हरिओम राईस मिल से निकल रहे धान के डस्ट से छुरा के वाडवासी त्रस्त,हो सकता है दमा रोग

  • चार स्कूल के छात्र-छात्राएं रोज गुजरते हैं उस रास्ते मे जहां हैं हरिओम राइस मिल
  • अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय में नगरवासियो का शिकायत आवेदन भी माह भर से खा रहा हैं डस्ट अब तक नही हुई कोई कार्यवाही

छुरा….-हमारे भारत वर्ष में न्यायिक व्यवस्था का अपना अलग महत्त्व है।न्याय में देरी अन्याय कहलाती है लेकिन देश की न्यायिक व्यवस्था को यह विडंबना तेज़ी से घेरती जा रही है। देश के न्यायालयों में लंबित पड़े मामलों को आँकड़ा लगभग 3.5 से अधिक पहुँच गया है।जी हां न्याय में देरी अन्याय ही है। न्याय के क्षेत्र में प्रयोग किया जाने वाली लोकप्रिय सूक्ति है। इसका भावार्थ यह है कि यदि किसी को न्याय मिल जाता है किन्तु इसमें बहुत अधिक देरी हो गयी हो तो ऐसे ‘न्याय’ की कोई सार्थकता नहीं होती। यह सिद्धान्त ही ‘द्रुत गति से न्याय के अधिकार’ का आधार है। यह मुहावरा न्यायिक सुधार के समर्थकों का प्रमुख हथियार है।बताना लाजमी होगा कि गरियाबंद जिला में इन दिनों छत्तीसगढ़ सरकार का नया उद्योग तवादला उद्योग के चलते अधिकारियों को अफसर शाही की खुमारी छाई हैं । साथ ही किसी शिकायत आवेदन पर ना जांच होती हैं ना ही कार्यवाही बताना लाजमी होगा कि गरियाबंद जिला के छुरा नगर में इन दिनों बस स्टैंड व सरस्वती शिशु मंदिर प्राथमिक व माध्यमिक शाला से महज 200 मीटर की दूरी पर लगे हरिओम इडस्ट्रीज यूनिट राइसमिल से निकलने बाले डस्ट ने मासूम छात्रों का आना जाना और छुट्टी के पलों में खेलना दुभर कर दिया है जिसका मासूम बच्चों के आंख व स्वस्थ पर बुरा असर पड़ रहा है ,छुरा लोगो का जीवन दुभर कर रही है राईस मिल से निकलने वाले डस्ट सेे स्कूली मासूम छात्रो से लेकर जवान महिला पुरूषो के साथ ही अति वरिष्ठ नागरिको को श्वांस दमा की बीमारी होने की आंशका के साथ साथ सांस लेने की तकलीफ बढते जा रही है। छुरा नगर स्थित बस स्टेंड जंहा दिनभर लोगो का हुजूम लगा रहता है साथ ही भोजनालय, पान पैलेश,हेयर सेलून,कई दुकानें है जो दिन रात हरिओम इडस्ट्रीज राइस मिल से निकलने बाले डस्ट से जिनकी दुकानों मे राइसमिल के डस्ट की परत जमी रहती है ,छुरा के रसूखदार नेता द्वारा संचालित हरिओम इडस्ट्रीज राइसमिल जो कि सभी नियमो को ताक में रखकर राईस मिल को नगर में संचालित किया जा रहा है।रसूखदार नेता की प्रशासनिक पकड़ मजबूत होने के कारण लोग खुली जुबान से इसका विरोध नही कर पाते हैं राइस मिल से निकलने बाले डस्ट का कोई पुख्ता इंतजाम नही है राइस मिल के पीछे खुल्ले पाइप से डस्ट बाहर निकलता है जिससे स्कूल और बस स्टैंड में कोहरा छाया रहता है राईस मिल से वर्तमान में हो रही धान कुटाई से हो रही वायु प्रदुषण जिसमे धान का भुसा पूरे शिक्षक नगर तक फैल रहा है जिससे लोगो को सांस लेने में परेशानी हो रही है गौरतलब है कि हरिओम इडस्ट्रीज राईस मिल को चलाने वाले ठेकेदार ने दिखावे के लिये नाममात्र का टायर लगाया है जो कि इस मिल से निकलने वाले डस्ट को रोकने के लिये काफी उपयोगी साबित नही हो रहा है। प्रदुषण के चलते कडकडाते ठंड ने वायु प्रदुषण में बढोत्तरी कर रही है जबकि वायु प्रदुषण से त्रस्त छुरा नगरवासी इस समस्या से काफी परेशान हो रहे हैै।ज्ञात हो कि छुरा नगर के वार्ड क्रमांक 7 एवम वार्ड क्रमांक 4 के स्थानीय निवासियों द्वारा दिनाँक 18-01-2021को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व छुरा के समक्ष शिकायत आवेदन प्रस्तुत किया था जिस पर अभी तक कोई कार्यवाही व जिम्मेदारों द्वारा कोई संज्ञान नही लिया गया हैं जिम्मदार खुद कार्यालय से नदारत रहते हैं जो कि दिनभर जिला मुख्यालय में ही दिनभर टाइम पास करते नजर आते है जिसके चलते शिकायत आवेदन भी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व छुरा के कार्यलय में डस्ट खा रहा है जिसपर कोई कार्यवाही होती दिखाई नही दे रही है।समय रहते यदि इस मिल से निकलने वाली समस्या का हल नही निकाला गया तो कहा नही जा सकता शासन और प्रशासन को इसके लिये भविष्य में इस समस्या का निदान करना मुश्किल हो जायेगा। वही दूसरी तरफ इस हरिओम इडस्ट्रीज राईस मिल को चलाने वाले छुरा नगर के स्थानीय रसूखदार नेता (ठेकेदार) के द्वारा अपनी मनमानी की जा रही है। राईस मिल के प्रबंधक के द्वारा इस समस्या को नजर अंदाज कर मोहल्ले की सुध लेने में रूचि नही दिखा रहे है। ठेकेदार द्वारा डस्ट रोकने शेड के लिये शेड निर्माण का काम शुरू नही हुआ है।

