डिजिटल भारत का सपना हुआ सकार, डिजिटल के माध्यम से किसान ले रहे है खेती से लाभ

छत्तीसगढ़ राज्य एक ऐसा राज्य जहां धान की विभिन किस्म उगाये है, यहाँ विभिन प्रकार के धान के किस्म स्वास्थ्य प्रद ही नहीं रोजगार को उन्मूलन के लिए जाने जाते है, छतीसगढ़ मे मुखयतः किसान धान की खेती पर ही निर्भर रहते है पूरे वर्ष भर खेती कार्य कर अपने परिवार का भरण पौषण करते है।

राजनांदगाँव जिला जहां किसान कई वर्ष से परंपरागत खेती करते है और मुख्यतः तकनीकी के अभाव के कारण बहुत सारी प्राकृतिक विपदा, कीट पतंग और रोगो की समस्या करना पड़ता है। राजनांदगांव में चारभाठा नामक का एक छोटा सा गांव है, जिसकी आबादी 1271 है। यहां की 21.87% आबादी अपनी आय के लिए केवल कृषि पर निर्भर है। यहाँ दोमट मिट्टी पाई जाती है, इस मिट्टी में नमी धारण करने की शक्ति बहुत कम होने के कारण सिंचाई की आवश्यकता होती है। यहां जल स्रोत नहीं होने के कारण लोग एक ही फसल ले पाते हैं।

चारभाठा गांव का एक किसान जिसका नाम गिरवर साहू है। जिनकी उम्र 48 साल है, उन्होंने 10वीं तक की शिक्षा प्राप्त की है। उनके परिवार में कुल 4 सदस्य हैं – जिनमें उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी शामिल है। उनके पास आय के दो स्रोत थे, एक कपड़ा व्यवसाय था और दूसरा कृषि, जिससे वे अपने परिवार का भरण पोषण करते थे, लेकिन कोरोना के भयानक दौर में लॉकडाउन के कारण उनका कपड़ों का पूरा व्यवसाय बर्बाद हो गया, अब उनके पास है आय के लिए कृषि ही शेष रह गया। इसके अलावा और कोई साधन नहीं था, अगर खेती नहीं होती तो उन्हें एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता था क्योंकि खाने-पीने के साथ-साथ वे बच्चों की शिक्षा की शुल्क भी देय करना एक बहुत बड़ी चुनोती बन गयी थी।

किसान के पास कुल 2 एकड़ जमीन है, जिसमें वे पहली फसल धान की और दूसरी चने की फसल लेते हैं। जानकारी के अभाव में वे पारंपरिक खेती करते थे, जिससे उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। पिछले वर्ष (जुलाई 2020) उन्होंने हाइब्रिड धान की किस्म बोई थी। नर्सरी लगाने के समय ही उन्हें अपने ही गाँव के अन्य किसान से ज्ञात हुआ की रिलायंस फाउंडेशन द्वारा एक दिवसीय दूर सभा (कॉन्फ्रेंस कॉल) का आयोजन किया गया है उसी समय कोरोना की पहली लहर आयी थी, किसान ने धान की नर्सरी लगाने की विधि और खाद डालने की सही मात्रा मे चर्चा किए, कृषि विशेषज्ञ डॉ. अंजलि ने नर्सरी लगाने की विधि के बारे मे बताते हुये कहा की नर्सरी को 21 दिन के अंदर मे ही रोपाई करे जिससे पौधे की वृद्धि सही रूप हो सके साथ ही किसान भाई ध्यान रखे की एक वर्ग मीटर मे 33 पौधे ही रोपाई करे जिससे पौध की वृद्धि अच्छे से हो पाये। खाद की जानकारी देते हुये बताए की एनपीके आपको प्रति एकड़ 80-100किलो नत्रजन, 40-50किलो फोस्पोरस, 20 -25किलो पोटास, 10-15किलो ज़िंक का प्रयोग करे।

किसान ने अपने खेत में विशेषज्ञ द्वारा दी गई सलाह का पालन किया, तत्पश्चात उसे 2 एकड़ से कुल 58 क्विंटल उत्पादन मिला, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4 क्विंटल प्रति एकड़ अधिक था। जिसमें से किसान ने 30 क्विंटल 2500 रुपये प्रति क्विंटल और शेष 28 क्विंटल को 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा और बीज से लेकर जुताई से कटाई तक का खर्च 31,200 रुपए हुये। किसान को खेती का सारा खर्चा काटकर 71800 रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।

गिरवर साहू ने कहा की “इस भयानक कोरोना महामारी के समय मे खेती ही एक मात्र साधन था, वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने से साथ ही उत्पादन के साथ आय मे भी वृद्धि हुई, जिसके कारण घर का खर्च और बच्चो की पढ़ाई प्रभावित नहीं हुई, इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिए रिलायंस फ़ाउंडेशन और कृषि विज्ञान केंद्र सुरगी को धन्यवाद आभार करता हूँ।“

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