यौमे आशूरा यानि मोहर्रम महीने की 10 तारीख को

हकदारो को हक दिलाने और दुनिया में सच्चाई ईमानदारी बने रहे इसके लिए आले रसूलो के पूरे खदान ने भूखे प्यासे अपनी शहादत देकर दुनिया को बताया कि सच हमेशा कामयाब होता है। मुस्लिम समाज के डाक्टर सैय्यद इस्माईल ने बताया कि अल्लाह के पैगम्बर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहिस्सलाम ने यौमे आशूरा की बडी फजीलत ( महत्व) को बताया है। इसमे नफील रोजा रखने पर एक साल के नफील रोजे रखने के बराबर सवाब मिलता है । 9 मोहर्रम और 10 मोहर्रम को रोजा रख सकते या 10 या 11 को रख सकते है। आशूरा के दिन अपने दस्तखान वसी करना चाहिए । जिसमे गरीब यतीम बेवा ओर मिस्कीन के साथ आम जरूरत मंदो को खाना खिलाने पर आखिरत मे बडा अजर है। नफील नमाजे पढना चाहिए और दारूदे पाक का एहतिमाम करना चाहिए । साथ ही अल्लाह से अपने गुनाहो से तौबा करते हुए हक सच्चाई के रास्ते पर चलने की दुआ मांगी जानी चाहिए । इस दिन मे असर की नमाज के बाद गुस्ल ( स्नान) करना सेहतमंद होने के लिए मह्वव रखती है। अल्लाह यौमे आशूरा के दिन खूब दुआओं को कुबूल करता है ।
मस्जिद नूर सूपेला मर्कज के इमाम मौलाना फारूख ,मर्कजी मस्जिद के इमाम हाफिज कासिम बस्तवी ,हाउसिंग बोर्ड मस्जिद के इमाम मौलाना फैसल ने बताया कि मोहर्रम महीने के बडी फजीलत मह्वव है इस दिन यानि यौमे आशूरा मे आले रसूल के नवासो सहित उनकी खानदान के हर फर्द ने अपने आपको कुर्बानी देकर शाहदत पाये दुनिया मे हक (सच्चाई)को जिंदा किया लोगों को संदेश दिया कि जुल्म का साथ ना दे।

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