पेंशन प्रक्रिया छह माह पहले पूरी कर सेवानिवृत्ति के दिन ही पीपीओ और भुगतान देने की मांग उठाई
रायपुर। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के तीन कर्मचारी 30 अक्टूबर को अपने अंतिम कार्य दिवस के साथ सेवानिवृत्त हुए।

इनमें गोपनीय विभाग के कंप्यूटर सेंटर प्रभारी अधिकारी डॉ. मनोज तिवारी, राजेंद्र त्रिपाठी एवं वित्त विभाग में कार्यरत लंबुधर शामिल हैं।
तीनों ने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में सौंपे गए दायित्वों का पूरी ईमानदारी, निष्ठा एवं समर्पण के साथ निर्वहन किया।
छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालयीन पेंशनर्स कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रदीप मिश्र ने डॉ. मनोज तिवारी के योगदान की जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने गोपनीय विभाग में लंबे समय तक सेवाएं दीं। उनका योगदान अकादमिक एवं प्रशासनिक दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय रहा है। उनका चयन आईसीटीपी, इटली में नेटवर्क ट्रेनिंग वर्कशॉप के लिए हुआ था, जहां वे भारत के एकमात्र प्रतिनिधि थे। इसके अलावा उन्होंने डेलियन, चीन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में चेयरमैन की भूमिका निभाई। उनके 25 शोध प्रकाशन भी हैं।डॉ. तिवारी लगभग 15 वर्षों तक विश्वविद्यालय के कंप्यूटर सेंटर के प्रभारी अधिकारी रहे। इस दौरान उन्होंने परीक्षा परिणाम प्रसंस्करण, समर्थ ई-गवर्नेंस, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और ई-ऑफिस जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं के क्रियान्वयन एवं संचालन में अहम भूमिका निभाई।
वहीं राजेंद्र त्रिपाठी उच्च श्रेणी लिपिक वर्ग-एक के पद से तथा लंबुधर वित्त विभाग से सेवानिवृत्त हुए।
तीनों कर्मचारियों के सम्मान में विश्वविद्यालय के गोपनीय विभाग एवं कंप्यूटर सेंटर में अलग-अलग गरिमामय विदाई समारोह आयोजित किए गए।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालयीन पेंशनर्स कल्याण संघ के महासचिव शिरीष त्रिवेदी, सहायक कुलसचिव खेमन सिंह कश्यप, उपकुलसचिव (सामान्य प्रशासन) अनिमेष देवांगन, डॉ. एसके जाधव, डॉ. संजय कुमार, डॉ. पटले, गणित विभागाध्यक्ष डॉ. बलवंत ठाकुर, सेक्शन ऑफिसर धनसिंग गहिरवारे, डॉ. चैत राम रात्रे, सावन ध्रुव, कार्यक्रम संयोजक भरत देवांगन, ताराचंद देवांगन, विवेक शर्मा, संतोष भगत एवं डॉ. सोनवानी कृपाराम सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
समारोह का संचालन डॉ. चैत राम रात्रे ने किया।
डॉ. मनोज तिवारी के परिवार से उनकी पत्नी श्रीमती चित्रलेखा तिवारी एवं पुत्र नयन और नव्य तिवारी शामिल हुए।
वहीं राजेंद्र त्रिपाठी के परिवार से उनके पुत्र उल्लास त्रिपाठी एवं पुत्री कुमारी स्तुति त्रिपाठी ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
समारोह में उपस्थित लोगों ने तीनों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके जीवन की नई पारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
सेवानिवृत्ति के दिन ही पीपीओ और भुगतान देने की मांगइस अवसर पर पेंशनर्स कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रदीप मिश्र ने विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव से एक बार फिर मांग की कि सेवानिवृत्त होने वाले प्रत्येक कर्मचारी की पेंशन संबंधी फाइल सेवानिवृत्ति से कम से कम छह माह पहले ही उच्च शिक्षा विभाग को भेजी जाए, ताकि सेवानिवृत्ति के दिन ही पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) जारी हो सके।उन्होंने सुझाव दिया कि सेवानिवृत्ति के अंतिम कार्य दिवस पर संबंधित कर्मचारी को उसका पीपीओ, अर्जित अवकाश नगदीकरण की राशि एवं सीपीएफ की राशि का चेक सम्मानपूर्वक प्रदान किया जाए। यह दस्तावेज और भुगतान कुलपति अथवा कुलसचिव कार्यालय में बुलाकर या संबंधित कर्मचारी के विभाग में जाकर विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारी द्वारा सौंपे जा सकते हैं।
मिश्र ने कहा कि विश्वविद्यालय वर्ष में एक बार सामूहिक रूप से सेवानिवृत्त कर्मचारियों का विदाई समारोह आयोजित करता है, जबकि प्रत्येक कर्मचारी को उसकी सेवानिवृत्ति के दिन ही सम्मानपूर्वक विदाई मिलनी चाहिए।
विश्वविद्यालय को साल, श्रीफल और स्मृति चिह्न जैसे आयोजनों पर खर्च करने के बजाय सेवानिवृत्त कर्मचारी को उसका पीपीओ और देय राशि समय पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी चाहिए। उनके अनुसार, सेवानिवृत्ति के दिन ही सभी देयकों का भुगतान और पीपीओ प्रदान करना ही विश्वविद्यालय की ओर से कर्मचारी को दिया जाने वाला वास्तविक सम्मान एवं उसकी वर्षों की सेवा का सच्चा उपहार होगा।
