उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ संपन्न हुआ छठ पर्व

पाटन। आस्था के महापर्व छठ पूजा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में व्रतियों ने सूर्य देव को ‘सूर्योदय अर्घ्य’ चढ़ाया। पाटन क्षेत्र के ग्राम सेलूद,चुनकट्टा,अमलेश्वर सहित अन्य गावों में निवासरत उत्तर भारतियों ने आज सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। तालाब में बनाए गए घाटों  पर व्रतियों ने अर्घ्य दिया। सूर्योदय के अर्घ्य के साथ ही 4 चार दिवसीय महापर्व छठ संपन्न हो गया। देश भर में अलग-अलग जगहों पर लाखों व्रतियों ने सूर्य को अर्घ्य दिया और आस्था के पवित्र जल में डुबकी लगाई। छठ पर्व में सूर्य देव और छठ मैया की आराधना-उपासना की जाती है।चार दिन तक चलने वाला छठ महापर्व मुख्यत: बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में लोग मनाते हैं। महापर्व के तीसरे दिन शाम को व्रती निर्जला रहकर डूबते सूर्य को ‘अर्घ्य’ देते हैं जबकि चौथे दिन उगते सूर्य को ‘अर्घ्य’ देने के साथ इस महापर्व का समापन होता है।

बुधवार को दिया था डूबते सूर्य को अर्घ्य
सूर्योपासना का यह पर्व कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है. इस वर्ष छठ पर्व की शुरुआत सोमवार को स्नान यानी नहाय-खाय के साथ हुई. इसके बाद मंगलवार को व्रतियों ने ‘खरना’ का प्रसाद ग्रहण किया. ‘खरना’ के दिन व्रती उपवास कर शाम को स्नान के बाद विधि-विधान से रोटी और गुड़ से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करते हैं. इसी के साथ व्रती महिलाओं का दो दिवसीय निर्जला उपवास शुरू हो गया।
मौके पर प्रमुख रूप से जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अध्यक्ष जवाहर वर्मा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य जयश्री वर्मा,संजय यदु, बल्लू राय,बलविंदर सिंह, चंदन साहू,रुपेंद्र सिंह,कृष्णकांत टांक,आशु सिंह, खुशी सिंह सहित व्रत धारी एवं ग्रामीण उपस्थित थे।

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, छठी मैया को ब्रह्मा की मानसपुत्री और भगवान सूर्य की बहन माना गया है. छठी मैया निसंतानों को संतान प्रदान करती हैं. संतानों की लंबी आयु के लिए भी यह पूजा की जाती है. वहीं यह भी माना जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे का वध कर दिया गया था. तब उसे बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा को षष्ठी व्रत (छठ पूजा) रखने की सलाह दी थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *