गुरू घासीदास जी की 265वी जयंती असोगा में 18दिसम्बर को

पाटन–सतनाम पंथ के प्रवर्तक एवं मानव-मानव एक समान जैसे महान विचारों के माध्यम से लोगों में सेवा करूणा समरसता और सम्मान का संदेश देने वाले गुरू घासीदास जी की 18दिसम्बर2021को 265वीं जयंती हैं। तथा छत्तीसगढ़ राज्य सहित देश-विदेश में रहने वाले उनके अनुयाई सतनामी 18दिसम्बर से लेकर 31दिसम्बर तक गुरू पर्व के रूप में गुरू घासीदास जी के महान विचारों-कार्यो को विभिन्न सामाजिक आयोजनों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
विदित हो कि सतनाम एवं गुरू घासीदास जी को मानने वाले बहुसंख्यक सतनामी पंथ का गौरवशाली ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान रहा है। जहां पंजाब प्रांत के नारनौल क्षेत्र में औरंगजेब के अन्याय-अत्याचारो के खिलाफ विरोध व संघर्ष की की इबारत इतिहास में “औरंगजेब के साथ सतनामियों का विद्रोह” के रूप में दर्ज हैं। वहीं संत गुरू घासीदास जी व गुरू गद्दी, जयस्तंभ पर श्वेत पताका , पंथी गीत और नृत्य तथा मालपुआ का प्रसाद व मांस-मदिरा के सेवन से दूर सात्विक आहार-विचार सतनामी समाज का विशेष पहचान रहा है।

असोगा में गुरू घासीदास जी की 265वी जयंती आयोजन के संबंध में आवश्यक बैठक जयस्तंभ चौक पर बुधवार 17नवम्बर को रात्रि में समाज के भंडारी व समाजिक कार्यकर्ताओं के उपस्थित में सम्पन्न हुई। जिसमें 18दिसम्बर2021को गुरू घासीदास जयंती एवं नवनिर्मित जयस्तंभ पर श्वेत ध्वज स्थापना क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं समाजिक पदाधिकारियों के आतिथ्य तथा पंथी पार्टी के द्वारा गुरू घासीदास जी के जीवन दर्शन व महान विचारों-कार्यो के दर्शन के साथ आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
इस दौरान बैठक में सतनामी समाज असोगा के भंडारी इन्द्र कुमार बंजारे,सांटीदार देव कुमार चतुर्वेदी,चैनू जोशी,शशी महिलवार, रोशन टंडन, लक्ष्मी प्रसाद महिलवार,मूशन धृतलहरे, लोकनाथ सोनवानी, राजेन्द्र मारकण्डे, जीवन धृतलहरे, भोजराम महिलवार, अश्वनी धृतलहरे सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।

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