? संवाददाता तेनसिंह मरकाम गरियाबंद
गरियाबंद जिला के आदिवासी विकास खंड मैनपुर ग्राम पंचायत फरसरा के बिहान कार्यक्रम से जुड़ी जय माँ दुर्गा स्व सहायता समूह की महिलाएं की बेबसी आज जवाब दे रही है “महुआ” चार” के इस सीजन में सब छोड़कर वनांचल के महिलाएं फरसरा के गौठान में कंपोस्ट खाद बनाने में जुटी हुई है वही जमीनी हकीकत अगर हम आपको बयां करें तो गुजारा भी मुश्किल हो रहा है महिला समूह के सदस्यों ने बताया कि विगत 6 महीनों से काम के एक भी रुपए की आमदनी नहीं हुआ है वही गौठान के चौकीदार फूलचंद छिंदा ने भी बताएं कि विगत 2 वर्षों से चौकीदारी कर रहा है और अब तक सिर्फ ₹10000 ही उनको अब तक दिया गया है ऐसे में सरकार के रोजगार मुखी कार्यक्रम बिहान के महिलाओं को आत्मनिर्भरता बनाने की दावे यहाँ डगमगाने लगा है
गोधन न्याय योजना के जरिए छत्तीसगढ़ की कई जगहों में विकास की रफ्तार पकड़ी हुई है लोग गोबर बेच कर पैसे कमा रहे हैं पर वनांचल में गौठान की स्थिति इस कदर बिगड़ी हुई है की यहां पर एक भी गाय नहीं है और न कोई जानवर तो गोबर कहां से आएगा और कंपोस्ट खाद कैसे बनेगा मुख्यमंत्री भुपेश बघेल के भूमिहीन मज़दूरों को लाभ पहुंचाने का गोधन न्याय योजना कैसे सफल होगा और इससे जुड़ी समूह की महिलाओं को किस तरह से आमदनी होगा क्या ऐसी स्थिति में महिलायें आत्मनिर्भर बन सकेगी सवाल कई पर जवाब नहीं
समूह के महिलाओं की जुबानी महुआ बिनके प्रतिदिन 200 से 300 की रोजी पर यहाँ अब तक रुपया देखा ही नहीं
ग्राम पंचायत फरसरा के बनाए गए गौठान में काम कर रहे बिहान जय माँ दुर्गा स्व सहायता महिला समूह के अध्यक्ष पंचमी यादव ने जानकारी देते हुए न्यूज़ 24 कैरेट संवाददाता को बताइए की आजकल महुआ के सीजन में हम घर से बाहर निकले तो दिन के ₹200 से ₹300 रोजी हम लोग का निकल जाता है पर यहां काम करने के चलते हैं हम महुआ बिनने भी नहीं जा पा रहे हैं और कंपोस्ट खाद बनाने में लगे हुए हैं अभी समूह में 10 से 15 सदस्य जुड़े हुए हैं यह सब महुआ बिनने लगे तो रोजना दो हज़ार से तीन हज़ार कमा लेती ? इस गौठान में विगत 6 महीने से काम कर रहे हैं पर अभी तक पैसा हमको नहीं मिला है वही सरपंच सचिव का कहना है कि खाद बनकर तैयार हो कर जब बिकेगा तभी पैसा मिल सकेगा इसी भरोसे पर जय मां दुर्गा स्व सहायता समूह के महिलाएं आस लगाकर कंपोस्ट खाद बनाने में जुटी हुई है बताते चलें कि ये दिलासा भरोसा बीते 6 महीने से पंचायत की ओर से किया जा रहा है पर मजदूरी अब तक नहीं मिल पा रहा है बिहान से जुड़कर नई आसा की जिज्ञासा सपनों की मंजिल ढूंढने निकले थे पर लाचार व्यवस्था ने इनके मनसूबे पर पानी फिरता नज़र आता है
चौकीदार फूलचंद चिंदा की आपबीती 2 साल में मात्र दस हज़ार रुपये
ग्राम फरसरा में गौठान में अव्यवस्था का मंजर चारो तरफ पसरा हुआ है महिलाओं ने तो अपना समस्या बताया ही वही पिछले 2 साल से चौकीदारी कर रहे चौकीदार फूलचंद चिंदा ने भी अपना हाले दिल सुनाते हुए कहा कि 1 अक्टूबर 2019 से इस गौठान पर चौकीदारी कर रहा हूं जिसमें 2 जून 2020 को मात्र उनको ₹10000 दिया गया था उसके बाद से चौकीदार फुलचंद चिंदा को आज तक मजदूरी नहीं दिया गया है वही इस बात को फूलचंद चिंदा मीडिया के जरिए सरकार से गुहार लगाई है की उन्हें न्याय दें सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक नहीं पहुंच पा रहा है दो साल में मात्र दस हज़ार से परिवार कैसे चल पाएगा
गौठान राम भरोसे न गाय न जानवर न पानी न गोबर ध्रुवगुड़ी से मंगाते है कच्चे माल,
ग्राम फरसरा की गौठान में कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है बिल्कुल गौठान राम भरोसे पर यहाँ न गाय है न ही जानवर और न पानी न गोबर समूह के महिलाओं ने न्यूज़ 24 कैरेट संवाददाता को बताया कि ध्रुवगुडी से गोबर मंगाते है और यहाँ कम्पोस्ट बनाते है, इस गौठान की ये अव्यवस्था का जिम्मेदार कौन है न कभी अधिकारियों द्वारा जांच किया गया न ही कभी निरीक्षण हुआ जिसके चलते ये दुर्दशा हो रखा है
वहीं स्थानीय लोंगो की माने तो गौठान का संज्ञान लेते हुए नहीं देखा, ग्राम फरसरा का गौठान पर मुलभुत आवश्कता का अभाव देखा गया वहीं इस गौठान का संचालन समितियों के माध्य्म से चलने की बात कही गई, सचिव से फोन के जरिये बात करने पर मैनपुर जाने की बात कहा गया
बता दें कि सरकार ने आजीविका मिशन बिहान को इससे जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त आर्थिक रूप से मनोबल बढ़ाने के तर्ज पर बिहान कार्यक्रम की शुरुआत की थी जिसके जरिए महिलाएं अपने हुनर और संगठन के बलबूते अपनी मंजिल पा सके अपने सपनों को साकार कर सकें और अपनी पहचान बना सके पर यहां जमीनी हकीकत दास्ताँ कुछ अलग कहता है
