पाटन—जेष्ठ कृष्ण पक्ष के अमावस्या शनिवार को 2 बजे के बाद महिलाओं ने पति की मंगल कामना के लिये व्रत रख कर बड़ वृक्ष की पूजा किया पौराणिक कथानुसार आज ही के दिन सावित्री के व्रत एवं तपस्या एवं भगवान के आराधना के कारण उसके पति सत्यवान के प्राणों को लौटाना पड़ा था तभी से यह परम्परा अभी तक मनाई जा रही है महिलाएं इस दिन बड़ वृक्ष के सात फेरे लेते है जिस लड़की के विवाह के पश्चात प्रथम बड़ सावित्री में 49 बार फेरा लेती है भोग में कच्चे आम,शकरपारे का भोग लगाने के साथ साथ श्रृंगार के समान अर्पण एव पंखा अर्पण करते है अंत मे पति को पँखा से हवा देकर आशीर्वाद लेती है

