हिंदूओं का खास पर्व नागपंचमी आज,जानें नागों की पूजा क्यों होती है, क्यों मनाते हैं नागपंचमी

नाग पंचमी का त्योहार हर साल सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह शुभ तिथि 13 अगस्त दिन शुक्रवार को है। भगवान शिव के गले में स्थान पाने वाले नागों की हिंदू धर्म में पूजा की जाती है, दरअसल ग्रहों के समान नागों को भी प्रभावशाली माना गाय है। मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा करने से सर्पदंश का भय नहीं रहता साथ ही ग्रहों का प्रतिकूल असर भी दूर होता है।

हिंदू धर्म में नाग को देवतुल्य माना गया है। दूसरी बात नाग भगवान महादेव को विशेष प्रिय है। यही कारण है कि नाग देव महादेव के गले में विराजमान रहते हैं। पंडित अनीश पांडेय के अनुसार नागपंचमी के दिन महादेव और नागदेव की पूजा से कालसर्प दोष से तो मुक्ति मिलती ही है सांप काटने का अनावश्यक भय भी समाप्त हो जाता है। महादेव की कृपा से सांप कभी नुकसान नहीं पहुंचाते। वहीं, विधि-विधान से पूजा करने से घर में शांति व समृद्धि आती है।

देश के कई हिस्से में नागदेव को कुलदेवता के रूप में पूजा किया जाता है। यह भी मान्यता है कि धरती का भार नागदेव के फन पर टिका है। पंडित अनीश पांडेय कहते हैं सनातन संस्कृति में प्रचलित मान्तया के अनुसार धरती पर बड़ी संख्या में विषैले जीव-जन्तु हैं। नागदेव इन विषैले जीव जन्तु से हमारी रक्षा करते हैं। नागदेव की असीम कृपा के कारण ही देवता के रूप में पूजा की जाती है।

नागपंचमी पर नागदेव की पूजा अर्चना के बाद घर के प्रवेश द्वार पर नाग-नागिन का चित्र बनाने की भी प्रथा है। वहीं, नागदेव जिनका कुलदेवता है वे आज की रात विशेष पूजन करते हैं। घर में नागदेव की मूर्ति स्थापित कर पूजा करते हैं। पूजा स्थल पर हल्दी और अर्पण का छिड़काव किया जाता है।

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