देवभोग क्षेत्र ग्राम सुपेबेडा, सरपंच सचिव पर ग्रामीणों ने फर्जी हस्ताक्षर प्रस्ताव तैयार करने का आरोप लगाया

✍? रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद

गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड अंतर्गत बहुचर्चित किडनी पीड़ित ग्राम सुपेबेड़ा में फिर एक मामला सामने आया हैं। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत सचिव और सरपंच पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्राम सभा की बैठक में प्रस्ताव क्रमांक 04 में जो कि दिनांक 22/11/2020 को रखा गया था,जिसमे ग्राम पंचायत द्वारा जीपीडीपी के कार्ययोजना में विभिन्न कार्यो को शामिल किए जाने का प्रस्ताव किया गया उक्त प्रस्ताव में ग्राम पंचायत द्वारा ग्रामीणों के फर्जी हस्ताक्षर कर जनपद में पेश किए गए हैं,जिसमे जनपद पंचायत सीईओ द्वारा आंख मूंद कर हस्ताक्षर कर दिया गया। इस संबंध में ग्राम पंचायत सुपेबेड़ा के ग्रामीण परसुराम आडिल के हस्ताक्षर एवं अंगूठे के निशान लगाए गए हैं। गाँव मे पड़ताल से यह भी साबित हुआ कि ग्राम पंचायत सुपेबेड़ा में एक ही व्यक्ति का नाम परसुराम आडिल हैं जबकि इस नाम का अन्य कोई व्यक्ति नहीं रहता हैं, सरपंच पति, सचिव द्वारा गुपचुप तरीके से ग्रामीण परसुराम आडिल का हस्ताक्षर कर जनपद कार्यालय में प्रस्ताव की प्रति पेश किया जा चुका हैं। इस संबंध में जानकारी के लिए जब हमारे संवाददाता द्वारा ग्राम पंचायत सुपेबेड़ा पहुंचे तो परसुराम आडिल, के साथ अन्य दो गिरधारी नागेश व अमरलाल ने भी उनके हस्ताक्षर को फर्जी तरीके से किए जाने का दावा किया हैं। ग्रामीण परसुराम आडिल से बातचीत के दौरान पता चला कि उन्होंने किसी भी प्रकार के ग्राम सभा मे जाने एवं हस्ताक्षर करने पर इनकार किया हैं। उन्होंने सरपंच पति और सचिव पर फर्जी हस्ताक्षर करने का आरोप लगाया हैं।जिसके जांच के लिए ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों के दरवाजे खटखटाने का मन बना लिया हैं।
ग्राम सभा प्रस्ताव में नामांकित तीन व्यक्तियों ने हस्ताक्षर नही करने किया दावा
ग्राम पंचायत सुपेबेड़ा में हुए दिनांक 22/11/2020 को प्रस्ताव क्रमांक 04 के ग्राम सभा प्रस्ताव में 3 ग्रामीणों हस्ताक्षर नही करने का दावा मीडिया के समक्ष किया हैं।जिसमें परसुराम आडिल, गिरधारी नागेश,अमरलाल शामिल हैं। जबकि तीनो का नाम ग्राम सभा के प्रस्ताव कॉपी में मौजूद हैं। अब सरपंच सचिव पर इस फर्जी हस्ताक्षर के बाद सवालिया निशान लगना शुरू हो गया हैं। इस फर्जी प्रस्ताव की सही तरीके से जांच की जाए तो और भी ग्राम पंचायत द्वारा किए गए फर्जी कार्यो के राज बाहर आ सकते है। जिसजे बाद यह साबित हो जाएगा कि ग्राम पंचायत में फर्जी प्रस्ताव,फ़र्जी कार्यो में जनपद पंचायत के आला अधिकारीयों के संलिप्तता की और इशारा कर रहा है। ग्रामीणों की माने तो अधिकारियों के साठगांठ से कई फर्जी कार्यों,प्रस्ताव,एवं फर्जी तरीके से आहरण को अंजाम दिया गया होगा। इस कुकृत्य में जनपद के आला अधिकारी के सांठगांठ होने का भी अंदेशा जताया जा रहा है।
आखिर किस मक़सद को अंजाम देने के लिए किया गया फर्जी हस्ताक्षर

ग्राम पंचायत प्रस्ताव में उल्लेख कार्यो के अनुसार जीपीडीपी योजना में विभिन्न कार्यो को जोड़कर मनमानी ढंग से कार्यो को अंजाम देने मनसूबे से इस फर्जी हस्ताक्षर को अंजाम दिया गया था,चुकी वर्तमान नियम के मुताबिक जीपीडीपी कार्ययोजना में शामिल कार्यो के आधार पर पंचायतों को 15वे वित्त की राशि को ख़र्च करने की अनुमति हैं। जिसके लिए ग्रामीणों के फर्जी हस्ताक्षर कर उल्लेखित कार्यों के नाम पर राशि का बंदरबांट किया जाना था।
एक ही गांव के हैं सरपंच और सचिव
ग्रामीणों की माने तो एक ही गांव के सरपंच और सचिव होने मनमानी ढंग से फर्जीवाड़े को अंजाम देने आसानी होती हैं।जिसका त्वरित उदाहरण फर्जी हस्ताक्षर एवं अन्य कार्यो में उदासीनता देखने को मिल रहा हैं,जिसके लिए ग्रामीणों ने अन्यत्र सचिव को ग्राम पंचायत सुपेबेड़ा में पदस्थ करने की मांग किया हैं।
आपके माध्यम से मामले की जानकारी मिली फर्जी हस्ताक्षर मामले में जनपद सीईओ देवभोग को मामले से अवगत करा दिया जाएगा और जल्द जाँच टीम गठित कर,दोषी पाए जाने पर संबंधित सरपंच और सचिव पर कठोर कार्यवाही किया जाएगा

संदीप अग्रवाल ,जिला पंचायत सीईओ गरियाबंद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *