जगदलपुर। शिवसेना बस्तर ज़िला अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय् ने प्रेस के माध्यम से कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के बीजापुर के सिलगेर क्षेत्र में केंद्रीय रक्षित पुलिस बल के निर्माणाधीन शिविर का विरोध कर रहे ग्रामीणों को कथित रूप से सुरक्षा बलों द्वारा विगत १६ मई को गोलियों से भूंंजकर मौत के घाट उतार दिया गया था। लेकिन घटना को हुए दो सप्ताह के समय बीतने के पश्चात भी इस विषय पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की कोई प्रतिक्रिया नही आना बस्तर के साथ उनके असंवेदनशील व भेदभाव पूर्ण रवैय्ये को प्रदर्शित करने के लिए काफ़ी है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सुरक्षाबल पूर्ण रूप से केंद्रीय शक्तियों के अधीन कार्य करती है, ऐसे में भोलेभाले आदिवासी बस्तरियों के साथ हुए गोलीकांड को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री को बस्तर की जनता को आश्वास्त करना चाहिए था कि मामले में निष्पक्ष जांच होगी। इस गोलीकांड के जिम्मेदारी आरोपी अधिकारी या कर्मचारियों के साथ बिल्कुल उसी तरह से क़ानून व्यवहार करेगी जैसे किसी अन्य हत्यारे के साथ किया जाता है। लेकिन ऐसा ना किया जाना बस्तर के आदिवासियों के मन मे क़ानून के प्रति विश्वास को कही और कम ना कर दें? यह भी जांच का मूल विषय होना चाहिए कि आख़िर किस अधिकारी ने ग्रामीणों के विरोध को दबाने वहां उपस्थित सुरक्षा बल के जवानों को फायरिंग का आदेश दिया। इस आमानवीय घटना को किस अधिकारी के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।
● प्रशासन ने अबतक स्पष्ट क्यों नही किया गोलीकांड में कितने लोगों की मौत हुई और वे कौन थे..?
शिवसेना के तेज़तर्रार युवा ज़िला अध्यक्ष ने प्रशासन पर सवाल खड़े करते यह भी पूंछा हैकि घटना के बाद बस्तर संभाग आयुक्त व संबंधित ज़िला प्रशासन के अधिकारियों सहित पुलिस महकमे के आला अधिकारी भी एक बैठक में सम्मिलित हुए थे, जहां उन्होंने ग्रामीणों को शिविर के लाभ बताए व उन्हें शांत करने का प्रयास किया। लेकिन प्रशासन ने अबतक यह स्पष्ट क्यों नही किया हैकि उक्त कथित गोलीकांड में आख़िर कितने ग्रामीणों की मौत हुई कितने घायल हुए और वे कौन लोग थे..?
श्री पाण्डेय् ने कहा कि प्रत्येक कोई चाहता हैकि विकास अंतिम छोर तक पहुंचे यहां तक कि आंदोलन कर रहे ग्रामीणों की शोसल मीडिया पर आई वीडियो अनुसार वे भी अपने क्षेत्र में स्कूल, अस्पताल और राशन दुकान जैसे सुविधा चाहते हैं लेकिन किसी तरह नक्सली या पुलिस शिविर के बीच रहकर दोनों पक्ष के आपसी मतभेद से उत्पन्न दहशत में जीवन बिताना नही चाहते हैं। आज़ादी के इतने वर्ष पश्चात भी ऐसे माहौल में जब उन्हें प्रशासन पर विश्वास नही है तब केंद्रीय सुरक्षा बल के जवानों द्वारा गोली चलाकर ग्रामीणों की हत्या करने से क्या आगे भी उनके मन में विश्वास बना पाएंगे.? यह चिंतन का विषय है।
प्रशासन व सरकार को चाहिए कि ग्रामीणों को विश्वास में लेकर शिविर निर्माण से होने वाले लाभ की जानकारी पूर्व में ही दी जानी चाहिए थी, जिससे इस तरह की भ्रम न फ़ैलती कि शिविर से उनका कोई नुकसान होने वाला है। बीजापुर के सिलेगर में ग्रामीण दरअसल किसी जानकारी के अभाव में ही पुलिस शिविर का विरोध कर रहे हो ऐसा संभव है। इस तरह तनावपूर्ण वातावरण के बीच पुलिस बल द्वारा गोली चलाकर विरोध कर रहे निर्दोष ग्रामीणों की हत्या कर देने जैसा कार्य ग्रामीणों के मन में सुरक्षा बल व प्रशासन के ख़िलाफ़ अविश्वास ही उत्पन्न करेगा।
विदित होकि बीते दिनों ही शिवसेना छत्तीसगढ़ के माननीय प्रदेश प्रमुख श्री धनंजय सिंह परिहार जी ने भी उच्चस्तरीय बैठक के दौरान आशंका व्यक्त किया कि प्रशासन जल्दबाजी में ऐसा कोई कार्य ना करें जिसका लाभ नक्सलियों या उनके संगठन को पहुंचे। शिवसेना राष्ट्रीय विचारधारा को महत्त्व देने वाली पार्टी है अतः विकास हेतु सदैव उनका समर्थन है, लेकिन विकास के नाम पर जनता पर अत्याचार बर्दाश्त भी नही किया जावेगा। शिवसेना के प्रदेश प्रमुख के निर्देश पर उक्त तथाकथित गोलीकांड की सच्चाई सरकार के सामने लाने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया जा चुका है। इस कमेटी में प्रदेश महासचिव, संभाग प्रभारी चन्द्रमौली मिश्रा सहित सरगिम क़वासी, बस्तर ज़िला अध्यक्ष डॉ. अरुण पाण्डेय् व दंतेवाड़ा ज़िला अध्यक्ष महेश स्वर्ण समिलित हैं। यह दल घटना स्थल पर प्रदर्शकारियों व मृतकों के गांव जाकर उनके परिजनों से भेंट कर व प्रत्यक्षदर्शियों व मीडिया प्रतिनिधियों के बीच से जानकारी एकत्रित कर प्रशासन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति व राज्यपाल को सौंपेगी।
