मैनपुर ब्लॉक के सरनाबहाल क्षेत्र के किसानों द्वारा की जा रही सरनाबहाल को स्वतंत्र सहकारी समिति बनाये जाने की मांग…


?रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद

गरियाबंद। जिले के अंर्तगत् तीनों ओर से उडिसा राज्‍य से घिरा हुआ आदिवासी बाहुल्‍य मैनपुर तहसील मुख्‍यालय के सुदुर अंचल में 70 किमी की दूरी पर स्थित ग्राम सरनाबहाल क्षेत्र के किसानों द्वारा सरनाबहाल को स्‍वतंत्र सहकारी समिति (सोसायटी) मुख्‍यालय का दर्जा देकर सहकारी समिति (सोसायटी) मुख्‍यालय बनाये जाने का मांग किया जा रहा है ।
सरनाबहाल के निकट
5 ग्राम पंचायत चिखली, घुमरापदर,धनोरा,भैंसमुडी, मुडामहान के किसानों का एकसूत्रीय मांग है कि सरनाबहाल को सहकारी समिति बनाया जाए, अभी वर्तमान सहकारी समिति (सोसायटी) अमलीपदर में इस क्षेत्र से आने जाने वाले कृषकगण , हितग्राहियों, जनप्रतिनिधियों को सरनाबहाल एवं अमलीपदर के मध्‍य नदी नाले से होकर गुजरना पड़ता है , तथा सहकारी समिति (सोसायटी) मुख्‍यालय की दूरी लगभग 15 से 20 कि.मी. का सफर तय करना पडता है तथा मार्ग में आवागमन के लिये यात्री वाहन की कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है जिससे क्षेत्र के लोगों को निजी वाहनो से समय पर कार्यालीयन कार्य जैसे नगद ऋण, वस्‍तु ऋण, समर्थन मूल्‍य पर धान एवं मक्‍का विक्रय करने एवं भुगतान प्राप्‍त करने जाना पड़े l
क्षेत्र के किसानों को कार्य विलम्‍ब होने पर वापसी में काफी समस्‍याओं का सामना करना पडता है चूंकि यह क्षेत्र वनांचल क्षेत्र के श्रेणी में आता है । यह कि वर्तमान सहकारी समिति (सोसायटी) अमलीपदर के समीप के ग्रामों के कृषक समय के पूर्व कार्यालय पहुंच जाते है तथा अपना कार्य जल्‍द पूरा करवा लेते हैं किन्‍तु सरनाबहाल, चिकली,धनोरा क्षेत्र के किसानों को दूरी एवं नदी नाला के व्‍यवधान के कारण कार्यालय पहुंचने में देर हो जाता है जिसके कारण उनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, उनका कार्य विलम्‍ब हो जाता है एवं घर वापसी तक रात्रि हो जाती है जिसके कारण सदैव भय बना रहता है तथा शासकीय योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता । सरनाबहाल क्षेत्र को पृथक सहकारी समिति (सोसायटी) बनाने से इस वनांचल के पिछडे हुये निवासियों कृषक परिवारों जनप्रतिनिधियों को वर्तमान सहकारी समिति (सोसायटी) अमलीपदर की दूरी, भय की पीडा झेलने और पिछडे की आशंका स्‍वत: समाप्‍त हो जायेगी l

समिति मुख्‍यालय अमलीपदर से होने वाली परेशानी

मुख्यालय से अंतिम ग्राम की दूरी 15 से 20 किमी है l
दूरी की वजह से कार्यालयीन कार्यो का संचालन सही समयावधि पर नहीं हो पाता l
शासकीय योजनाओं विकासोन्‍नमुखी विभिन्‍न प्रशानिक जानकारियों का लाभ हितग्राहियों को उचित समय पर उपलब्‍ध नहीं हो पाता l
कृषक सदस्‍यों को कार्यों का संचालन करने में काफी आर्थिक , शारीरिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पडता है l
दूरी एवं नदी नाला बाधक यात्री वाहनों का नहीं चलाये जाने के कारण वापसी विलम्‍ब देर रात्री का सामना करना पडता है जिसके कारण भय बना रहता है l

नवीन समिति मुडगेलमाल से होने वाली परेशानी

नवीन समिति मुडगेलमाल में जोडे जाने से क्षेत्र के किसानों को अमलीपदर से अधिक दूरी का सामना करना पडेगा l
दूरी की वजह से कार्यालयीन कार्यो का संचालन सही समयावधि पर नहीं हो पायेगा l
किसानो को समय पर खाद बीज नहीं मिल पायेगा तथा समर्थन मूल्‍य धान विक्रय में कठिनाई का सामना करना पडेगा l
कृषक सदस्‍यों को कार्यों का संचालन करने में काफी आर्थिक , शारीरिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पडता है l
दूरी एवं नदी नाला बाधक यात्री वाहनों का नहीं चलाये जाने के कारण किसानों को वर्तमान समिति से अधिक समस्‍या का सामना करना पडेगा l

क्‍यों ? बनाना आवश्‍यक है सरनाबहाल को सहकारी समिति मुख्‍यालय बनाना

  1. छ.ग. राज्‍य शासन के निर्देशानुसार नवीन सहकारी समिति के पुनर्गठन हेतु विभागों को आदेशित करने एवं विज्ञापन के माध्‍यम से जानकारी प्राप्‍त होने के उपरांत आवेदन / मांग निरंतर विभाग एवं जनप्रतिनिधियों के समीप रखा गया ।
  2. ग्राम सरनाबहाल नवीन मुख्‍यालय 0किमी से 4 किमी की परिधी में स्थित है
  3. सरपंच, पंच, जनप्रतिनिधिगण, हितग्राहियों तथा कृषक सदस्‍यों को विभागीय कार्यों के संचालन में अलग से किसी भी प्रकार से शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक परेशानियों का सामना नहीं करना पडेगा ।

