प्रांजल झा….
कांकेर। छत्तीसगढ़ भाजपा की 2018 में हुई करारी हार के बावजूद भी, शायद कोई सबक नहीं लिया है। सरकार जाने के बाद, कांग्रेस सरकार आने के बाद, कई गंभीर अनियमितता के विरुद्ध भूपेश बघेल सरकार द्वारा जांच करा कर, जब डॉक्टर रमन सिंह, उनके पुत्र अभिषेक सिंह, उनके दामाद, पुनित गुप्ता के कारनामों के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज की।
तो उस जांच प्रभावित करने के लिए और एफ आई आर रद्द करने के लिए डॉ रमन सिंह ने पूरी भाजपा को दांव पर लगा दिया। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक न्यायालय चले गये, उस समय प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे विक्रम उसेंडी भी उच्च न्यायालय चले गये, मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर में विचाराधीन है।
अब सही है या गलत यह तो बाद में पता चलेगा। टूल किट के मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह पर पुनः एफ आई आर दर्ज होने के बाद प्रदेश भाजपा उन्हें बचाने के लिए मैदान में उतर चुकी है। आज 21 मई को प्रदेश के सभी जिलों में इसके लिए अपने अपने निवास पर भाजपा के नेता विरोध दर्ज कराते हुए धरना देंगे। इस विषय पर भाजपा का प्रदेश नेतृत्व आनन-फानन में 20 मई को प्रदेश पदाधिकारियों की वर्चुअल बैठक भी कर ली, आखिर एक आदमी को बचाने के लिए पूरी पार्टी को क्यों दांव पर लगाया जा रहा है। क्या भाजपा यानी रमन सिंह और रमन सिंह यानी भाजपा छत्तीसगढ़ है, लगता तो ऐसा ही है, अभी तक कोई सबक नहीं सीखी है।
छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की समस्या भूपेश सरकार की जनविरोधी नीतियां, बढ़ता भ्रष्टाचार, बढ़ता प्रशासनिक आतंकवाद जैसे अनेक मुद्दे हैं, लेकिन प्रदेश भाजपा इन सब बातों को लेकर कोई आंदोलन नहीं कर रही है, इसको लेकर प्रदेश के निष्ठावान भाजपा कार्यकर्ताओं में पुनः नाराजगी तेजी से बढ़ती जा रही है।
2023 में सरकार बनाने की बात की जा रही है, लेकिन क्या ऐसी कार्यप्रणाली से यह सरकार बना पाएंगे, भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व को चाहिए कि चेहरा बदले। मंडल से लेकर जिला से लेकर प्रदेश तक संगठन में आमूलचूल परिवर्तन करें नहीं तो विपक्ष में बैठने के लिए 2023 में भी तैयार रहे।
