? रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद ब्यूरो
मैनपुर।गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर क्षेत्र के बीहड जंगलो मे बसे ग्रामो तक पहुंचने के लिए अब भी पक्की सड़क व पुल पुलिया का निर्माण नही किये जाने से बारिश के चार माह हजारो आदिवासियो को जान जोखिम मे डालकर नदी पार कर आने जाने को मजबुर होना पड़ रहा है, वर्षो से ग्रामीणो के द्वारा पक्की सड़क व पुल पुलिया की मांग किया जा रहा है लेकिन इस समस्या की ओर अब तक प्रशासन द्वारा गंभीरता से ध्यान नही दिया गया है जिसके कारण बारिश के दिनो में साहेबिनकछार जैसे कई गांव नदी नालो मे पुल नही होने से टापू मे तब्दील हो गया है, तहसील मुख्यालय मैनपुर से लगभग 45 किमी एवं मैनपुर देवभोग मुख्य नेशनल हाईवे मार्ग बम्हनीझोला से 17 किमी दूर ग्राम पंचायत साहेबिन कछार के हजारो ग्रामीणो को बारिश के इन दिनो जर्जर पहुंच मार्ग होने के कारण दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा है।

नदी नालो मे पुल पुलिया के अभाव के चलते इस ग्राम पंचायत सहित इसके कई आश्रित ग्राम टापू मे तब्दिल हो जा रहा है। नदी नालो मे बारिश का पानी आ जाने से लोगो को आने जाने मे दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बिमार व गर्भवती माताओ को नदी पार कर आना जाना पड़ रहा है। मुख्य मार्ग से गांव तक पहुंचने के लिये वर्षो पहले वन मार्ग कच्ची मुरूम युक्त सड़क का निर्माण किया गया था लेकिन बारिश दर बारिश से सड़क का हाल खस्ताहाल व दयनीय स्थिति मे पहुंच गया है जिसके चलते साहेबिन कछार के रहनवासियों को बड़ी परेशानियो का सामना करते हुए जान जोखिम मे डालकर आवागमन करना पड़ रहा है। इस मार्ग मे जगह जगह सड़क के बह जाने से सड़क गड्ढो मे तब्दील हो गया है आवागमन करने वाले ग्रामीण दुर्घटना के शिकार भी हो रहे है। ग्रामीणो ने बताया कि बारिश के चलते जगह जगह मार्ग के बह जाने से मार्ग बूरी तरह से गढढेनुमा व दयनीय स्थिति मे पहुंच चुका है।
ग्राम पंचायत साहेबिन कछार की जनसंख्या लगभग 1330 के आसपास है और आदिवासी बहुल्य क्षेत्र है। उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के अंतर्गत बीहड़ जंगल के अंदर बसा हुआ यह ग्राम पंचायत है उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व क्षेत्र मे बसे होने के कारण यहां के ग्रामीणो को मूलभूत सुविधाओं का लाभ नही मिल पा रहा है जब भी पक्की सड़क व निर्माण कार्य की बात आती है तो वन विभाग द्वारा रोक लगा दिया जाता है जबकि यहां के ग्रामीण मूलभूत बूनियादी सुविधाओं के लिये धरना प्रदर्शन के साथ चक्का जाम तक कर चुके है लेकिन अब तक न तो बम्हनीझोला से साहेबिन कछार तक पक्की सड़क का निर्माण नही हो पाया है। ग्रामीणो द्वारा कई बार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण करवाने की मांग कर थक चुके है लेकिन अबतक इस दिशा मे कोई ठोस पहल नही हो पाई है। पक्की सड़क के अभाव मे गांव तक विकास की रौशनी नही पहुुंच पा रही है इस गांव मे बिजली अब तक नही लग पाई है। सौर उर्जा के माध्यम से गांव के अंधेरा दूर करने का प्रयास किया गया है लेकिन वह असफल साबित हो रहा है घंटा दो घंटा ही सौर उर्जा से रौशनी हो पाती है उसके बाद पूरी रात अंधेरे मे लोगो को गुजारना पड़ता है।
स्वास्थ सुविधा का हाल बेहाल है लंबे समय से ग्रामीण यहां अस्पताल की मांग कर रहे है लेकिन शासन द्वारा अब तक एक भी अस्पताल इस क्षेत्र के लोगो को नही दिया गया है। आज भी इस क्षेत्र के लोग झाड़ फूंक के साथ अत्यधिक बिमार की स्थिति मे उल्टेखाट मे बिठाकर मरीज को नदी पार करा उड़ीसा या मैनपुर ईलाज कराने के लिये जाने मजबूर हो रहे है। घनघोर वनो से घिरे इस क्षेत्र के ग्रामीण अपनी समस्या से समय समय पर विभागीय अधिकारियों ,जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जाता रहा पर आज भी पहुॅच मार्ग, स्वास्थ्य, शिक्षा, वि़द्युत से वंचित होने के कारण क्षेत्र अत्यनंत पिछडा हुआ है। इस संबंध में साहेबिनकछार के सरपंच कैलाश नेताम, पूर्व सरपंच रूपसिंग मरकाम ने बताया कि बारिश में यह क्षेत्र चारो ओर से नदी नालो व पहाडी क्षेत्र होने के कारण यहाॅ भारी परेशानीयों में गुजारते है, इन समस्याओं को उच्च अधिकारियों को अवगत कराते हुए मांग किया है परन्तु टायगर रिर्जव क्षेत्र के कारण विकास से आज भी कोसो दूर है। अगर शासन प्रशासन घ्यान दे तो इन समस्याओ से मुक्ती दिलाया जा सकता है।
प्राकृतिक वनो उपज के अलावा यहाॅ उनन्त किस्म का भुटटा मक्का की पैदावार अधिक होता है जो बाहर से व्यापारी औने पौने में खरीदते है मजबूरी वश यहाॅ के किसान व्यापारियो का शोषण का चारागहा बना हुआ है। ग्राम पंचायत साहेबिन कछार के सरपंच कैलाश नेताम ने बताया कई बार गांव तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पक्की सड़क पेयजल, अस्पताल, आश्रम, बिजली, डाॅक्टर की मांग कर थक चुके है पंचायत द्वारा कई बार प्रस्ताव भी शासन स्तर पर भेजा जा चुका है, वही छोटेगोबरा ग्राम की स्थिति बेहद खराब है अभी भी यहां के नदी मे कमर तक पानी चल रहा है।