इस संबंध में जिला चिकित्सालय गरियाबंद के जिला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर श्री नवरत्ने ने बताया कि धान के भूसां से दमा के अटैक होने की संभावना बढ जाती है। इसके जो छोटे कण है जो हमारा फेफडा है उसके निचे एल्बुलाई तक पहुच जाते है, ब्रोकाईटिस हे फिवर और बहुत एलर्जी के मरीज होते है जिसको त्वचा के लक्षण सांस लेने मे तकलीफ ऐसी परेशानियां होने लगती है। कण आंख में चले जाने से आंखो में नुकसान पहुचता है। ठंड के मौसम में खासकर तकलीफ बढ जाती है।

प्रदूषण से लोग परेशान

छुरा नगर में लोग राइस मिल के प्रदूषण से परेशान हो चुके हैं। राइस मिल से निकलने बाले डस्ट से लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। यही नहीं उनकी आंखों पर इसका असर पड़ रहा है। बता दे कि प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों को ताक में रखकर छुरा नगर में एक राइस मिल संचालन किया जा रहा है, जिसके चलते लोगो का जीना मुहाल हो गया है। नगर पंचायत में अनुमोदन के बिना राइस मिल को एनओसी दे दी गई है, इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। राइस मिल से निकलने बाले डस्ट से निकलने वाली राख और प्रदूषिण से पूरा छुरा नगर प्रदूषण की चपेट में है। नगर वासियो ने इस राइस मिल को गांव की जद से हटाने की मांग की है।

