पखांजुर को जिला बनाने की मांग को लेकर पत्रकार यूनियन द्वारा मुख्यमंत्री के नाम पखांजुर SDM को दिया गया ज्ञापन

पंखाजूर। कांकेर जिले से 150 किमी दूरी पर बसें भारत सरकार द्वारा DNK प्रोजेक्ट के तहत बसाया गया परलकोट क्षेत्र जहाँ pv 1 से लेकर pv133 गांव के अलावा अन्य 100 अन्य गांव का समूह है। परलकोट क्षेत्र जहाँ सालो से जिला मुख्यालय से दूरी की वजह से या तो शासन के महत्वपूर्ण योजनाओं से वंचित रहे या भ्रष्टाचार के शिकार हो गए, वही लगातार सालो से पखांजुर को जिला बनाने की मांग को लेकर हजारों की संख्या में कई बार आंदोलन किया गया पर अब तक कोई सुनवाई नही हुई, वही आज छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन परलकोट की ओर से क्षेत्र की समस्याओं को देखते हुए हजारों की संख्याओ की सुविधा के लिये पखांजुर को जिला बनाने की मांग को लेकर SDM पखांजुर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया वही अगर बात की जाए परलकोट क्षेत्र की तो बता दे कि प्राचीन यहाँ क्षेत्र इतिहास,गौरवशाली जमीदारी में से एक है। छत्तीसगढ़ ब्रिटिश शासन काल में प्रथम शहीद शिरोमणि राजा गैंदसिंह जी के जन्म और कर्म भूमि है पंखाजूर,जो अग्रेजों के शोषण चक्र से मुक्ति पाने,अंग्रेज द्वारा झूठा मुकदमा चलाकर 20 जनवरी 1825 ई.उनके महल के सामन परलकोट में फांसी दी गई थी।भारतीय स्वतंत्रता में परलकोट/पंखाजूर के धरती निर्णायक भूमिका निभाने में एक अलग पहिचान रखती है,जहाँ पर DNK प्रोजेक्ट के तहत केंद्र सरकार द्वारा 133 पी.व्ही.ग्राम एवं सैकड़ों जनजाति समुदायों के बसे पुरखोति गाँव के अलावा,पंखाजूर में अतिरिक्त सत्र न्यायालय,उप पुलिस अधिक्षक के स्थापना,अनुविभागीय अधिकारी राजस्व,गैंदसिंह कालेज,जिला के सब से बडे़ 100 बिसतर सिविल अस्पताल,कृषकों के लिए मंडी एवं कृषि क्षेत्र में भी धान,मक्का,सब्जी,मछली पालन,व्यापार एवं छत्तीसगढ़ सर्वधिक राजस्व देने वाला क्षेत्र जो तेलंगाना,महाराष्ट्र उड़ीसा,सिमा को मध्यस्थता करने हर वक्त बड़ते अपराध से शासन-प्रशासन को जवाबदेही,एवं उन्तशिल क्षेत्र जो एतिहासिक पहिचान रखने वाला पंखाजूर(परलकोट) को जिला बनाने का मांग बर्षों पुरानी है,

वही अगर अंतागढ़ विधानसभा की बात की जाए तो क्षेत्र के जनता एवं मतदाताओं द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा 70% भूभाग परलकोट क्षेत्र में आता है। जिनकी मांग पखांजुर को जिला बनाने की है।

पत्रकार यूनियन के जिला सचिव मिथुन मण्डल का कहना है कि एक ओर जहां जिला मुख्यालय से दूरी होने की वजह से जिला मुख्यालय के अधिकारियों की नज़रों से दूर शासन की महत्वपूर्ण विकास की योजनाओं से या तो वंचित रह जाते है या आखरी इंसान तक पहुँचे पहुँचे भ्रष्टाचार के शिकार हो जाते है जिसकी शिकायत तक जिला मुख्यालय तक पहुचाने में दूरी की वजह से नही जा पाते जिसका खामियाजा आम लोगो को भुगतना पड़ता है, यही वजह है कि आज भी कई गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।

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