गुमनामी के अंधेरे में और प्राकृतिक के गोद पर बसा शेज पगार जलप्रपात पर्यटकों का मोह रहा है मन


? रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद ब्यूरो

14 किलोमीटर पहाडी दुर्गम रास्तों को तय करने के बाद जल प्रपात को देखते ही पुरी थकान हो जाती है दुर
हरी- भरी पहाडिया पक्षियों का मधुर कलरव और झरने का सौन्दर्य तथा उसके झर झर के ध्वनि तन मन को अदभुद आंनन्द से भर देती है

मैनपुर।गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर क्षेत्र में तो दर्जनों जलप्रपात है जिसमें कुछ ही जलप्रपात को पर्यटक जानते है और वहा तक बडी संख्या में इन दिनों पहुच रहे है क्योंकि लगातार क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण जलप्रपातों अपने पुरे शबाब पर है और यहा पहुचने वाले पर्यटकों को आंनंदित कर रहा है, ऐसी ही एक अदभुद जलप्रपात जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते है जिसका नाम है शेज पगार जलप्रपात जंहा पहुचने के लिए सडक की व्यवस्था नही और लगभग 14 किलोमीटर पैदल नदी नालों उबड खाबड पथरीले पहाडी रास्तों को तय कर घंटो पैदल चलने के बाद यह पहुचा जाता है लेकिन पैदल जाने की सारी थकाने इस जल प्रपात को देखते ही दुर हो जाती है, और मन आंनंदित हो जाता है।

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