केशव शर्मा देवरीबंगला / खरखरा नदी के तट पर विशाल पीपल वृक्ष के नीचे भगवान गणेश की अद्भुत प्रतिमा स्थापित है । सबसे वृद्ध ग्रामीण मायाराम साहू , मिलन , अघनु राम तथा ललित सिन्हा के अनुसार यह प्रतिमा लगभग 300 से अधिक साल पुरानी हैं । इस प्रतिमा का विशेष महत्व माना गया है ।इस प्रतिमा की पूजा अर्चना कई पीढ़ियों से परसुली के ग्रामीण कर रहे हैं । पूर्व मुखी शेष गणेश प्रतिमा का हमारे पौराणिक ग्रंथों में विशेष महत्व का उल्लेख किया गया है । चतुर्भुज गणेश के आठ रूपों में से एक गणेश मंदिर परसुली मैं खरखरा तट पर पीपल वृक्ष के नीचे स्थापित है । विद्वान संत पंडित सुरेंद्र तिवारी के अनुसार महाभारत के रचयिता वेदव्यास जी ने पूर्व मुखी होकर गणेश जी से महाभारत को लिखवाना आरंभ किया था ।महाभारत में श्री कृष्ण जी का पूर्व मुखी गणेश जी की पूजा करने विधान बताया गया है । विद्वान संत के अनुसार पूर्व मुखी श्री गणेश का दर्शन करना अत्यंत शुभ माना गया है । इसलिए इस गणेश मंदिर के प्रतिमा के दर्शन लाभ लेने से क्षेत्र के अनेक श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है । 11 दिवसीय गणेश उत्सव प्रारंभ होने से इस स्थल पर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं का आना जाना शुरू है । इस स्थल पर प्रतिदिन महा आरती व महा प्रसादी का वितरण किया जाता है । कई वर्षों से इस स्थान पर श्रद्धालु इस प्रतिमा का दर्शन लाभ ले रहे हैं ।
अद्भुत है प्रतिमा का स्वरूप : लगभग पाच फीट ऊंची शेष गजानंद की मूर्ति विशाल पीपल वृक्ष के नीचे स्थापित है गणेश जी के उपर शेषनाग का छत्र वर्णित है तथा चार भुजाएं हैं शेष गजानंद के एक हाथ में संख, दूसरे हाथ में फरसा , तीसरे में चक्र तथा चौथे हाथ में गदा धारण किए हुए हैं । ग्रामीणों के अनुसार इस प्रतिमा को खेरथा , परसुली व खेरा तीन गांव की सरहद पर से यहां बारह बेली गाड़ी से यहां लाया गया था । ग्रामीणों ने यह भी बताया कि परसुली गांव के बैगा लाला ठाकुर को सपना में मूर्ति दिखी थी । तब उसे गांव वालों ने सह सम्मान यहां लाकर स्थापित किया । ग्रामीणों ने यह भी बताया कि मूर्ति पहले बहुत छोटी थी लेकिन धीरे-धीरे बढ़ते क्रम में है । श्रद्धालु यहां हर साल गणेश पर्व पर ज्योति कलश स्थापित करते हैं । इस वर्ष 66 ज्योति कलश की स्थापना की गई है ।
