हर साल 5 दिसंबर को दुनिया भर में विश्व मृदा दिवस यानी वर्ल्ड सॉइल डे मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य है कि लोगों को मिट्टी के महत्व के बारे में जागरूक करना. बढ़ती हुई आबादी और उनके भोजन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए मिट्टी में लगातार अत्यधिक कीटनाशक और खादों का इस्तेमाल करके कृषि के उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे कम होने लगी है और जैविक गुण खत्म हो रहे हैं साथ ही मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी कम हो रही है इसलिए मिट्टी के महत्व को समझना जरूरी है.
स्वस्थ मिट्टी के बारे में लोगों तक सही जानकारी पहुंचे इसलिए इस दिवस का विशेष महत्व है विश्व में पहला विश्व मृदा दिवस 5 दिसंबर 2014 को मनाया गया था
इसके पश्चात हर वर्ष यह दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है.

विश्व मृदा दिवस 2021 की थीम है मृदा लवणीकरण को रोके मृदा उत्पादकता को बढ़ाएं
रिलायंस फाउंडेशन जो कि राजनांदगांव जिले के 3 ब्लॉक के लगभग 60 गांव में कार्यरत है. रिलायंस फाउंडेशन के द्वारा विश्व मृदा दिवस 2021 का आयोजन 4 गांव में किया गया रेंगाकठेरा गाढ़ाभवर, सिंहपुर और डोम्हाटोला गांव के करीब 110 किसानों, बचत समूह की महिलाओं, वार्ड के पंच एवं गांव के युवाओं ने विश्व मृदा दिवस के आयोजन के लिए बैठक की और चर्चा किया कि किस प्रकार मृदा संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है. रिलायंस फाउंडेशन की तरफ से मिट्टी के महत्व के बारे में विशेष जानकारी दी गयी.
▪️ हमारे भोजन का लगभग 95% हिस्सा मिट्टी से ही आता है और प्रति व्यक्ति औसत कैलोरी खपत का लगभग 80% मिट्टी में उगाई जाने वाली फसलों से ही आता है.
▪️ मिट्टी में रहने वाले सूक्ष्म जीव का कार्बन को स्टोर करने में विशेष योगदान रहता है
▪️ मृदा के अन्य प्रमुख कार्यों में भूमिगत जल को इकट्ठा करने में विभिन्न मृदा के स्तर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
▪️ संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार वायुमंडल की तुलना में मृदा 3 गुना अधिक कार्बन धारण कर सकती है और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को निपटने में मदद करती है.
▪️ मृदा कई पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन फास्फोरस और कार्बन इत्यादि के चक्रीय प्रक्रम को पूरा करने और इसके संग्रहण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है
▪️ मिट्टी की अधिकतर उपजाऊ क्षमता ऊपर के 6 से 8 इंच के हिस्से में रहती है, अतः मिट्टी के कटाव को रोकना हमारे खाद्य सुरक्षा के लिए अति आवश्यक है.
मृदा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए किए जा सकने वाले स्थानिक कार्य
▪️ रासायनिक कीटनाशकों व निंदा नाशक ओं का नियंत्रित उपयोग
▪️ जैविक खाद के प्रयोग को बढ़ावा देना एवं खेत में अवशेष को जलाने पर प्रतिबंध
▪️ वर्षा जल का समुचित प्रबंध एवं उन्नत सिंचाई तकनीक के प्रयोगों को बढ़ावा देना
▪️ एकल फसल चक्र पर प्रतिबंध व बहू फसल चक्र को अपनाने पर जोर देना
▪️ प्लास्टिक प्रदूषण ओं की स्थानिक रोकथाम
इन कदमों को अपनाकर मृदा स्वास्थ्य को बरकरार रखने में हम देश और विश्व का सहयोग कर सकते हैं. और इस से आने वाली पीढ़ी को भोजन और पोषण से सुरक्षा दिलाने में अपना योगदान कर सकते हैं.
