?विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद ब्यूरो
मैनपुर।शासन प्रशासन के द्वारा बड़े-बड़े शासकीय वेल्डिंग भवनों को निर्माण कराने के लिए अनुबंध के आधार पर ठेकेदारों को दे दिया जाता है। शासकीय भवनों को तय मानक समयाविधि के आधार पर पूर्ण करके दिए जाने की जिम्मेदारी व जवाबदेही संबंधित ठेकेदारों का होता है। ताकि जिन उद्देश्यों को लेकर शासकीय भवन बनाई गई है। उसका उपयोग होता रहे। लेकिन दुर्भाग्य है। कमीशन के खेल में ठेकेदारों के द्वारा मशगूल होते हुए तय मानक के आधार पर अनुबंध किए हुए भवन बिल्डिंग को नहीं बनाते हुए आनन-फानन में
भवन निर्माण कर दिया जाता है। जो भवन कुछ ही वर्षों में खंडहर जैसा दिखने लगता है। जिसका खामियाजा निर्दोष ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। ऐसे ठेकेदारों के अनुबंध को रद्द करते हुए पूरी राशि का वसूली किया जाना चाहिए। गड़बड़ ढंग से बनाया हुआ भवन बिल्डिंगों को पुनः निर्माण कराने की सख्त हिदायत देते हुए दंडात्मक कार्यवाही किया जाना चाहिए। नहीं तो ऐसे ठेकेदारों के हौसला बुलंद होते चले जाएंगे।

ज्ञात हो,कि सोसाइटी के खाद्यान्न सामग्रियों को रखने के लिए जगह नहीं होने के कारण दुकान सह गोदाम भवन की आवश्यकता को देखते हुए शासन प्रशासन ने अनुबंध के आधार पर ठेकेदार को निर्माण कराने की जिम्मेदारी व जवाबदेही दी गई। लेकिन ठेकेदार के लापरवाही के चलते निर्माण के समय से ही बिल्डिंग तय मानक के आधार पर नहीं बन गया। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है। कमरा का हाल दयनीय है। भवन निर्माण के समय ग्रामीणों के द्वारा सही निर्माण कराने की हिदायत ठेकेदार को दिया गया था। उसके बावजूद भी ग्रामीणों की बातों को नजरअंदाज करते हुए अपने हिसाब से ठेकेदार के द्वारा निर्माण कर दिया गया। जिसके कारण लाखों रुपए के गोदाम भवन होने के बावजूद भी खाद्यान्न सामग्रियों को रखने के लिए ग्रामीणों को दूसरा स्थान ढूंढना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में भंडारित करके खाद्य सामग्रियों को उस भवन में रखने से लाखों रुपए का खाद्यान्न बर्बाद हो सकता है। जो सीधा ग्रामीणों के सेहत पर असर पड़ेगा। खाद्यान्न गोदाम बाहर से चकाचक अंदर में भयंकर गड़बड़ी को मरम्मत कराने का मांग ग्रामीणों ने जिला के कलेक्टर से किए हैं। और गड़बड़ी करने वाले ठेकादार के अनुबंध को रद्द करने की मांग भी किया है।

