✍? रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद
युवा संघर्ष मोर्चा गरियाबंद जिलाध्यक्ष युमेन्द्र कश्यप नें प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि- छत्तीसगढ़ में धान की फसल अब तैयार हो गई है, लेकिन राज्य शासन द्वारा इस सत्र में इसकी खरीदी एक दिसंबर से शुरू करने की घोषणा किए जाने से किसानों में नाराजगी है।
जिलाध्यक्ष युमेन्द्र कश्यप ने कहा कि प्रदेश में मुख्य रूप से महामाया और सरना दो किस्म के धान की खेती होती है। इसमें महामाया जहां 115 से 125 दिन में तैयार हो जाता है। वहीं, सरना 130 से 145 का समय लेती है। प्रदेश में 15 जून से लेकर 30 जून तक फसल की बोआई पूरी हो जाती है। ऐसे में महामाया धान की फसल की कटाई का काम जहां नवम्बर के पहले सप्ताह में पूरी हो जाएगी। वहीं, सरना की कटाई भी पहले सप्ताह में ही शुरू हो जाएगी।
उन्होंने आगे कहा है कि किसानों को कटाई और मिजाई के लिए भी पैसे की ज़रूरत होती है। भाजपा के शासनकाल में लगातार एक नवम्बर से धान खरीदी के लिए हल्ला करने वाली कांग्रेस अभी तक इस मामले पर चुप्पी साधे हुई है, जिससे किसानों का धैर्य अब टूटता जा रहा है।
कश्यप ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में इसी तरह धान के रकबे को गुपचुप ढंग से कम किए जाने की साजिश भी कांग्रेस सरकार रच रही है। अफसरों पर दबाव डाला जा रहा है। कर्मचारियों को जबरन धान का रकबा कम दिखाए जाने का निर्देश दिया जा रहा है। रकबे को काफी कम कर धान खरीदने के अपने कर्तव्य से प्रदेश सरकार बचना चाह रही है। कांग्रेस शुरू से ही अपने घोषणा पत्र के उल्टा केवल 15 क्विंटल धान खरीद कर किसानों के साथ धोखा कर रही है। चुनाव के समय कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी घोषणा की थी कि किसानों का एक-एक दाना धान खरीदेंगे। तो अब किसानों का दाना-दाना खरीदने में आखिर भूपेश सरकार को क्या दिक्कत है ? ऐसा लगता है कि दुर्भावनावश यह सरकार प्रदेश की जनता को अन्य योजनाओं की तरह धान खरीदी में भी केंद्र की भाजपा सरकार के निर्णयों का लाभ नहीं लेने दे रही है। उन्होंने कहा कि इसी तरह केंद्र सरकार लगातार फसलों के एमएसपी में वृद्धि करती जा रही है, लेकिन छत्तीसगढ़ के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
श्री कश्यप ने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि धान खरीदी हर हाल में 15 नवंबर से प्रारंभ करे। धान की पूरी कीमत का भुगतान एकमुश्त हो। पिछला बकाया भुगतान तुरंत हो। केंद्र द्वारा एमएसपी में लगातार किए गए वृद्धि का लाभ किसानों को देना सुनिश्चित हो। गिरदावरी के बहाने रकबा कटौती पर पूरी तरह रोक लगाए जाएं। कांग्रेस की घोषणा के अनुरूप किसानों का दाना-दाना धान खरीदे जाएं। घोषणा पत्र में किए वादे अनुसार किसानों को दो वर्ष का बकाया बोनस दिए जाए।
