रायपुर। श्रमायुक्त छत्तीसगढ़ रायपुर व्दारा महंगाई भत्ता में 2.66 पैसे प्रति दिवस का बढ़ाकर न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण किया गया है। जिससे अब दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों का मासिक वेतन 9280/- रूपये तक पहुंचा है।
आज के परिवेश में महंगाई अपनी चरम सीमा पर है।
एक सामान्य परिवार (पति पत्नी, मां बाप और 2 से 3 बच्चे) के मासिक बजट का आंकलन-
राशन – 4000 रूपये
गैस – 1000 रूपये
बिजली बिल – 500 रूपये लगभग
सब्जी – 3000 रूपये
दूध – आधा किलो के हिसाब से महीने का 600 रूपये
बच्चो की पढ़ाई -2500 रूपये
चिकित्सा – 1500 रूपये (छोटे स्तर पर )
पेट्रोल – 3000 रूपये
योग- 16100 रुपए वेतन – 9280 रूपये
अंतर – 6820 रूपये
अब प्रतिमाह छत्तीसगढ़ के लाखों परिवार 6820/- की कमी को मेनटेन करने के लिए कर्ज के बोझ में दबता जा रहा है।
ऊंचे ब्याज दरों पर बाजार से कर्ज ले रहा है।
हमारे राज्य के मुखिया दूसरे राज्यों में भलमंशी लुटा रहे हैं
सत्ता पक्ष के लोग महंगाई के विरोध में सायकल रैली निकाल रहे।
साहब हमारे छत्तीसगढ़ की अधिकांश परिवार श्रमिक वर्ग से हैं। और आप महंगाई भत्ते 2.66 पैसा बढ़ाकर भलमंशी न लुटाये।
तत्काल वेतन का पुनरीक्षण करते हुए न्यूनतम मजदूरी 16000 से 18000 रूपये निर्धारित करने के लिए श्रम विभाग को आदेशित करें।
मजदूर को भिखारी न समझें।
हम अपने परिश्रम के बदले मात्र अपने परिवार का भरण पोषण चाहते हैं।
हमने कभी महंगी गाड़ी में घूमने का नहीं सोचा, हमने कभी रंग महलों में रहने का नहीं सोचा।
श्रमिक हित रक्षार्थ श्रम विभाग है शोषण के लिए उतारू न होवे आदरणीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ सरकार से निवेदन है कि श्रम विभाग को निर्देशित करते हुए वेतन पुनरीक्षित करते हुए मासिक वेतन कम से कम 18000 करने का आदेश प्रसारित करने की कृपा करेंगे।
