भारतीय संस्कृति की विरासत का प्रतीक है राम मंदिर – डॉ. लीना गहाणे

रेवेन्द दीक्षित ..

छुरा। आईएसबीएम विश्वविद्यालय में राम के आदर्श चारित्र को जन-जन तक पहुँचाने तथा अयोध्या में राम लला के दिव्य मंदिर निर्माण में सहयोग एवं समर्पण हेतु शनिवार 23 जनवरी को कला एवं मानविकी संकाय के तत्वाधान में ‘श्रीराम भारत के प्राण, श्रीराम मंदिर भारत के आत्मसम्मान का प्रतीक’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय ई- संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रो.डॉ. लीना गोविन्द गहाणे, NAAC की उप सलाहकार थी। ई- संगोष्ठी में सभी का स्वागत करते हुए तथा इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए डॉ. बी पी भोल, कुलसचिव, आईएसबीएम विश्वविद्यालय ने कहा कि राम काज करने को आतुर विश्वविद्यालय प्रारंभ से रहा है। विश्वविद्यालय में राम के आदर्शों एवं चरित्र को पालन करने छात्रों को शिक्षा दी जाती है। जिससे वह समाज के विकास और उत्थान में अपनी भागीदारी निभा सकें। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति,डॉ. आनंद महलवार ने इस संगोष्ठी में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि राम मंदिर भारत के स्वाभिमान, भारत की सोयी अस्मिता के पुनर्जागरण का प्रतीक है। मुख्य वक्ता डॉ. लीना गहाणे ने कार्यक्रम के उद्देश्य बताते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम जी का मंदिर भारत के जन -जन की आस्था का केंद्र हैं। भारतीय जीवन मूल्यों एवं भारतीय संस्कृति की विरासत का प्रतीक है। प्रभु राम की जन्मभूमि पर उनका ही मंदिर निर्माण भारतीय जनमानस के लिए अतिमहत्वपूर्ण है। उन्होंने मंदिर के भव्य दिव्या निर्माण के लिए पूर्ण क्षमता से सहयोग एवं समर्पण करने की बात कही। विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय अधिष्ठाता डॉ. एन के स्वामी ने कार्यक्रम का संक्षिप्त सारांश प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के प्रति सभी प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उत्साहित दिखाई दिए। अंत में विश्वविद्यालय के कला एवं मानविकी संकाय विभागाध्यक्ष डॉ. भूपेन्द्र कुमार ने आभार व्यक्त करते हुए आगे भी इस प्रकार के आयोजन करने हेतु छात्र-छात्राओं को आश्वस्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. डायमंड साहू ने किया। उक्त संगोष्ठी को सफल बनाने में विश्वविद्यालय के सभी प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों का विशेष सहयोग रहा।भारतीय संस्कृति की विरासत का प्रतीक है राम मंदिर – डॉ. लीना गहाणे।

आईएसबीएम विश्वविद्यालय में राम के आदर्श चारित्र को जन-जन तक पहुँचाने तथा अयोध्या में राम लला के दिव्य मंदिर निर्माण में सहयोग एवं समर्पण हेतु शनिवार 23 जनवरी को कला एवं मानविकी संकाय के तत्वाधान में ‘श्रीराम भारत के प्राण, श्रीराम मंदिर भारत के आत्मसम्मान का प्रतीक’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय ई- संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रो.डॉ. लीना गोविन्द गहाणे, NAAC की उप सलाहकार थी। ई- संगोष्ठी में सभी का स्वागत करते हुए तथा इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए डॉ. बी पी भोल, कुलसचिव, आईएसबीएम विश्वविद्यालय ने कहा कि राम काज करने को आतुर विश्वविद्यालय प्रारंभ से रहा है। विश्वविद्यालय में राम के आदर्शों एवं चरित्र को पालन करने छात्रों को शिक्षा दी जाती है। जिससे वह समाज के विकास और उत्थान में अपनी भागीदारी निभा सकें। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति,डॉ. आनंद महलवार ने इस संगोष्ठी में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि राम मंदिर भारत के स्वाभिमान, भारत की सोयी अस्मिता के पुनर्जागरण का प्रतीक है। मुख्य वक्ता डॉ. लीना गहाणे ने कार्यक्रम के उद्देश्य बताते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम जी का मंदिर भारत के जन -जन की आस्था का केंद्र हैं। भारतीय जीवन मूल्यों एवं भारतीय संस्कृति की विरासत का प्रतीक है। प्रभु राम की जन्मभूमि पर उनका ही मंदिर निर्माण भारतीय जनमानस के लिए अतिमहत्वपूर्ण है। उन्होंने मंदिर के भव्य दिव्या निर्माण के लिए पूर्ण क्षमता से सहयोग एवं समर्पण करने की बात कही। विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय अधिष्ठाता डॉ. एन के स्वामी ने कार्यक्रम का संक्षिप्त सारांश प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के प्रति सभी प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उत्साहित दिखाई दिए। अंत में विश्वविद्यालय के कला एवं मानविकी संकाय विभागाध्यक्ष डॉ. भूपेन्द्र कुमार ने आभार व्यक्त करते हुए आगे भी इस प्रकार के आयोजन करने हेतु छात्र-छात्राओं को आश्वस्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. डायमंड साहू ने किया। उक्त संगोष्ठी को सफल बनाने में विश्वविद्यालय के सभी प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों का विशेष सहयोग रहा।

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