प्रांजल झा
कांकेर/ रायपुर :केंद्र सरकार के अनुसूचित जनजाति मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा 2008 में छत्तीसगढ़ के सरगुजा, कांकेर, कवर्धा सहित अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में वनोपज आधारित उद्योग लगाने के लिए ₹32 करोड़ों रुपए दिए गए थे।
10 साल भाजपा शासनकाल में इस राशि का कहीं किसी भी जिले में, कोई वनोपज आधारित उद्योग लगाने के लिए नीति ही नहीं बनाई गई थी और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ ने सफलतापूर्वक इसे बैंक में जमा कर दिया, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ में भाजपा के पूर्व विधायक सहित भाजपा के कद्दावर नेता संचालक मंडल में हैं। जिनका कार्यकाल नवंबर 2021 में समाप्त हो रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ जो बैंक में केंद्र के द्वारा दी गई राशि रखी गई थी, वह राशि 52 करोड़ों पर हो चुकी है और विभागीय सूत्रों से या यूं कहें कि अति विश्वसनीय सूत्रों से जो जानकारी निकलकर बाहर आई है कि यह राशि दुर्ग जिला के पाटन विधानसभा क्षेत्र के जामगांव जहां पर एक रजिस्टर्ड मंदिर समिति की जमीन अधिग्रहित कर, वहां वनोपज आधारित उद्योग लगाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा यह राशि ट्रांसफर कर दी गई है।
दुर्ग जिला अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आता है, यह छत्तीसगढ़ भाजपा का स्थापित नेतृत्व के लिए जिसके कद्दावर लोग छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित संचालक मंडल पद पर काबिज है, ने एक आईएफएस अधिकारी के दबाव में या उनके प्रभाव में आकर प्रस्ताव पास कर दिया कि उद्योग वहां लगना चाहिए, इस फॉर्मेलिटी को पूरी करने के बाद राशि ट्रांसफर कर दी गई है। कांग्रेस और भाजपा में अनुसूचित जनजाति वर्ग से सांसद और विधायक बड़ी संख्या में बनते हैं और बड़ी संख्या में विधायक और सांसद पद आरक्षित श्रेणी में आते हैं, जहां से भी निर्वाचित होते हैं, उन्होंने अपने समाज का ही सबसे बड़ा नुकसान किया है और वह अनुसूचित जनजाति क्षेत्र जहां उद्योग लगना चाहिए था, वहां न लगकर गैर अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में वनोपज आधारित उद्योग लगाया जा रहा है।
इस पर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को संज्ञान में लेना चाहिए और क्या ऐसे भाजपा नेता जो छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष और संचालक मंडल के पद पर है, यदि संचालक मंडल एक पत्र अनुसूचित जाति मंत्रालय को लिख दे, तो विभाग छत्तीसगढ़ राज्य से रुपये वापस ले सकती है क्योंकि जिस कार्य और जहां के लिये मद स्वीकृत है खर्च भी वही होने चाहिए, अन्यथा राशि वापस, यही नियम है और रास्ते से भटकने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही भी सुनिश्चित करेगी, भाजपा के अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर गंभीर नाराजगी है।
