउट ऑफ कवरेज आया।

वर्जन

लड़की मानसिक रोगी है।साहब जैसा निर्देश देते है वैसी हम करते है।बाकी साहब ही बता पाएंगे।

भैया राम दीवान, एसआई थाना पाण्डुका

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