अंकित बाला@पखांजूर। हम बात कर रहे है कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक के ऐसेबेड़ा पंचायत की जहाँ शासकीय कर्मचारी की लापरवाही के चलते आज मवेशी की जिंदगी खतरे में …दरसल सरकार ऐसेबेड़ा पंचायत में पशु अस्पताल तो खोल दिया गया है परंतु अस्पताल में हमेशा ताला लगा रहता है …कभी भी इसे खोला नही जाता जिमेदार पदस्त कर्मचारी हमेशा नदारत रहते है। ग्रामीणों की माने तो कर्मचारी हमेशा नदारत रहते है। ग्रामीण अपने पशु मवेशी का ईलाज कराने जब भी अस्पताल परिषर पहुचते है अस्पताल बंद पाया जाता है …जिससे आज आम जनता परेसान है लापरवाही के चलते कभी भी कोई पशु की जान जा सकती है .. अब सवाल ये उठता है आखिर इसका जिमेदार कौन ? आपको बता दु सरकार द्वरा पशुओं के लिए लाखो खर्च कर रही है …हर गांव में गोठान का निर्माण किया जा रहा है ,पशु अधिनियम की बड़ी बड़ी बातों का सरकार दम भर रही है और दूसरी ओर जिमेदार डॉ .अपने मुख्यलय से नदारत रहते है । अब सवाल ये उठता है कि जिमेदार कौन पदस्त कर्मचारी है ,या मॉनीटिरिंग करने वाले अधिकारी जिनके कंधों पे है जिम्मा…अब देखना ये होगो की इस लापरवाह डॉक्टर के ऊपर क्या करवाई होती है!
अब अगर बात की जाए शासन के गाइडलाइंस का जिसमे साफ तौर पर बताया गया कि सभी को मुख्यालय में रहकर काम करना पड़ेगा जिस आदेश का धज्जियां ये बेख़ौफ़ लोग उड़ा रहे है, मुख्यालय से कई किलोमीटर दूर अपने सुविधा के हिसाब से रह रहे संबंधित कर्मचारियों द्वारा खुद की जिम्मेदारी से भागते दिखाई दे रहे है जिसका नुकसान ग्रामीणों को उठाना पड़ता है जब मवेशियों को परेशानी होती है और फोन नही लगने या फोन का बंद आना अगर फोन लग भी जाये तो कोई घंटो बाद डॉक्टरों का पहुचना या आना ही नही कभी कभी तब तक मवेशियों की जान तक चली जाती है, ग्रामीणों की मांग है कि किसानों और मजदूरों की सुविधा को देखते हुए मुख्यालय रहने की बात को गंभीरता से लिया जाए,
ग्रामीणों का कहना——–
आये दिन अस्पताल बंद रहता है डॉक्टर पखांजुर में रहते है नही खोलते है जबकि सरकार द्वरा यहाँ लाखो का बिल्डिंग बनकर दिया गया है पर कभी ताला ही नही खुलता ,घंटों बीमार पशुओं को लेकर इन्तेजार करते है अस्पताल खुलने का पर समय पर नही खुलता फोन के माध्यम से जानकारी दी जाती है तब जाकर आते है देरी से ईलाज होने पर पशुओं का जान जा सकती है !
शासकीय कर्मचारी मुख्यालय से नदारत पशुओं की जिंदगी खतरे में
