- अमेरी पंचायत की शिकायत पर पटवारी को कारण बताओ नोटिस, तीन दिन में मांगा जवाब; ग्रामीणों का सवाल- आखिर आम जनता की परेशानी का जिम्मेदार कौन?
पाटन। सरकारी दफ्तरों में आम जनता की समस्याओं का समय पर निराकरण करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था बनाई गई है, लेकिन जब राजस्व विभाग के जिम्मेदार कर्मचारियों पर ही ग्रामीणों की अनदेखी, फोन नहीं उठाने, काम में लापरवाही और कथित तौर पर पैसों की मांग जैसे गंभीर आरोप लगने लगें, तो प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
पाटन ब्लॉक के ग्राम पंचायत अमेरी के सरपंच द्वारा पटवारी हल्का नंबर 13 के पटवारी आर.के. मिश्रा के खिलाफ की गई शिकायत के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पाटन ने 23 अक्टूबर 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में तीन दिनों के भीतर बिंदुवार जवाब मांगा गया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पटवारी कार्यालयीन समय में उपलब्ध नहीं रहते। किसानों, सरपंच, पंच और पंचायत सचिव के फोन का जवाब नहीं देते। राजस्व संबंधी कार्यों में अनावश्यक देरी की जाती है। नामांतरण, बंटवारा, जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र तथा विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
इतना ही नहीं, शिकायत में राजस्व कार्यों के एवज में कथित रूप से राशि मांगने और गरीब परिवार के राशन कार्ड संबंधी कार्य में हस्ताक्षर नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
नोटिस जारी कर प्रशासन ने निभाई जिम्मेदारी या अब होगी वास्तविक कार्रवाई?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं तो अब तक संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? क्या राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा नहीं की जाती? ग्रामीणों को अपने छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं?
प्रशासन द्वारा तीन दिन में जवाब मांगना एक प्रक्रिया जरूर है, लेकिन आम जनता को केवल नोटिस और कागजी कार्रवाई से राहत नहीं मिलेगी। जरूरत इस बात की है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो, ग्रामीणों के बयान लिए जाएं और आरोप प्रमाणित होने पर जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या इस मामले की जांच केवल नोटिस तक सीमित रहेगी या राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम भी उठाए जाएंगे? इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा।
गौरतलब है कि नोटिस में दर्ज आरोप शिकायतकर्ता के आरोप हैं। पटवारी का पक्ष और जांच का निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
