खेतों में पड़ती दरारों ने लाई किसानों के चेहरों पर भी चिंता की लकीरें
(सतीश पारख की कलम से)
उतई- सावन का महीना पवन करे शोर जियरा रे झूमे ऐसे जैसे मन मा नाचे मोर
इस सावन इस कहावत के विपरीत परिस्थितियां देखने को मिल रही है..भरे सावन महीने में बारिश न होने से उमस भरी गर्मी से जहां एक ओर जनता परेशान हैं वहीँ किसानों के सामने भी खेतों में पड़ रही दरारों के कारण बारिश का इंतजार करते चेहरे पर शिकन साफ झलक रही है। ना पवन का शोर है…ना मोर नाच रहे…ना लोगों का मन झूम रहा…
वहीं विद्युत विभाग द्वारा समय बे समय बिजली का आंख मिचौली ने आम जनता को तो तपिस दि है जिसके चलते बहुतायत घरों में बन्द हो चुके कूलर वापस चालू हो गए हैं।
वही किसान दोहरी मार से जूझ रहा है मौसम के बेरुखी से जहां उदास हैं वही बिजली कटौती से जिन किसानों के पास पम्प से धान के पौधों को बचाने की व्यवस्था है तो बिजली कटौती से वह भी सम्भव नही हो पा रहा हैं।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्षा का प्रतिशत विगत वर्षों की अपेक्षा ज्यादा है किंतु ग्रीष्म काल सी पड़ती गर्मी ने सभी को दुखी कर दिया है।
ना सिर्फ किसान अपितु आम जन मानस भी राहत भरी बारिश का इंतजार कर रहा है ताकि इस उमस भरी गर्मी से निजात मिल सके व कृषि कार्य भी प्रगति कर सके।