4 .सहकारी समिति (सोसायटी) कार्यालय आम आदमी के पहुँच में होने के कारण विभागीय कार्यो का संचालन सही समय पर एवं सही तारीख पर किया जा सकता है l

5.
सरकारी योजनाओं की जानकारी इन आदिवासी क्षेत्र में बसे आम जनताओं को आसानी से उपलब्‍ध हो जावेगा l

6.इस क्षेत्र एवं निवासरत पिछडे तथा आदिवासियों कृषक परिवारों सदस्‍यों को सुविधाओं का उचित लाभ पहुचाने एवं देर रात्री से वापसी में होने वाले भय से मुक्‍त करने के लिये सरनाबहाल को पृथक सोसायटी का दर्जा दिया जाना उचित रहेगा

प्रस्‍तावित सरनाबहाल को सहकारी समिति (सोसायटी) के 9 ग्राम के इकाई बनाये जाने पर इसकी भौगोलिक सीमा इस प्रकार है कि आवागमन के लिये अलग से नये मार्ग निर्माण की आवश्‍यकता नहीं है l
सरनाबहाल के अंतर्गत 9 ग्रामों की दूरी सामान्‍य रूप से 0किमी से 4किमी के भीतर समाहित है l अत: सोसायटी मुख्‍यालय एवं अन्‍य ग्रामों को आने-जाने पर जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अमलों को किसी भी प्रकार की कोई परे‍शानियों का सामना नहीं करना पडेगा l कार्यालय खोले जाने पर यहां शासकीय भूमि पर्याप्‍त मात्रा में उपलब्‍ध है l
उपरोक्‍त तुलनात्‍मक तथ्‍यों के आधार पर प्रदेश के सुदूरवर्ती वनांचल क्षेत्र के पिछडे आदिवासी बाहुल्‍य आमजनता को शासन की मंशा के अनुरूप चहुमुखी विकास की पथ से जोडने तथा प्रशानिक एवं जनहित के कार्यों के लिये सहकारी समिति मुख्‍यालय तक सुलभता से पहुंचने हेतु कवर्तमान सहकारी समिति अमलीपदर से पृथक कर सरनाबहाल को नवीन सहकारी समिति मुख्‍यालय बनाने हेतु क्षेत्र के किसानों द्वारा मुख्‍यमंत्री भुपेस बघेल, सहकारिता मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम एवं गरियाबंद जिला प्रभारी मंत्री ताम्रध्वज साहू के अलावा बिन्द्रानवागढ़ क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं जिला पचायत गरियाबंद के उपाध्‍यक्ष संजय नेताम के समक्ष भी आवेदन देकर गुहार लगाया जा चुका है इसके अलावा संबधित सभी विभागों कार्यालयों को क्षेत्र के किसानों द्वारा आवेदन दिया गया है।

क्या कहते हैं यहां के किसान एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि

गांव के सरपंच प्रतिनिधि और किसान हेमसिंह ने कहा कि मुड़गेलमाल समिति जाने में उनके गांववालो को परेशानी उठानी पड़ेगी। इसलिए उनके गांव में समिति खोला जाना उचित होगा। धनोरा के किसान पुस्तम नागेश ने परेशानी की जानकारी देते हुए बताया कि चिखली रपटा टूटने से उस पार पैदल जाना मुश्किल है ऐसे में वे अपना धान उस पार कैसे ले जाएंगे।

उप सरपंच हरी यादव ने बताया कि सरनाबहाल को नवीन समिति बनाये जाने से लोगो की अनेक समस्याओं का समाधान हो जाएगा और किसान खुश होंगे। इसलिए वे प्रदेश के मुखिया ऒर जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों से गांव में नवीन समिति गठित करने की मांग कर रहे है।

गांव के बुजुर्ग किसान बासु यादव ने दो शब्दों में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि मुड़गेलमाल समिति में जोड़ने से उनके गांव के किसान खुश नही है। बेहतर होगा कि लोगो की मंशानुरूप सरकार सरनाबहाल में धान खरीदी केन्द्र खोले।देवसरण साहू ने होने वाली समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनका गांव मुड़गेलमाल समिति में जोड़ा जा रहा है। इससे उनकी समस्या बढ़ जाएगी। क्योंकि वहां पहुंचने के लिए चिखली मार्ग पर बना रपटा टूट हुआ है। जिसके चलते उन्हें 15 किमी का सफर तय करके अमलीपदर होते मुड़गेलमाल समिति पहुंचना पड़ेगा, जो उनके लिए कष्टदायक है। इसलिए या तो उनके गांव को मुड़गेलमाल समिति से हटाकर पुनः अमलीपदर समिति में समायोजित किया जाए या फिर सरनाबहाल में नया खरीदी केन्द्र खोला जाए।गांव के सरपंच मुकुंद सिंह ने किसी भी स्थिति में किसानों के मूडगेलमाल समिति जाने को तैयार नही होने की बात कहते हुए जानकारी दी कि वहाँ जाना किसानों के लिए संभव नही है। किसान इससे बेहतर अपनी पुरानी समिति अमलीपदर जाना पसंद करेंगे मगर मुड़गेलमाल जाना कतई पसंद नही करेंगे।

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