भिलाई– शराब ने हजारों लाखों घर बर्बाद कर दिए..अनेक माँ बहन बेटियों को विधवा कर दिया..बच्चों को अनाथ कर दिया.. पर फिर भी हर सरकार बेचती रही शराब…उक्त बातें दुर्ग जिला ग्रामीण जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के जिलाध्यक्ष सतीश पारख ने एक लिखित व्यक्तव्य जारी कर व्यक्त किये…उन्होंने कहा की लॉक डाऊन के दौरान शराब दुकानें भी बन्द रही एक्का दुक्का छोड़ कहीं भी अवैध शराब बिक्री के भी समाचार नही मिले.. किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नही हुई…परिवारों में भी शांति का माहौल पूरे प्रदेश में देखने को मिला…घरेलू अत्याचार के मामले भी सामने नही आये…ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो हम शांति की और लौट रहे है लेकिन सरकार के एक गलत फैसले से लॉक डाऊन खुलते ही शराब दुकान खुलते ही प्रदेश में नशे की हालत में आये दिन घटना सुनने को मिल रही है..पर सरकार है कि कान पर जूं तक नही रेंगती..अब महासमुंद में एक माँ और 5 बच्चों के सामूहिक आत्महत्या ने दिल को गहराई तक झखझोर कर रख दिया है। और यह सब एक शराबी पति एक शराबी पिता के दुर्व्यहार के चलते हुवा…क्या अब भी सरकार सिर्फ और सिर्फ भ्र्ष्टाचार के लिए लोगों के परिवारों को बर्बाद करने के लिए शराब बेचती रहेगी।सतीश पारख ने कहा कि सरकार में यदि अब भी जनहित की सोच और मॉनवता बची हो तो तत्काल प्रदेश में शराब बंदी करे।
उन्होंने कहा की सरकार कहती है कि शराब से ही ज्यादा आमदनी है मैं कहता हूं की यदि प्रशासन व सत्ता में बैठे लोग भ्र्ष्टाचार छोड़ दे तो अन्य आय से भी आम जनता को मूलभूत सुविधा सहिंत सरकार के सभी विभागों के कर्मचारियों अधिकारियों को तनख्वाह दी जा सकती है।किंतु सिर्फ और सिर्फ भ्र्ष्टाचार व ऊपरी कमाई के लिए शराब की आय ने नेताओं और अधिकारियों की आंखों पर पट्टी बांध रखी है।
सतीश पारख ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी भी यह मानते है कि लॉक डाऊन में शराब दुकानें बंद थी तब लगातार आपराधिक गतिविधियों में गिरावट आई थी। फिर ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी की सरकार को अपने घोषणा पत्र के विपरीत आम जनता की जान लेकर शराब बेचने विवश कर दिया।
सरकार को बेचनी है शराब…चाहे हो जाये लोगों का घर बर्बाद…मौत के मुह में समा जाए माँ और बेटियाँ…पर फिर भी सरकार नही छोड़ेगी बेचना शराब.,,शर्म करे सरकार-बन्द करे शराब-सतीश पारख
