पाटन। छत्तीसगढ़ मे जिला दुर्ग के पाटन ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम कुम्हली स्थित है, यहाँ की मिट्टी अत्यंत उपजाऊ है किन्तु यहाँ सिंचाई की अच्छी व्यवस्था न होने के कारण सूखा का सामना करना पड़ता है। यहाँ के किसान खरीफ मे धान की खेती करते है, लेकिन सिंचाई के लिए वर्षा पर निर्भर रहते है। यदि बारिश अच्छी हो जाए तो फसल अच्छी होती है, लेकिन बारिश कम होने से किसानो को सूखे की मार भी सहनी पड़ती है। इसी गाँव मे रीखीराम नाम का एक किसान रहता है, जिनकी उम्र 66 वर्ष की है तथा उन्होने 11वीं तक की पढ़ाई की है। किसान के परिवार मे कुल 14 सदस्य है जिसमे स्वयं किसान उनकी पत्नी और 3 बेटे- बहु और बच्चे रहते है। रीखी राम के पास कुल पाँच एकड़ जमीन है, जिसमे ये खरीफ मे धान और रबी मे चना, गेहूं, तिवड़ा इत्यादि उगाते है। किसान के पास खेती एक मात्र स्त्रोत है जिससे वे अपना घर चलाते है। रिखीराम 12 साल के उम्र से ही खेती करते आ रहे है, जिसमे उनको प्रत्येक वर्ष नए नए समस्याओ का सामना करना पड़ता है, किसान धान में तना छेदक के कारण बहुत वर्षो से समस्याओ का सामना कर रहे थे , जिसके कारण उपज मे भारी गिरावट आती थी ,जिसके कारण किसान सही उत्पादन नहीं ले पा रहे थे, साथ ही इसको नियंत्रण करने मे आर्थिक नुकसान भी सहना पड़ता था। एक दिन गाँव के सरपंच के द्वारा किसान को पता चला की रिलायंस फ़ाउंडेशन द्वारा मोबाइल के माध्यम से दूर सभा (मल्टी लोकेशन औडियो कॉन्फ्रेंस) का आयोजन किया जा रहा है, यह जानकर किसान ने रिलायंस फ़ाउंडेशन के कार्यकर्ता से संपर्क कर आयोजन मे सम्मिलित हुए ।

यह कॉन्फ्रेंस माह जून (2020) मे रखा गया था, जिस समय कोरोना जैसे महमारी का संकट चल रहा था। इस कॉन्फ्रेंस मे सभी किसान अपने अपने कृषि से सम्बंधित समस्या की चर्चा कर रहे थे। रिखी राम ने भी धान मे तना छेदक की समस्या के बारे मे पूछा जिसमे रिलायंस फ़ाउंडेशन के विषय विशेषज्ञ अर्जुन गोठी जी ने बताया की तना छेदक धान के फसल को शुरुवाती समय से ही नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है, लेकिन इसके लक्षण हमको बाली सूखने पर दिखाई देते है, इसके निवारण के लिए हमे जब धान 25 से 30 दिन का हो जाए उसी समय कार्बोफ्यूरान को आठ किलो प्रति एकड़ से रेत या खाद मे मिला के छिड़काव करना चाहिए, जिससे तना छेदक मे शुरू से ही नियंत्रण कर सकते है। तत्पश्चात लक्षण और दिखाई दे तो गबोठ अवस्था आने के पहले ही करटाप हाइड्रोक्लोराइड 50%एसपी का 400 ग्राम प्रति एकड़ से स्प्रे करना चाहिए, जिससे तना छेदक से पूर्णत: निदान प्राप्त हो सके, और इससे होने वाले आर्थिक क्षति से बचा जा सकता है।
उपरोक्त सुझाव को किसान ने अपने खेत मे प्रयोग किया,जिससे उनके धान का कुल उत्पादन, 85 कुंटल हुआ तथा उनको पिछले वर्ष की तुलना मे 6 कुंटल अधिक उत्पादन मिला । धान के उत्पादन मे उनका कुल खर्च 42165 रुपये हुआ, तथा उन्होने धान को मंडी मे 2500 रुपये प्रति कुंटल से बेचा जिसमे उनको 170335 रुपये का मुनाफा हुआ।
“मुझे रिलायंस फ़ाउंडेशन के कॉन्फ्रेंस कॉल द्वारा तना छेदक का नियंत्रण प्राप्त हुआ इसके प्रयोग से 6 कुंटल का लाभ भी हुआ इस मूल्यवान जानकारी के लिए रिलायंस फ़ाउंडेशन का आभार व्यक्त करता हूँ“।
