लोकेश्वर सिन्हा
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के नक्शे में गरियाबंद जिला जरूर बन गया है, लेकिन कल भी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव था, आज भी है, बदला कुछ नहीं है, आखिर सियासत के नेताओं ने ऐसा कौन सा तीर मार दिया है, जिसे उपलब्धि के रूप में बताया जा सके। सन 1957 से यहां की पुरानी और नई पीढ़ी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव का दंश झेल रहे है, कोरोना की बढ़ती महामारी के दौरान अब जाकर लोगों को पता चला कि हम स्वास्थ सुविधाओं के मामले में कहां है।
इतने वर्षों बाद देखा जाए तो आज भी क्षेत्र स्वास्थ्य सुविधाओं में पिछड़ा है, जिले में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और आधुनिक सुविधाओं का अभाव स्पष्ट झलकता है, सिटी स्किन के लिए नयापारा राजिम या राजधानी रायपुर जाना पड़ता है। बहते आंसू, दर्द से कराहती जिंदगी, कोरोना से मौत को लोग करीब से देख रहे हैं, सुविधाओं के नाम पर लोगों को भटकते देखा जा सकता है। क्षेत्र के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार हुआ।

यह कद्दावर नेताओं का क्षेत्र रहा है, इसलिए महासमुंद लोकसभा और राजिम विधानसभा चर्चित क्षेत्र है, इस क्षेत्र की बदनसीबी देखिए की स्वास्थ्य के मामले में नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली स्थिति वर्तमान में है।
क्षेत्र की जनता ने तो मुख्यमंत्री तक दिया है, नेता कल भी कुर्सियों के लिए लड़ते थे, आज भी कुर्सियों के लिए लड़ रहे है, किसी भी नेता को स्वास्थ सुविधाओं के लिए लड़ते हुए जनता ने नहीं देखा, इसका मलाल आम जनता को कल भी था, आज भी है, बाहरी दखल की राजनीतिक से यह क्षेत्र अब तक उबर नहीं पाया है, कई बार जनता ने आजमाया जरूर लेकिन ऐसा लगता है, जिन्हें अवसर दिया वे ही असफल हो गए। बेहतर स्वास्थ सुविधा के मामले में अभी क्षेत्र तरस रहा है, ताज्जुब इस बात का है कि जिला अस्पताल रेफर सेंटर बन गया है। जिला मुख्यालय में अभी तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन में तो जिला अस्पताल संचालित है। ऐसे हालात के बावजूद चिंता किसी भी जनप्रतिनिधियों को नहीं है। आश्चर्य इस बात का है कि कोरोना से मौत की संख्या बढ़ी तो कुछ लोग और प्रशासन जागा, शव वाहन की कमी है, आनन-फानन में तीन वाहन खरीदे गए, राजिम में तो कचरा फेंकने वाले वाहन से लाश ले जाने का वीडियो सोसल मीडिया में वायरल हुआ था, सच्चाई यह है कि जिले में अभी भी स्वास्थ्य की लचर हालत है। बीमार स्वास्थ सुविधाओं के सहारे जिंदगी कैसे बच पाएगी, इस बात की चिंता क्षेत्र की जनता को ही है।
जिला बने 10 वर्ष बीत गए है, जिला मुख्यालय में भवनों की संख्या बढ़ी है, परंतु सुविधाएं नहीं के बराबर है, यहां की धरती में हीरा और अलेग्जेंडर पाए जाते हैं, वनों का भंडार है, कृषि और वनोपज आधारित क्षेत्र है, स्वास्थ्य सुविधा के मामले में जितने जिम्मेदार नेता है, उतने ही जिम्मेदार प्रशासन भी है, अभी तक प्रशासन जिम्मेदारी से भागते और हाफते दिखा है, वर्तमान हालात पर गौर करें तो लोगों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर जबरदस्त गुस्सा और आक्रोश है, जिसकी भड़ास सोसल मीडिया में देखा जा सकता हैं। आने वाले समय में यह गुस्सा और नाराजगी जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को झेलना पड़ेगा यह तय है। जिस तरह से पहाड़ और नदी नालों होने के कारण गिरिबंद से गरियाबंद नाम पड़ा। अभी भी स्वास्थ्य सुविधा आम जनता से कोसों दूर है, कोरोना महामारी के संकट का सामना कर रहे हैं। अभी भी वक्त है, संभल जाए, और थोड़ा वक्त निकाल कर जनता की सुने, क्योंकि लापरवाही बहुत हो रही है।
