कांकेर। जिले में पशुपालन भी एक अहम भूमिका हमेशा होती है कृषि के साथ साथ यह के किसान अपने ही घरों में पशुपालन कर उससे जैविक खादो का निर्माण कर फसलों में उपयोग करते है तथा जिनके पास अधिक कृषि भूमि न होने पर वह पशुपालन तथा कृषि दोनो का सहारा लेते है अपनी आजीविका के लिए । अपनी घर के जरूरतों को पूरा करने के लिए ,यदि आय का एक साधन यदि कम हो जाए या ना के बराबर हो तब किसान का चिंता एवम मानसिक तनाव तो जायज है ऐसे ही एक किसान पखांजुर क्षेत्र के ग्राम इंद्रप्रस्थ के निवासी है
सुरेश मांझी ग्राम इन्द्रप्रस्थ पखान्जुर तहसील के अन्तर्गत निवासी है। की इनके घर की जरूरत कृषि एवम पशुपालन दोनो से आजीविका पूर्ण होती है एक मात्र कारण कृषि भूमि का कम होना , उनके परिवार मे ४ सदस्य जिनमे उनके पत्नी ,बेटा और उनके बेटी सामिल है।
उन्होने पड़ाई न के बराबर की है। पर कृषि से संबंधित जानकारी थोड़ा बोहोत रखते है पर जब अपने से या दूसरे किसी जगह से सुझाव का कोई भी असर न होने पर किसान को मानसिक तनाव का सामना करना पैदा है उनके पास कुल २ एकड की जमिन है। जिसमे बरसात के समय धान की फसल लेते है। और गर्मी के समय १ एकड़ में मक्का तथा बाकी १ एकड़ में सब्जी का फसल ले रहे थे । चुकी पानी की पर्याप्त साधन नही है इसलिए ।उनके आय का स्त्रोत मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है। और आपने परिवार मे होने बाले खर्च खेती करके पूर्ति की जाती है।
सुरेश मांझी खरिफ सीजन मे मक्का की खेती में ज्यादा मुनाफा न होने के कारण , मक्का की फसल लेने के तुरंत बाद लगभग आधा एकड़ ( ५० डेसिमील) लौकी की खेती कर रहे थे। उनके लौकी खेत मे लौकी अभी आ ही रहे थे की उनको लगा की सब ठीक है पर जैसे ही लौकी आ रहे थे तीन चार दिनों बाद वह फल सुखके नीचे गिरने लग गया काफी परेशान थे।
सुरेश मांझी करीबन १ साल से रिलायंस फाऊंडेशन के साथ जुड़ा था। उन्हे पता चला की उनके गावँ मे रिलायंस फाऊंडेशन के द्वरा १३ नवंबर 2020 को वॉट्सएप के माध्यम से जियो चैट / जियो ४ जी वर्चुअल कैंप के माध्यम से एक प्रोग्राम कृषी पर रखा गया है। उन्होने उस जियो चैट / जियो ४जी वर्चुअल कैंप मे भाग लिया। जिसमे उन्होने विशेषज्ञा से बात की।और अपने फसल मे आने बाले समस्या को लेकर चर्चा की।
सुरेश मांझी ने अपने फसल के बारे मे चर्चा करते हुये कहा की हमारे लौकी के फसल में फल तो लग रहा है पर वह तीन चार दिन बाद गिर रहा है । इसके दवाई बताये। विशेषज्ञा मिस्टर थानेंद्र कोमा जो _ कृषी विशेषज्ञा है। उन्होने बताया की आपके खेत में सूक्ष्म पोसक तत्व की कमी है बोर नाम के एक तत्व आता है ८ से १० ग्राम टंकी में डाले तथा स्प्रे करे । जिससे आपके सब्जी में पोशाक तत्व की कमी दूर होगी एवम फलों का गिरना काम हो जायेगा । और खर्चा भी कम होंगे । इसके अलावा सुरेश मांझी ने आपने फसल के बारे मे या पुपालन संबंधित जानकारी ली एवम जैविक खादो का इस्तेमाल कैसे करना है , और भी जानकारी ली। उन्होने उस दवाई का अपने लौकी के खेत मे उपयोग किया। जिससे एक हप्ते के अनदर लौकी का गिरना पूरी तरह काम हो गया और फुल और फल अच्छे लगने लगा है। अब फसल को बाजारों में बेचने लगा ।
सुरेश मांझी ने लगभाग ५० डेसिमील मे जगह मे १४००० हजार की लागत से फसल की, । जिसमे उनका १४००० हजार खर्चा हूई। तथा उन्होने बाजर के अनुसार २० या ३० रुपया किलो के हिसाब में बेचा जिसमे उन्होने ६२००० हजार रूपाय प्राप्त किया। जिसमे उनका कुल लाभ ४८००० हजार रूपाय हुआ। उन्हें कोरोना के चलते आथिर्क तंगी का सामना नही करना पड़ा एव पूरे परिवार की जरूरतों को पूरा कर पाए । साथ ही साथ उनके बच्चो के अच्छे स्कूल में दाखिला भी कराया।
सुरेश मांझी ने बताया की सभी किसान को रिलायंस फाऊंडेशन मे जुड्ना चाहिये। और उनके टोल फ़्री नंबर 1800 419 8800 मे फोन कर खेती पशुपालन से सम्बंधित सभी परेशानियो का जानकारी लेनी चाहिये।
