6 महीनों से नही मिल रहा पेंशन सरपंच, सचिव और जनपद मुख्यालय का लगा चुके है कई चक्कर

? रिपोर्टर अमित कुमार सोनवानी

देवभोग।कोरेना काल में क्षेत्रीय नेताओं के अलावा जिला प्रशासन भी समय सीमा पर हितग्राहियों को पेंशन दिलाने के लिए तमाम प्रयास कर रहे हैं। मगर पंचायत के जिम्मेदारो की उदासीनता की वजह से अफसरों की कोशिश जमीनी स्तर पर नाकाम साबित हो रही है। क्योंकि अभी भी ब्लॉक के सैकड़ों हितग्राहियों को पेंशन के लिए भटकना पड़ रहा है। जिसे लेकर सरपंच सचिव के अलावा मुख्यालय के अफसरों तक गुहार लगाते है। लेकिन बुजुर्गों के हाथ निराशा ही लगती है। ऐसे ही डोहेल पंचायत का मामला सामने आया है जहां के अधिकांश पेंशन धारियों को एक नहीं पिछले 6 महीने से पेंशन नहीं मिल पाया है। जबकि जनपद पंचायत द्वारा जून माह तक पेंशन डालने की बात कही जा रही है। लेकिन हितग्राही अपना खाता जांच करवाने पर राशि नहीं होना बताकर बैंक वाले बाहर कर देते हैं। ऐसे में बुजुर्ग पेंशन हितग्राही छोटी बड़ी जरूरत को पूरा नहीं कर पाने के साथ क्षेत्रीय त्यौहार भी रूखी सूखी हालत में मनाने को मजबूर नजर आते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि पेंशन राशि समय सीमा के भीतर किस कारण नहीं मिल पा रहा है । इसकी जानकारी तक पंचायत के जिम्मेदार नहीं देते जिसके चलते हैं हितग्राहियों को  मुख्यालय पहुंचकर जानकारी लेना पड़ता है। बुजुर्ग संपत्ति माझी ने बताया कि पंचायती चुनाव खत्म होने के बाद से पेंशन नहीं मिला है करीब 30 से 40 बार बैंक खाता जांच करवाने के लिए बैंक का चक्कर लगा चुके हैं ।मगर राशि जमा नहीं होना बताकर वापस भेज देते हैं ।ऐसे में पेंशन हितग्राही बैंक और जिम्मेदारों के बीच चक्कर काटने को मजबूर हैं। इसी तरह गंजू माझी का कहना है कि पेंशन की राशि    के भरोसे  शत प्रतिशत हितग्राही निर्भर है उक्त राशि से स्वयं के लिए साबुन तेल के साथ  कभी-कभार नाश्ता कर लेते हैं। लेकिन पिछले 6 माह से पेंशन नहीं मिलने के कारण जरूरतमंद सामग्रीभी नहीं मिल पा रहा है। साथ ही लालधर ने बताया कि पिछले 4 माह से पेंशन नहीं मिला है ।सरपंच सचिव को पूछने पर ऑनलाइन खाता में राशि जमा होना बताया जाता है। लेकिन खाते पर बिल्कुल राशि नहीं है अब तो पूछने में भी शर्म आती है। कि कितनी बार पंचायत में जाकर अपनी दुखड़ा सुनाया जाए हालत इतनी भी ठीक नहीं है । कि जिला पंचायत पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकें इसलिए बारोबार मुख्यालय के अधिकारियों को पेंशन की समस्या से अवगत कराते हैं ।लेकिन जनपद से भी निराशा होकर लौटना पड़ता है। 

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