सातवें वेतनमान से भी वंचित विश्वविद्यालयीन कर्मचारी, 1 नवंबर से पहले पेंशन भुगतान की मांग
रायपुर। छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयीन कर्मचारियों और पेंशनरों की समस्याओं का निराकरण नहीं होने से उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री, राज्यपाल, शिक्षा मंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री को कई बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होने पर छत्तीसगढ़ पेंशनर्स एसोसिएशन के जिला संयोजक विजय कुमार झा एवं विश्वविद्यालयीन पेंशनर्स कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रदीप मिश्रा ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पेंशन का भुगतान नहीं होने से इस दीपावली पर कई पेंशनरों के घरों में खुशियों के बजाय अंधेरा छाने की स्थिति बन गई है
।विजय कुमार झा और प्रदीप मिश्रा ने कहा कि प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों को 1 जनवरी 2016 से सातवां वेतनमान प्रभावशील है, लेकिन विश्वविद्यालयीन कर्मचारियों को अब तक सातवें वेतनमान का लाभ नहीं मिल पाया है। वहीं, प्रदेश के अन्य पेंशनरों को प्रतिमाह महंगाई राहत के साथ पेंशन का भुगतान किया जा रहा है, जबकि विश्वविद्यालयीन पेंशनरों को सितंबर माह की पेंशन 33 दिन बीत जाने के बाद भी नहीं मिली है।उन्होंने बताया कि कर्मचारी संगठनों की ओर से लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद पेंशन भुगतान नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि अनेक कर्मचारी सेवानिवृत्त होने के बाद भी छठवें वेतनमान के आधार पर पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। इससे विश्वविद्यालयीन कर्मचारियों और पेंशनरों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
1 नवंबर से पहले भुगतान की मांगसंघ के पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि जब देश में एक देश, एक कानून और एक संविधान की बात की जाती है, तो विश्वविद्यालयीन कर्मचारियों को राज्य एवं केंद्र सरकार के कर्मचारियों से अलग क्यों माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयीन कर्मचारियों और पेंशनरों की समस्याओं की अनदेखी से उनमें असंतोष बढ़ रहा है।
विजय कुमार झा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मांग की है कि 1 नवंबर को राज्योत्सव से पहले विश्वविद्यालयीन पेंशनरों की लंबित पेंशन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ और इसके चलते कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार, विश्वविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग की होगी।