प्रत्येक इंसान की आवश्यकता होती है, रोटी कपड़ा और मकान की। उसी तरह बेहद जरूरी है कि आम इंसान को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिले, नैतिक जवाबदारी का निर्वहन शासन और जनप्रतिनिधियों को करना पड़ेगा। कोरोना गाइडलाइन का पालन सभी को करना होगा। एक साल के भीतर कोरोना संक्रमण का प्रभाव शहर से गांव तक पहुंच गया, वर्तमान में संक्रमितो की संख्या बढ़ गई है, स्थिति डरावनी और भयवाह है। जरा सोचिए हम स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कहां है, फिलहाल तो जनता के सामने संयम रखने के अलावा कोई चारा नहीं है, पिछले दिनों जरूर कोविड- सेंटर में मरीजों ने घटिया भोजन परोसने को लेकर हंगामा किया था, मौके पर कलेक्टर को जाना पड़ा, तब जाकर स्थिति में सुधार हुआ। तब और अब चिकित्सा के क्षेत्र में बदला कुछ नहीं है, भाजपा शासन काल के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने गरियाबंद को जिला बनाया। इसके बाद जिस तेजी के साथ बुनियादी सुविधाओं को लेकर विकास होना था, एक तरह से विराम लग गया है, सड़क पुल पुलिया तो बने है, लिहाजा तस्वीर अभी भी नहीं बदली है।
मुख्यालय के जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
जिला मुख्यालय में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है, वर्षों से विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद रिक्त हैं, जिसमें से शिशु रोग, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर यहां नहीं है, अस्पताल में पैथोलॉजी का भी अभाव है, इसके अलावा नेश चेतना विशेषज्ञ के पद खाली पड़े हैं, यहां के लिए तो रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर की भी जरूरत है। वर्तमान में कोरोना महामारी के मद्देनजर मरीजों की सुविधाओं की तरफ नजर दौड़ए तो तीन 108 वाहन चालू हालत में है, जिससे मरीजों को लाने का कार्य किया जा रहा है, इस अस्पताल में तीन एंबुलेंस वाहन है, जिसमें एक एंबुलेंस खराब होने के कारण रिपेयरिंग के लिए भेजा गया है, एक कंडम हो गई है, जो काम के लायक नहीं है। सिर्फ एक एंबुलेंस वाहन से काम चलाया जा रहा है। जिला अस्पताल में कुल 68 कर्मचारी रेगुलर है, 25 कर्मचारी संविदा में कार्यरत है, इन कर्मचारियों में से 8 से 10 कर्मचारी कोरोनावायरस संक्रमण से पॉजिटिव हो गए हैं, अस्पताल के पदस्थ डॉक्टरों के सेटअप के अनुसार 15 पूर्ण है, अस्पताल के भवन की हालत जर्जर हो गई है, मरम्मत की आवश्यकता है। स्टॉप नर्स की कमी है, जानकारी के अनुसार कुल 18 होना चाहिए , जबकि अभी वर्तमान मे 10 ही हैं, 8 स्टाप नर्स की कमी है। इस तरह से जिला अस्पताल भी समस्याओं से जूझ रहा है।
जी एस टण्डन सिविल सर्जन जिला अस्पताल ने कहा कि यहां सामुदायिक स्वथ्य केंद्र भवन में जिला अस्पताल संचालित है कलेक्टर के प्रयास से 50 बिस्तर के लिए कोविड़ हॉस्पिटल के पास जमीन का आबंटन हो गया हैं जल्द ही कार्य चालू भी हो जाएगा
चिकित्सक तो 16 है पर शिशु रोग, स्त्री रोग, अनेशफिसिया जैसे
विशेषज्ञ की आवश्यकता है।भवन की हालात जर्जर हैं हर साल रेपेरिग होता है। फिर भी सुधार नही हो रहा है। पुरानी बिजली फिटिंग हैं बार बार वायरिंग जल जाता है। इस कारण बिजली की समस्या होती रहती हैं। प्राथमिक उपचार हम अपने व्यवस्था के हिसाब से करते हैं।
अभी स्टाप के 8,10 करचारी पॉजिटिव हैं।
अनिल चंद्राकर जिला महामंत्री भाजपा ने कहा कि स्वथ्य सुविधाओ का हाल बेहाल है वर्षो से स्वथ्य के मामले में गरियाबंद जिला जो है वो चिकित्सा सुविधा से कोसों दूर है प्रदेश और गरियाबंद जिले में स्वथ्य सुविधाओ को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के आव्हान पर 24 अप्रेल को भारतीय जनता पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता अपने घर के सामने धरना प्रदर्शन आयोजित कर इस कांग्रेस सरकार को बेहतर चिकित्सा व्यवस्था इस कोरोना काल मे सब कार्यकर्ता आह्वान करेंगे और भूपेश सरकार को जगाने का प्रयास करेंगे।

हरमेश चावड़ा अध्यक्ष जनभागीदारी एवं ऐल्डरमैन
ने कहा कि मुख्यमंत्री ने करीब साढ़े तीन करोड़ और राजिम विधायक ने भी अपनी निधि से 35 लाख की सहायता राशि कोरोना से लड़ने के लिए गरियाबंद जिले को प्रदान की है। मांग पर स्वास्थ्य मंत्री भी कोविड हॉस्पिटल एवं कोविड सेंटर को 288 अतिरिक्त बेड, 86 ऑक्सिजन बेड और करीब 8 वेंटिलेटर की सुविधा प्रदान की गयी हैl कलेक्टर और प्रशासनिक अमला सीएमएचओ के संयुक्त प्रयासों से जिले मे कोरोना मरीजों की संख्या मे सकरात्मक कमी देखने को मिल रही हैं। जल्द ही जिला चिकित्सालय को सिटी स्कैन मशीन की सौगात मिलने वाली है। कोरोना से लड़ने के लिए जिला प्रशासन के पास पर्याप्त फंड है और मुख्यमंत्री जी ने भी घोषणा की है की इस महामारी से लड़ने के लिए सभी जरूरी संसाधन एवं राशि की कोई कमी नही आने दी जायेगी।

