✍? रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद
मैनपुर – आज से करीबन 30 साल पहले गांव में पोस्टकार्ड अंतर्देशीय पत्र में समाचार लिखने वाला एक विशेष व्यक्ति गांव में होता था। जिनके पास गांव के बुजुर्ग मां-बाप या फिर बड़े भैया बड़ी बहन पहुंचकर अपनों से दूर रहने वाले संबंधियों के लिए विशेष खबर पोस्ट कार्ड एवं अंतरदेशीय पत्र के माध्यम से घर के माली हालत खेती खार स्वास्थ्य पढ़ाई लिखाई या फिर ₹500 रुपये भिजवाने के लिए जरूर चिट्ठी में खबर के माध्यम से जिक्र होता था। समाचार लिखने वाला गांव के पढ़े-लिखे बाबू बकायदा ओम गणेशाय नमः से चिट्ठी लिखने का शुरुआत करते हुए बुजुर्ग बाप अपने बेटे के लिए चिट्ठी लिखवाने के लिए पहुंचने पर बाबू शुभाशीष,,, लिखना समाचार मालूम हो,कि हम लोग यहां पर परिवार सहित खुशी से हैं। आप लोग भी खुशी पूर्वक जिंदगी जी रहे होंगे। अपने बेटे का नाम लिखकर प्रिय अशोक बाबू खेती किसानी के सीजन चल रहा है। मजदूर खेती में लगाया हूं। आपके छोटे भाई बहन स्कूल में दाखिला लिया है। घर के काम धंधा अधिक होने के कारण आपके मां की तबीयत आये दिन खराब रहने से मैं बेहद परेशान रहता हूंँ। बाकी सब कुशल मंगल से हैं। फिलहाल मुझे ₹500 भिजवाने का कष्ट करेंगे। ज्यादा क्या लिखूं आप खुद समझदार हैं। आपके मां कहती है बेटा का याद बहुत आ रही है। दीपावली में जरूर आना बेटा। अंतरदेसीय पत्र सीधा पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में पहुंचता था। अपने बेटा के जवाबी पत्र के इंतजार में बूढ़े मां बाप का या फिर रक्षाबंधन की सीजन में बहन के द्वारा लिखा हुआ चिट्ठी पोस्टमैन घंटी की टन टन आवाज लगाते हुए घर तक पहुंच कर चिट्ठी पहुंचाते थे। समय परिवर्तन के आधार पर संचार के नई तकनीक आने के कारण पूरी तरह से चिट्ठी पत्री बंद हो गया है। आज मोबाइल के माध्यम से घंटों के काम मिनटों में मिंनटो के काम सेकेंडों में होने लगी है। लेकिन भाई बहन का प्यार मां-बाप का स्नेह चिट्ठी के लिए ओझिल आंखें आज तरसने लगी है। शायद ये समय अब दोबारा नहीं आएगा।

इस संबंध में क्या कहते हैं,शाखा डाकपाल शोभा नूतन ध्रुव ,,,पोस्ट ऑफिस में सिस्टम तो अभी भी है। लेकिन डिजिटल हो जाने के कारण अंतरदेसीय मनीआर्डर लिफाफा आना समाप्त हो गई है। वर्तमान में सिर्फ बीमा पुलिस विभाग सहित रजिस्ट्री डाक आती है। थोड़ा बहुत रक्षाबंधन के त्यौहार में पुलिस विभाग का चिट्ठी पत्री पहुंचती है।