भविष्य पर खतरा

बदहाली का आलम यह है यह राइस मिल स्कूल के पास ही संचालित हो रही है। स्कूल में पढऩे के लिए आने वाले स्कूली बच्चे भी इस प्रदूषण की चपेट में हैं और उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। धान के भूसे उनकी आंखों में भी समस्या आ रही है। राइस मिल दिनभर चलता है, जिसके शोर से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
लोगों की शिकायत मिलने के बाद राइस मिल संचालक से प्रदूषण रोकने के लिए चेतावनी दी गई है। जिस समय राइस मिल को एनओसी दी गई,उस वक्त किसी ने इसका विरोध नहीं किया।

हो सकती हैं ये बीमारी

राइस मिल से निकलने वाले डस्ट से स्किन और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है। इंफेक्शन,खांसी,सांस की बीमारियां,स्किन,हार्ट और दमे के मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकती है।इसलिए पानी के संपर्क में आने से या उसके आसपास की हवा से भी इनफेक्शन का खतरा रहता है। खांसी और सांस की बीमारियां आम खतरा हैं।

देरी से मिला न्याय भी अन्याय के बराबर हैं

हमारे देश की अदालतों के कामकाज की कछुआ चाल की कुछ बानगियां जहां न्यायिक मामले तेजी से नहीं निपटते वरन बरसों नहीं कई-कई दशकों तक घिसटते रहते हैं और न्याय की प्रक्रिया का मजाक उड़ता रहता है।हर सभ्य समाज न्याय पर आधारित होता है जहां कानून का शासन होता है,उसमें न्याय हासिल करना हर व्यक्ति अधिकार होता है लेकिन जब न्याय पाने में अनावश्यक देरी होती है तो वह न्याय नही रह जाता। न्याय में देरी अन्याय है, न्याय के क्षेत्र में प्रयोग किया जाने वाली लोकप्रिय सूक्ति है। इसका भावार्थ यह है कि यदि किसी को न्याय मिल जाता है किन्तु इसमें बहुत अधिक देरी हो गयी हो तो ऐसे ‘न्याय’ की कोई सार्थकता नहीं होती। यह सिद्धान्त ही ‘द्रुत गति से न्याय के अधिकार’ का आधार है।लेकिन हमारी छोटी से बड़ी अदालतें इस सिद्धांत पर चलती है कि देर भले हो लेकिन अंधेर नहीं होगा।केवल न्याय होना ही काफी नहीं है ऐसा लगना भी चाहिए कि न्याय हुआ है।नतीजतन मुकदमें की सुनवाई करने वाले कई कई न्यायाधीशों के तबादले हो जाते हैं,बिना वजह तारीखों पर तारीखे लगती रहती है,जैसा कि अभी छुरा अनुविभाग में भ्रस्टाचारी सरपंच विगेद्र ठाकुर के प्रकरण में लग रही हैं और छुरा नगर वासियों द्वारा राइस मिल की शिकायत के बाद एक कथित नेता प्रति दिन अनुविभाग कार्यालय छुरा के रोज चक्कर काट रहा हैं।जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित होना सुनिश्चित ही हैं शायद न्याय की उम्मीद छुरा अनुविभाग से न्याय की उम्मीद रखना अपने आपको धोखा देने के बराबर हैं।जैसा कि पूर्व में गरियाबंद जिला के अनुविभाग मैनपुर में देखा गया हैं।जी हम बात कर रहें थे न्याय की देरी की गौरतलब हो कि कई बार देखा जाता हैं कि इस दौरान वादी या प्रतिवादी भी भगवान को प्यारे हो जाते हैं।मगर पीठियों तक मुकदमें चलते हैं।इस तरह जो अदालतों से न्या की गुहार करने वाले कई फऱियादियों को अपनी जिंदगी में तो न्याय नहीं मिल पाता।इस बीच फरियादी वकीलों की मोटी फीस देते रहते हैं और ऩ्याय की आस में अदालतों के चक्कर काटते रहते हैं।इस तरह आम आदमी के लिए न्याय पाना एक दुस्वप्न बनता जा रहा है। तब उसे बुजुर्गों की यह बात याद आती है कि सयाने लोग अदालत की सीड़ीयां नहीं चढते।

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