? संवाददाता तेनसिंह मरकाम गरियाबंद
गरियाबंद : जिला गरियाबंद विकासखंड मैनपुर अंतर्गत केंदूपाटी में सार्वजनिक तौर पर बसंत पंचमी में मां सरस्वती जी की मूर्ति स्थापना कर विशेष पूजा-अर्चना का कार्यक्रम पूरे गांव वाले के द्वारा धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ग्राम केन्दुपाटी में बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में यहां कलश यात्रा निकाला गया और पूजा अर्चना कर मां सरस्वती मूर्ति का स्थापना किया गया यहां के सभी ग्राम वासियों ने मां सरस्वती वीणा वादिनी विद्यादायिनी की पूजा अर्चना गांव वालों ने बड़ी धूमधाम से मनाया गया यहां मां सरस्वती की पूजा करके यहां के सभी अपने हर्ष उल्लास के साथ इस कार्यक्रम में सभी हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सरस्वती बसंत पंचमी के उपलक्ष में मनाया गया और यह 5 दिन तक मनाया जाएगा
वेद व ज्ञान की गंगा है माँ सरस्वती
मान्यता अनुसार हिंदू धर्म में हर महीने में की अनेक देवी देवताओं का पूजा विधान सदियों से चली आ रहा है जैसे कि भादो के महीने में गणेश चतुर्थी दशहरा पर रावण दहन नवरात्रि के मौके पर दुर्गा पूजा इस तरह से अनेक देवी देवताओं का रीति रिवाज अनुसार पूजा विधान हर महीने करने का विधान चली आ रही है इसलिए फरवरी के महीने में भी एक बड़ा और भव्य पूजा विधान परंपरा अनुसार चली आ रही है खासकर बसंत पंचमी के मौके पर इस पूजा को किया जाता है यह पूजा मां सरस्वती जी की मूर्ति की स्थापना कर धूमधाम के साथ भव्य रुप से पंडाल सजा कर त्योहार जैसे मनाया जाता है इसकी अलग महत्व बनाई जाती है मां सरस्वती जी की पूजा से वेद और ज्ञान का सृजन होता है मानव जन समाज में विवेक की संचार होता है और सगुण विचार मनुष्य को प्राप्त होता है माता सरस्वती स्वयं वेदमाता स्वरूप है इसीलिए स्कूली छात्र छात्राओं के जीवन में भी मां सरस्वती जी की विशेष स्थान हमेशा रहती है मां सरस्वती जी की पूजा से छात्र छात्राओं को अपार ज्ञान में सफलता प्राप्ति होती है इसी मान्यताओं पर पूरे भारतवर्ष में बसंत पंचमी की त्योहार को हर्षोल्लास और भव्य रुप में मनाए जाने का विधान सदियों से चली आ रही है
केंदूपाटी में विशेष बसंत पंचमी का महत्व
इसी कड़ी में
केंदूपाटी में भी सार्वजनिक रूप में पूरे गांव वाले इकट्ठा होकर चंदा एकत्रित कर एक दूसरे की सहयोग से भव्य पंडाल स्थापित कर मां सरस्वती जी की पूजा में लग्न है केंदूपाटी में पिछले कई वर्षों से बसंत पंचमी के मौके पर सरस्वती माता जी की पूजा किए जा रही हैं जो कि अपने आप में एक बड़ी पहचान बनती जा रही है अक्सर बहुत कम गांव में देखा गया है कि बसंत पंचमी के दिन सरस्वती जी की पूजा ठीक उसी तरह से की जाती है जैसे गणेश चतुर्थी और नवरात्रि में त्योहारों की मेला लगता है उसी निराले अंदाज में फरवरी के महीने में लगने वाला यह पूजा विधान का मेला बहुत ही मनोरम वह आकर्षक मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है जिसे बर्बस ही लोग माता की सेवा में खींचे चले आते हैं
मां सरस्वती जी की पूजा बहुत ही विधि पूर्वक की जाती है मूर्ति स्थापना के पहले प्राण प्रतिष्ठा व कलश यात्रा करने का विधान सदियों से चली आ रही है तत्पश्चात ही माता जी की मूर्ति स्थापना कर पूजा की जाती है कलश यात्रा में पूरे गांव के माता स्वरूपी मातृशक्ति महिलाएं व बालिकाएं एकत्रित होकर सर में कलश धारण कर तालाब से कलश में मंत्र उपचार के पश्चात पानी भरा जाता है उसी पानी को माता जी के पंडाल तक लाया जाता है जिसमें पूजा के द्वारा मंत्र उपचार कर सुधि किया जाता है कहा जाता है कि गंगा से पवित्र और दुनिया में कुछ भी नहीं है इसलिए सबसे पहले गंगा पूजा होती है तत्पश्चात माता जी की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा किया जाता है इस बीच वेद मंत्रों का उच्चारण गूंजते रहता है तत्पश्चात माता जी की मूर्ति को सार्वजनिक दर्शन के लिए खोल दी जाती है इस तरह से भक्त माता जी की सानिध्य में अपनी मनोकामनाएं अर्पित कर पुण्य का लाभ कमाते हैं और सदैव सुख समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है
