? ब्यूरो रिपोर्ट विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद
जनपद पंचायत मैनपुर सीईओ द्वारा निर्माण कार्यों को गुणवत्तापूर्वक कराने की लाख दुहाई देने के बाद भी सरपंच सचिव गंभीर नहीं है। जिम्मेदार थोड़ी पैसा कमाने के लिए गुणवत्ताहीन कार्य कराने से बिल्कुल भी पीछे नहीं होते ऐसे ही ग्राम पंचायत चलनापदर में देखने को मिला है। जहां बीते वर्ष मनरेगा के तहत चलनापदर के आश्रित पारा पाेडपारा स्कूल के समक्ष पुलिया निर्माण के लिए 6 लाख 61 हजार की स्वीकृति किया गया।
लेकिन सरपंच सचिव सहित जिम्मेदार तकनीकी सहायक ने नियमों को अनदेखा कर पुलिया बनाए जाने का आरोप लगाया जा रहा है ।ग्रामीणों के अनुसार इस पुलिया निर्माण में लंबाई चौड़ाई सहित गहराई मैं कई ज्यादा कांटा मारी किया गया है। और उसके सहारे मटेरियल में राशि बचाने का आरोप भी लगाया है। इसके अलावा पुलिया को सड़क से लेवल किया जाए इसके लिए मुरूमी से फीलिंग भी नहीं किया है। जिसके चलते पुलिया जोड़ के बीच दरार देखी जा रही है
मतलब ओवरलोडिंग वाहन के आवागमन करने पर गुणवत्ताहीन पुलिया की पोल खुल जाने का दावा किय जा रहा है। क्योंकि पुलिया के शुरुआती और अंतिम में करीब 20 – 20 मीटर मुरूमी से फीलिंग करने का प्रावधान है। बावजूद इसके निर्माण एजेंसी ने नियमों को ताक में रखकर पुलिया निर्माण करा लिया जिसे इंजीनियर द्वारा आंख बंद कर पूरी मूल्यांकन कर दिया। तो वही कार्यालय में बैठे-बैठे एसडीओ ने स्टीमेट अनुसार कार्य होने की पुष्टि कर राशि निकालने के लिए सत्यापित कर दिया।
यही वजह है कि क्षेत्र के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नहीं आ पा रही है। क्योंकि जिनके कंधों पर गुणवत्ता का पूरा जिम्मेदार है। वह वर्तमान में गुणवत्ता से समझौता कर सरपंच सचिव को आर्थिक लाभ पहुंचाने में नजर आ रहे हैं।
