कांकेर। जिले के किसान खेती बाड़ी के साथ साथ अपने जमीन को लेकर अक्सर चिंता करते है की आने वाली पीढ़ी तक अभी जैसे जमीन उपजाऊ है क्या आगे भी रहेगी और इससे हटके और एक परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है और वो है बंजर जैसे जमीन ,सिर्फ नाम के जमीन रह गया है ,उसमे कोई भी फसल नहीं होती ,ऐसे में किसानों को किसानों के लिए एक चुनौती होती है ,ऐसे ही एक किसान पखांजूर छेत्र के ग्राम डोंडे के निवासी है
रघुनाथ ग्राम डोंडे पखान्जुर तहसील के अन्तर्गत निवासी है। उनके परिवार काफी बड़ा है जिनकी जरूरतों को पूरा करना ,और यह सिर्फ कृषि पे ही निर्भर होते है जिनके घर मे ६ सदस्य जिनमे उनके पत्नी ,१ बेटा और उनके ३ बेटी सामिल है।
उन्होने ६ री तक की पड़ाई की है। उनके पास कुल ६ एकड की जमिन है। जिसमे बरसात के समय सिर्फ ५ एकड़ जमीन में धान की फसल लेते है। और बाकी जमीन उपजाऊ नही है ,कोई भी फसल लगाने से नही होता है गर्मी के समय में मक्का के तुरंत बाद में सब्जी का फसल ले रहे थे । और २ एकड़ जमीन उपजाऊ न होने के कारण किसी भी प्रकार का फसल नहीं ले पा रहे है ।उनके आय का स्त्रोत मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है। और आपने परिवार मे होने बाले खर्च खेती करके पूर्ति की जाती है। ऐसे में बंजर जमीन का होना एक अपने आप में चुनौती पूर्ण होता है
रघुनाथ खरिफ सीजन मे मक्का की खेती के तुरंत बाद सब्जी के फसल की तथा अब उन्हें अपने खाली पड़े हुए २ एकड़ जमीन की चिंता होने लगी तथा अब फसलों से जो आए हो रही थी अब परिवारों के खर्च के आगे कुछ नहीं था , बढ़ती महंगाई को देखते हुए रघुनाथ जी ने २ एकड़ जमीन को उपजाऊ कैसे किया जाए उसकी तरकीब ढूंढने लगे ।
रघुनाथ जी करीबन २ साल से रिलायंस फाऊंडेशन के साथ जुड़ा था। उन्हे पता चला की उनके गावँ मे रिलायंस फाऊंडेशन के द्वरा १२ दिसंबर 2020 को एक मृदा के उपर सॉइल हेल्थ मैनेजमेंट पर एक प्रोग्राम कृषी पर रखा गया है। उन्होने उस प्रोग्राम में भाग लिया। जिसमे उन्होने विशेषज्ञा से बात की।और अपने जमीन मे आने बाले समस्या को लेकर चर्चा की।
रघुनाथ जी ने अपने जमीन के बारे मे चर्चा करते हुये कहा की हमारे जमीन में कोई भी फसल करता हु तो ठीक से नही होता है ,मृदा के उर्वरा को बढ़ाने के लिए क्या कर सकते है । विशेषज्ञा मिस्टर थानेंद्र कोमा जो _ कृषी विशेषज्ञा है। उन्होने बताया की आपके खेत में हरी खाद का उपयोग करे । जिससे आपकी खेत धीरे धीरे उर्वरा में सुधार जायेगी । इसके अलावा रघुनाथ जी ने आपने जमीन के बारे मे और भी जानकारी ली। उन्होने हरी खाद का उपयोग किया। जिससे ६ महीने में मृदा में परिवर्तन आने लगा ।
रघुनाथ जी ने उस जमीन में लगभाग १५० डेसिमील मे जगह मे ककरोल की फसल की, । जिसमे उनका ७०००० हजार खर्चा हूई। तथा उन्होने बाजर के अनुसार ६० रुपया किलो के हिसाब में बेचा जिसमे उन्होने १५०००० रूपाय प्राप्त किया। जिसमे उनका कुल लाभ ८०००० रूपाय हुआ। उन्हें परिवार के चलते आथिर्क तंगी का सामना नही करना पड़ा एव पूरे परिवार की जरूरतों को पूरा कर पाए । अभी भी फसल आ रहा है , साथ ही साथ रिलायंस फाउंडेशन को धन्यवाद किया ।
रघुनाथ जी ने बताया की सभी किसान को रिलायंस फाऊंडेशन मे जुड्ना चाहिये। और उनके टोल फ़्री नंबर 1800 419 8800 मे फोन कर खेती पशुपालन से सम्बंधित सभी परेशानियो का जानकारी लेनी चाहिये।
