हस्तशिल्प व लोककलाकरो का सम्मान हो – लोक कलाकार कुलेश्वर ताम्रकार

दुर्ग। बारह ज्योतिर्लिंग मंदिर में जागृति महिला समिति के द्वरा कलाकृति जगार मेला का आयोजन 2 फरवरी से प्रारंभ किया गया है जिसकी संचालिका रेहाना परवीन है। जगार मेला में छत्तीसगढ़ी कलाकृति को प्रदर्शनी के लिए भारत के अलग अलग राज्यो से भी प्रदर्शनी के लिए लोग आए हुवे है।
जगार मेला में लगभग 80 अलग अलग स्टाल लगा हुआ है जो पूरे दुर्ग की जनता को लुभा रही है ।

शिव सतरूपा बारह ज्योतिर्लिंग सेवा समिति , हिन्दू शक्ति सेवा संगठन और लोक कलाकार कल्याण महासंघ के द्वरा मंदिर परिसर में जगार मेला में उत्कृष्ट प्रर्दशन करने वालो के लिये सम्मान समारोह का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप छत्तीसगढ़ राज्य अलंकार से अलंकृत लोक कलाकार कुलेश्वर ताम्रकार , लोक कलाकार कल्याण महासंघ के संस्थापक व मंदिर समिति के अध्यक्ष रमेश कुमार शर्मा व हिन्दू शक्ति सेवा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष तामेश तिवारी शामिल हुवे व साथ मे म जागृत महिला समिति के संचालिका रेहाना परवीन ,डॉ राजेश चंद्राकर , ज्योति चौबे , सिमा गुप्ता व मौलाना जी शामिल हुवे । सम्मान समारोह में अनेकों लोगो का सम्मान कुलेश्वर ताम्रकार के द्वरा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया ।
मीडिया से बात करते हुवे कुलेश्वर ताम्रकार ने जगार मेला के आयोजन कर्ता जागृत महिला समिति के रेहाना परवीन का धन्यवाद देते हुवे कहा कि महिला जागृति मंडल के द्वरा महिलाओं की शशक्तिकरण के लिये जो कार्य किये जा रहे बेहद ही सराहनीय है महिलाओं को समाज मे उचित स्थान दिला उनके रोजगार की व्यवस्था करना ही अपने आप मे एक अनोखा उदाहरण है ।
छत्तीसगढ़ कला का गड़ है लेकिन अफसोस है कि जो कलाकार अपना पूरा जीवन कला को समर्पित कर देता है देश और राज्य का नाम रोशन करता है उनके ही जीवन मे अंधेरा रहता है। जो सरकार सत्त्ता में रहता है चाहे वो किसी भी पार्टी का हो किसी भी राज्य का हो लोक कला और कलाकारों के लिये कोई योजना ही नही बना पाई है और इससे अछूता हमारा छत्तीसगढ़ भी नही है। जबकि सबसे ज्यादा कलाकार छत्तीसगढ़ में ही है लेकिन इन कलाकरो की स्थिति इतनी बत्तर है कि एक वक्त के भोजन के लिये इन्हें जादोजहत करना पड़ता है मजदूरी करना पड़ता है और सरकार जमीनी स्तर पर काम करने के बजाय कागजी खानापूर्ति करते रहती है।
सरकार को चाहिए कि छत्तीसगढ़ के सभी कलाकारों को चिन्हित किया जाए उनका रजिस्ट्रेशन किया जाए और उनके जीवन यापन के लिये उचित व ठोस कदम उठाए।
सरकार को चाहिए कि वो सभी कलाकारों के लिए आवास की व्यवस्था किया जाए । उनके व उनके परिवार वालो के लिए निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था हो , निःशुल्क चिकित्सा की व्यवस्था हो । पेंशन की योजना शुरू तो हवा है लेकिन उसमें भी इतने छेद है कि उनको भरना जरूरी हो गया पेंशन इतना कम है उससे गुजारा सम्भव ही नही है ।
जिस तरह से कोतवाल को ओर अन्य लोगो को जीविकोपार्जन के लिए सरकारी कृषि जमीन उपलब्ध कराया जाता है ठीक उसी प्रकार कलाकारों को भी जमीन आवंटित किया जाए।
और अंत ताम्रकार जी ने कहा कि कला और कलाकार गरीबी में पैदा लेते है देश के लिए जीते है अपना पूरा जीवन देश के नाम कर देता और एक दिन गरीबी में मर जाता है आज कल के युवा पीढ़ी पूछते है की लोक कला का भविष्य कैसा है मैं इसमे अपना कैरियर कैसा बना सकता है कला से अपने और अपने परिवार का गुजर बसर कैसा कर सकता हु और उनके इन सारे सवालों का जवाब नही होता है और इसी भयानक सवाल से आज लोककला खत्म होने के कगार पर पहुच चुकी है जब तक सरकार इनके लिए उचित व्यवसाय व रोजगार की व्यवस्था नही करेगा तब तक कला मरता रहेगा सरकार को चाहिए कि कलाकरो के लिये भी सरकारी योजना व सरकारी नोकरी पर आरक्षण जैसी कोई सुविधा हो जिससे कलाकार जिंदा रह सके कला जिंदा रह सके।
और कलाकार महासंघ के संस्थापक रमेश कुमार शर्मा ने मीडिया से बात करते हुवे बताया कि छत्तीसगढ़ में जब तक छत्तीसगढ़ी भासा को उनके लेखन पठन पाठन के साथ उसमे रोजगार नही दिया जाएगा तब तक छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी भासा व उनके संस्कृति का उत्थान सम्भव नही है सरकार को चहिये की वो उसमे सरकारी नोकरी का व उनके उज्वल भविष्य के कारगर कदम उठाए ।
हिन्दू शक्ति सेवा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष तामेश तिवारी ने ऐसे जगार मेला को संस्कृति बचाने में रोजगार देने में उपयुक्त व कारगर कदम बताया ।

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