विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस 28 मई को मनाया जाता है। महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान किसी भी प्रकार की दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर हर वर्ष 28 मई को विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। मासिक धर्म को लेकर बनी झिझक को तोड़ने के लिए एक नारा भी है-‘शर्म नहीं सम्मान है यह, औरत की पहचान है। इसके जागरूकता कार्यक्रम में गांव तक की महिलाओं को बताया जाता है कि मासिक धर्म के दौरान सेनेटरी नेपकिन का इस्तेमाल करना चाहिए। इसे खरीदने में झिझक नहीं होनी चाहिए। इसके प्रति पुरुषों को भी संवेदनशील होने की जरूरत है। माहवारी किसी प्रकार की कोई छुआछूत या परिवार से अलग रहने के लिए नहीं होता है। आज भी बहुत सी किशोरियां मासिक धर्म के कारण स्कूल नहीं जाती हैं। महिलाओं को आज भी इस मुद्दे पर बात करने में झिझक होती है। आधे से ज्यादा लोगों को लगता है कि मासिक धर्म अपराध है।
बता दे कि माहवारी 9 से 13 वर्ष की लड़कियों के शरीर में होने वाली एक सामान्य हार्मोनल प्रक्रिया है। इसकेे फलस्वरूप शरीर में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। यह प्राकृतिक प्रक्रिया सभी लड़कियों में किशोरावस्था के अंतिम चरण से शुरू होकर (रजस्वला) उनके संपूर्ण प्रजनन काल (रजोनिवृत्ति पूर्व) तक जारी रहती है।
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय का उपयोग स्वच्छता पर आधारित अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर की फिल्म ” टॉयलेट: एक प्रेम कथा एक भारतीय हिन्दी फ़िल्म है जिसका निर्देशन नारायण सिंह ने किया है। यह एक हास्य-व्यंग्य फिल्म है जो ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता के महत्व जैसे गंभीर मुद्दे पर प्रकाश डालती है।फिल्म की कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित है। यह फिल्म सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई।” व अक्षय कुमार व सोनम कपूर “पैडमैन” मासिक धर्म को लेकर गांव में एक रूढ़िवादी सोच के चलते उस दौरान गायत्री को घर का काम-काज नहीं करने दिया जाता था और उस पांच दिन के दौरान उसे अपने पति से अलग बाहर दूसरे बिस्तर पर सोना पड़ता था। गांव के युवाओं के द्वारा इसे, लक्ष्मी इस पर शांत था लेकिन माहवारी के दौरान जब वह अपनी पत्नी गायत्री को फटे-पुराने गंदे कपडे इस्तेमाल करते हुए देखता तो उसे अच्छा नहीं लगता और वह परेशान हो जाता है।
