.? विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद ब्यूरो
गरियाबंद। सलफ जलाशय को लेकर जिला प्रशासन का उदासीन रवैया समझ से परे है। 40 साल से योजना सरकारी फाइलों में दबी पड़ी है। फाइलों की धूल कबतक छंटेगी अभी अधिकारी ये बताने की स्थिति में भी नही है। अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा क्षेत्र के लोगो को सूखे की मार झेलकर भुगतना पड़ रहा है। वही जिला पंचायत उपाध्यक्ष संजय नेताम ने योजना को गति देने के लिए एक बार फिर विभागीय कसरत करना शुरू किया है।

जानकारी के मुताबिक सलफ जलाशय योजना 40 साल पुरानी है। योजना के अनुसार किसानों की फसल सिंचाई के लिए सलफ जलाशय का निर्माण किया जाना था। जो आज तक अधूरा पड़ा है। योजना दो विभागों के बीच फसकर रह गयी है। योजना का निर्माण करने वाली एजेंसी सिंचाई विभाग इसके लिए अक्सर वन विभाग को जिम्मेदार ठहराती रही है। वही वन विभाग सिचाई विभाग के सिर ठीकरा फोड़ता रहा है। स्थिति अभी भी जस की तस। दोनो विभाग मामले में खुद को बहुत सक्रिय और दूसरे विभाग को सुस्त ठहराने में जुटे है।
जलाशय नही बनने का खामियाजा आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवो के सैकड़ो किसानों को भुगतना पड़ रहा है। जलाशय बनने से 2 हजार हेक्टेयर से अधिक फसल सिंचित हो सकती है जिससे किसानों की फसल अच्छी होगी और आमदनी बढ़ेगी। मगर विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते किसानों को इससे महरूम होना पड़ रहा है।
ऐसा नही है कि किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसको लेकर कभी आवाज ना उठाई हो। बल्कि कई बार धरना प्रदर्शन किया जा चुका है। प्रदेश के जिम्मेदारों को भी अवगत कराया गया बावजूद इसके कोई सफलता हाथ नही लगी। जिला पंचायत उपाध्यक्ष सजंय नेताम ने इसको लेकर एक बार फिर बीड़ा उठाया है।

उन्होंने बताया कि वे इसको लेकर आवाज उठा रहे है। पिछले साल इसे बजट में शामिल करने का आश्वासन दिया गया था। उसके बाद भी वे लगातार सीएम और जल संसाधन मंत्रीसे मिलकर जलाशय का काम शुरू करने की मांग कर रहे है। बीते 13 अगस्त को भी सीएम कार्यालय से गरियाबंद कलेक्टर को एक पत्र जारी हुआ है जिसमे जिला पंचायत उपाध्यक्ष सजंय नेताम द्वारा प्रस्तुत की गई बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं एवं मांगो को पूर्ण करने के निर्देश दिए गए है। मांगपत्र में सलफ जलाशय निर्माण की मांग भी शामिल है। सजंय ने भरोसा दिलाया है कि उनकी सरकार सलफ जलाशय का निर्माण जरूर करेगी।
