वाणी की सभ्यता से मिलता है सम्मान—नन्दकिशोर शास्त्री

धमधा —–यज्ञ से कोई भी व्यक्ति निराश होकर या भूखा रहकर नहीं जाना चाहिए भोजन कराने का कार्य सर्वश्रेष्ठ पुण्य कार्य होता है यज्ञ के लिए चलने वाला हर कदम राजसूय यज्ञ के समान होता है वाणी की सभ्यता से व्यक्ति की पहचान होती है सभ्य वाणी वाले को हमेशा हर स्थान पर सम्मान मिलता है नंदी चौक वार्ड नंबर 2 में भागवत कथा करते हुए बुंदेली परपोडी के पंडित नंदकिशोर शास्त्री ने उक्त बातें कहीं आगे कहा कि हर व्यक्ति को अंत समय में ईश्वर के पास जाना पड़ता है द्रोपदी के शब्द सही थे लेकिन प्रस्तुति ठीक नहीं थी धृतराष्ट्र आंख के अंधे थे तो दुर्योधन मद में अंधे थे भगवान के चरणों में प्रार्थना करने से विपत्ति नही आती वाणी में नम्रता आ गई समझो उसे बोलने का तरीका आ गया उसका जीवन आनंदमय हो जाता है वाणी हमेशा मीठा होना चाहिए किसी के दिल में ठेस पहुंच रही है उस सत्य को भी नहीं बोलना चाहिए जिस वाणी में वेदना हो पीड़ा हो उसे भी नहीं बोलनी चाहिए संयमित वाणी बोलनी चाहिए क्योंकि वाणी प्रधान होता है इस अवसर पर पूर्व संसदीय सचिव लाभचंद बाफना पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रमन यादव पूर्व मंडल अध्यक्ष नरेश चंद्र साहु पार्षद चेतन सोनकर प्रदीप ताम्रकार सुनील गुप्ता भागीरथी सोनकर कल्याण सिंह चौहान के साथ काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे

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