डीजे, ढोल मंजीरों और मांदर के थाप पर झूमते-नाचते किये माँ दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन

पाटन। नवरात्र में अंचल में जगह-जगह पूजा पंडालों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन दुर्गानवमी के दिन से शुरू हो गया।अष्टमी हवन-पूजन के बाद आयोजन समितियों के लोग वाहनों पर रखकर प्रतिमाओं को लेकर नाचते-गाते विसर्जन घाट पहुंचे। जहाँ विधि पूर्वक सभी प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ।
दुर्गा प्रतिमाओं एवं मनोकामना ज्योति कलश का विसर्जन सुबह से ही शुरू हो गया था। अंचल के ग्राम सेलूद, छाटा, ढौर,गोंड़पेंडरी, चुनकट्टा,मुड़पार,सहित अन्य गावों में नवमीं के दिन दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जित किया गया।
वही कई गांवों में विजयादशमी के दिन भी प्रतिमा विर्सजन किया जाएगा।आयोजन समितियों से जुड़े लोग ढोल-ताशे पर नाचते-झूमते हुए विसर्जन जुलूस में शामिल हुए। विभिन्न मार्गों से होते हुए जुलूस विसर्जन स्थल पहुंचा। इस दौरान खूब अबीर-गुलाल उड़े। सभी गावों में पूरे दिन मैया के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालु मदमस्त डीजे एवं ढोल मंजीरों और मांदर के थाप पर झूमते-नाचते विसर्जन यात्रा में चल रहे थे। विसर्जन यात्रा में कोविड को लेकर इस वर्ष भीड़ कम रही, मगर भक्ति का खुमार ऐसा कि मैया के जयकारे लगाते और नाचते-गाते आगे बढ़ रही थी। रंग-गुलाल उड़ाते रहे।

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