रिलायंस फाउंडेशन के द्वारा ग्रीष्म ऋतु में मृदा प्रबंधन एवं खरीफ फसल की तैयारी हेतु ऑनलाइन कार्यशाला.

कार्यक्रम में रिलायंस फाउंडेशन के टीम लीडर देवेंद्र पटेल, प्रोजेक्ट मैनेजर अशोक कुमार मिश्रा एवं रिलायंस फाउंडेशन के इंफॉर्मेशन सर्विस के मिथिलेश कुमार साहू शामिल थे
इस कार्यक्रम में ग्राम किरगी सालिकझिटीया, ग्राम बोदेला, खैरी, सिंगारपुर और ग्राम पेटेश्री से कुल 62 प्रतिभागियों ने इस ऑनलाइन कार्यशाला में भाग लिया.

रिलायंस फाउंडेशन के कृषि विषय विशेषज्ञ नीरज कुशवाहा के द्वारा जानकारी दी गई। नीरज कुशवाहा जी ने कृषकों को सलाह दी है कि ग्रीष्मकालीन ऋतु में सबसे सर्वप्रथम गहरी जुताई करें गहरी जुताई करने से मिट्टी पलट होती है, कीट एवं प्यूपा और उनके अंडे धूप पाकर के नष्ट हो जाते हैं. घास व खरपतवार के बीज अधिक गहराई में चले जाने के कारण उग नहीं पाते और खेत में घास व खरपतवार का प्रकोप कम होता है.
गहरी जुताई होने से जमीन पूरी होती है और जल धारण क्षमता बढ़ती है जब से खेत की मिट्टी का कटाव रूकता है.

नीरज कुशवाहा ने कृषकों से अपील किया कि अपने खेत में उत्पन्न कचरे को ना जलाएं, वनस्पति को जलाने से भूमि अपने महत्वपूर्ण उर्वरा शक्ति खो देता है.
खेत की उत्पन्न कचरे को कंपोस्ट बनाने हेतु कृषक बायोडीकंपोजर का इस्तेमाल करें,
बायोडीकंपोजर एक बहुत ही सरल और सस्ता उपाय है जिसे कृषक आवश्य प्रयोग करें.
बायो डी कंपोजर की एक पैकेट को 200 लीटर पानी में 2 किलो गुड़ के साथ घोल बनाकर के 3 से 4 दिनों तक छायादार जगह में रखें, और प्रतिदिन उसे दो तीन बार हिलाएं, जिस दिन सफेद झाग बनने लगे और मीठी सिरके जी की गंध आने लगे तो समझ लीजिए कि यह तैयार हो चुका है. अब इस पार्टी का पूजा का इस्तेमाल अपने कचरे घूरे, गोबर के ढेर में डालकर के पकाने में इस्तेमाल करें इससे बहुत जल्द कचरा खाद में परिवर्तित हो जाता है.

इसके अलावा किसान अमृत जल का भी छिड़काव अपने घर अपने घूरे में करके जल्दी खाद बना सकते हैं.

उन्होंने साथ ही बताया कि यह सर्वोत्तम समय है अपने खेत में से मिट्टी परीक्षण करने का
जो किसान अपने खेतों में दो से तीन फसल लेते हैं उन्हें वर्ष में एक बार अवश्य अपने खेत की मिट्टी की परीक्षण करवानी चाहिए. एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुशंसा का पालन करते हुए फसल में खाद की मात्रा का प्रयोग करना चाहिए

किसान भाइयों को उन्होंने कहा कि यह समय किसान अपने लिए उचित गुणवत्ता और मात्रा के बीज और जरूरत के खाद का बंदोबस्त कर लें.

यह जरूर जान लें कि आप जो भी इस्तेमाल कर रहे हैं उसमें अंकुरण की दर कितनी है
अंकुरण की दर ज्ञात करने के लिए किसानों को बहुत ही सरल तरीके से उन्होंने विधियां बताई.
उन्होंने एक सरल विधि की जानकारी दी जिसमें बोरी में से 100 बीज लेकर के उसे पोटली में बांधकर के 2 दिन के लिए पानी में रख छोड़े यदि 100 मैं से 80 बीच उगते हैं तो बीच अच्छा है, यदि 70 भी झुकते हैं तो तो आप बोनी के समय 10% बीज की मात्रा बढ़ा दें इसी प्रकार यदि बीज का अंकुरण प्रतिशत 60 है तो 20% बीज की मात्रा बोनी के समय बढ़ा देनी चाहिए. इससे प्रति एकड़ अथवा प्रति हेक्टेयर पौधे की संख्या सर्वोत्तम रहेगी.

बीच की बोनी से पहले बीज उपचार अत्यंत आवश्यक है
बीज से पहले राइजोबियम एसीटोबेक्टर व अन्य फफूंदी नाशक जैसे कार्बेंडाजिम कैप्टन आदि से उपचारित करने के पश्चात ही बीच की बोनी करें इन सभी कल्चर या फफूंदी नाशक का प्रयोग की 2 से 3 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से करना.

किसान भाई इन जानकारियों को अपने खेतों में अपनाकर अच्छी फसल लें और अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं.
इस कार्यक्रम के सफल संचालन में ग्राम ग्राम किरगी सालिकझिटीया, ग्राम बोदेला, खैरी, सिंगारपुर और ग्राम पेटेश्री के सभी किसानों के साथ गोपाल दास साहू का विशेष योगदान था.

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