पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी का आज शाम देहावसान हो गया। वे कुछ दिनों से आर्मी हास्पिटल में भरती थे। उनके ब्रेन की सर्जरी हुई थी। कई दिनों से वे जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे थे। उनके बेटे अभिजीत मुखर्जी ने ट्वीट कर उनके निधन की जानकारी साझा की।
प्रणब दा के निधन से देश में शोक व्याप्त हो गया है। राष्ट्रप्रति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के शीर्ष राजनेताओं ने प्रणब दा के निधन को एक युग का अंत बताया है।
प्रणब मुखर्जी कांग्रेस में संकटमोचक के तौर पर जाने जाते थे। कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार के समय जब भी कोई सरकारी या राजनीतिक कठिनाइयां उत्पन्न हुई, प्रणब दा की मदद से उसे सुलझाया गया। एक तरह से कहें तो प्रणब दा जीते जी एक मिथक बन गए थे। प्रणब दा सिद्धांत की राजनीति करते थे। यही वजह है कि विपक्ष के नेता भी उन्हें पसंद करते थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी के साथ उनके गहरे रिश्ते थे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनका काफी आदर करते थे। इसकी झलक तब मिली थी, जब शपथ ग्रहण के बाद मोदी जब पहली बार प्रणब दा से मिलने पहुंचे थे, तो उन्होंने आश्चर्यजनक तौर पर पैर छूकर आर्शीवाद लिया था।
प्रणब दा दो बार प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए थे। एक बार इंदिरा गांधी के निधन के बाद उनका नाम चला था। लेकिन, बाद में राजीव गांधी ने शपथ लिया। और, दूसरी बार मनमोहन सिंह के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के दौरान। खुद मनमोहन सिंह ने भी इसे स्वीकार किया था कि प्रणब दा प्रधानमंत्री पद के लिए मेरे से ज्याद योग्य थे।
हालांकि, प्रणब दा के लिए यह काफी पीड़ादायक स्थिति रही होगी कि इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान प्रणब वित्त मंत्री थे और उन्होंने मनमोहन सिंह को आरबीआई का गवर्नर अपाइंट किया था। उन्हीं मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व में प्रणब दा को फिर से केंद्रीय वित्त मंत्री का पद संभालना पड़ा।
प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के वीरभूमि जिले के मिराती नामक गांव में कामदा किंकर मुखर्जी और श्रीमति राजलक्ष्मी मुखर्जी के घर में हुआ। उनके पिता कामदा किंकर मुखर्जी एक स्वतंत्रता सेनानी थे और बाद में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया। वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सदस्य भी रहे। साल 1952 से 1964 तक प्रणब के पिता कामदा पश्चिम बंगाल विधानपरिषद के सदस्य भी रहे। प्रणब मुखर्जी ने वीरभूमि जिले के सुरी विद्यासागर कॉलेज से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर और विधि में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
प्रणब मुखर्जी 13 जुलाई, 1957 को सुव्रा मुखर्जी के साथ परिणय सूत्र में बंधे, जो बांग्लादेश में स्थित नरायल की रहने वाले थीं और 10 वर्ष की उम्र में अपने परिवार के साथ तत्कालीन कोलकाता जो अब कलकत्ता के नाम से जाना जाता है, आई थीं। इन दोनों के दो पुत्र और एक पुत्री हैं। पुत्रों का नाम है अभिषेक मुखर्जी और अभिजीत मुखर्जी। पुत्री का नाम है शर्मिष्ठा मुखर्जी। प्रणब मुखर्जी को राजनीतिक हलके में प्यार से लोग प्रणब दा के नाम से बुलाते हैं। प्रणब दा सक्रीय राजनीति में रहते हुए भी हर साल दुर्गा पूजा के अवसर पर अपने गांव मिराती जरूर जाते रहे हैं। उन्हें पाइप पीना, डायरी लिखना, खूब किताबे पढ़ना, बागवानी करना और संगीत सुनना बेहद पसंद है।
अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद प्रणब मुखर्जी कलकत्ते में ही पोस्ट एंड टेलिग्राफ विभाग में अपर डिविजन क्लर्क थे। प्रणब दा ने 1963 में पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले में स्थित विद्यानगर कॉलेज में कुछ समय के लिए राजनीति शास्त्र भी पढ़ाया। उन्होंने कुछ समय के लिए देशे डाक नामक समाचार पत्र में पत्रकार की भूमिका भी निभाई।
