माता सीता द्वारा स्थापित कुलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन करने उमड़ी भीड़

राजिम। सोढ़ूर, पैरी एवं महानदी त्रिवेणी संगम में स्थापित विश्व प्रसिद्ध पंचमुखी कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में रविवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं का भीड़ उमड़ी। दर्शन करने लिए बांस के बैरीकेट्स से होकर दर्शनार्थी अपने बारी का इंतजार कर रहे थे। नीचे नदी पर लाइन लगानी पड़ रही थी। ऊपर चबुतरा में क्रमशः शिवलिंग के दर्शन कर रहे थें। बताया जाता हैं कि इस मंदिर का निर्माण सातवीं सदीं में किया गया, लेकिन चबुतरा का निर्माण बाद में किया गया। जिसकी ऊंचाई 17 फीट हैं। पहले दो बार चबुतरा बना तो दिया गया लेकिन दोनांे बार ही नदी के विकराल बाढ़ से मलबा बह गई। इससे यहां के जमींदार व्यथित हुए और रूदन भरे स्वर में महादेव को याद किया। दूसरे दिन नदी में घुम रहे थे कि एक विकरागी बाबा उन्हें दिखाई दिया वह उनके दुःखी होने का कारण पूछा तो बताया कि चबुतरा बनाने का कई बार प्रयास किया लेकिन हर बार असफल रहा हूॅं। तब बाबा ने कहा कि यह चिमटा निर्माण स्थल पर ले जाकर गड़ा दो और कार्य प्रारंभ करों। उन्होंने ऐसा ही किया और देखते ही देखते 17 फीट ऊंची चबुतरा बना गया। इसमें बड़े व चैड़े पत्थरों का उपयोग किया गया है। मंदिर में जाने के लिए पूर्व, उत्तर एवं दक्षिण दिशा में तीन सिढ़ी हैं। मंदिर में ही विशाल पीपल का वृक्ष हैं जिसे 551 वर्ष पुराना बताते हैं। वैसे भी पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता हैं। गर्भगृह में कुलेश्वरनाथ महादेव का शिवलिंग हैं। कीवदंति है कि वनवास काल के दौरान माता सीता, भगवान रामचंद्र और लक्ष्मण के साथ चर्तुमास राजिम में व्यतित किया। इस बात की पुष्टि भाषाविद् डाॅं. मन्नुलाल यदु ने अपने शोध गं्रथ में किया था। सीता संगम में स्नान करने के बाद महादेव के पूजा करने की इच्छा मन में जागृत हुई। तब हाथ से रेत का शिवलिंग बनाकर जलाभिषेक किया। जल की धारा पाचांे ओर से बहने लगी और पंचमुखी कुलेश्वरनाथ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ। ऐसी लोक मान्यता है कि भगवान श्री कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की मनोकामनाएॅं शीघ्र पूरी हो जाती है। इस संबंध कथानक हैं कि एक राजा जिसके एक भी संतान नहीं हुए थें वह तीर्थ यात्रा करके थक चुका था अंत में संगम स्थित कुलेश्वरनाथ महादेव के शरण मंे पहुंचा। उन्होंने एक सौ विल्व पत्र चढ़ाए। जिससे उन्हें सौ पुत्रों की प्राप्ति हुईं। भगवान महादेव के प्रति लोगों की श्रद्धा कूट-कूटकर भरी हुई। नतीजन लोगों की भीड़ हमेशा बनी रहती हैंे।

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