डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाज सुधारक, दलित बौद्ध आन्दोलन के प्रणेता, सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाने वाले व श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन करने वाले स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक भारत रत्न डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती आज लोकसभा सांसद मोहन मण्डावी की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट के पास स्थित उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भारतीय संविधान बनाने में उनके योगदान को याद किया गया । ततपश्चात कमल सदन कांकेर में भारत रत्न बाबा साहब के छायाचित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर उनके विचारों पर गोष्ठी का आयोजन किया । डॉ आंबेडकर की जीवनी और विचारों के बारे में बोलते हुए सांसद मोहन मण्डावी ने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर भारत के आधुनिक निर्माताओं में से एक माने जाते हैं। उनके विचार व सिद्धांत भारतीय राजनीति के लिए हमेशा से प्रासंगिक रहे हैं। दरअसल वे एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था के हिमायती थे, जिसमें राज्य सभी को समान राजनीतिक अवसर दे तथा धर्म, जाति, रंग तथा लिंग आदि के आधार पर भेदभाव न किया जाए। उनका यह राजनीतिक दर्शन व्यक्ति और समाज के परस्पर संबंधों पर बल देता है। पूर्व विधायक सुमित्रा मारकोले ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर जनतंत्र को एक जीवन पद्धति के रूप में भी स्वीकार करते हैं, वे व्यक्ति की श्रेष्ठता पर बल देते हुए सत्ता के परिवर्तन को साधन मानते हैं। वे कहते थे कि कुछ संवैधानिक अधिकार देने मात्र से जनतंत्र की नींव पक्की नहीं होती। उनकी जनतांत्रिक व्यवस्था की कल्पना में ‘नैतिकता’ और ‘सामाजिकता’ दो प्रमुख मूल्य रहे हैं जिनकी प्रासंगिकता वर्तमान समय में बढ़ जाती है। जिला महामंत्री दिलीप जायसवाल ने डॉ आंबेडकर के विचारों को बताते हुए कहा कि डॉ. अम्बेडकर समानता को लेकर काफी प्रतिबद्ध थे। उनका मानना था कि समानता का अधिकार धर्म और जाति से ऊपर होना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना किसी भी समाज की प्रथम और अंतिम नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। अगर समाज इस दायित्व का निर्वहन नहीं कर सके तो उसे बदल देना चाहिए। वे मानते थे कि समाज में यह बदलाव सहज नहीं होता है, इसके लिए कई पद्धतियों को अपनाना पड़ता है । महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष शालिनी राजपूत ने कहा कि आज जब विश्व एक तरफ आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ विश्व में असमानता की घटनाएँ भी देखने को मिल रही हैं। इसमें कोई दो राय नही है कि असमानता प्राकृतिक है, जिसके चलते व्यक्ति रंग, रूप, लम्बाई तथा बुद्धिमता आदि में एक-दूसरे से भिन्न होता है। लेकिन समस्या मानव द्वारा बनायी गई असमानता से है, जिसके तहत एक वर्ग, रंग व जाति का व्यक्ति अपने आप को अन्य से श्रेष्ठ समझ संसाधनों पर अपना अधिकार जमाता है। डॉ आंबेडकर के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर डॉ आंबेडकर की प्रतिमा के पास कांकेर शहर मण्डल द्वारा दीप प्रज्ज्वलित किया गया । डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती कांकेर ग्रामीण मण्डल के ग्राम नांदनमारा में भी सादगी पूर्वक मनाया गया । इस अवसर पर राजीव लोचन सिंह, निर्मला नेताम, विजय कुमार मण्डावी, निपेन्द्र पटेल, दीपक खटवानी, मोती राम नाग, संजय खटवानी, महिला मोर्चा जिला महामंत्री,मीरा सलाम, ग्रामीण मण्डल महामंत्री विजय साहू, बृजमोहन तिवारी, नारायण चंदेल, दशरथ साहू, हर्ष चंदेल गोकुल पटेल, फूलचंद पटेल उपस्थित रहे ।
डॉ.भीमराव अम्बेडकर भारत के आधुनिक निर्माताओं में से एक – मोहन मंडावी
