- अगर साकार स्वरूप व मूर्ति पूजा से विरोध है, तो माँ बमलेश्वरी, दंतेश्वरी माई और महामाया के दरबार में ढोंग करने क्यों जाते हैं भूपेश दाऊ?
भिलाई। दुर्ग में गरबा महोत्सव के दौरान उपजे विवाद पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा भारतीय दर्शन और मूर्ति पूजा पर दिए गए बयान पर भारतीय जनता पार्टी के नेता व छत्तीसगढ़ क्रेडा के पूर्व सदस्य विजय साहू ने तीखा पलटवार किया है। विजय साहू ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि भूपेश बघेल दर्शनशास्त्र का आधा-अधूरा ज्ञान बांटकर सनातन संस्कृति, हिंदू आस्था और छत्तीसगढ़िया जनमानस की धार्मिक भावनाओं का अपमान करना तत्काल बंद करें।श्री साहू ने कहा कि भूपेश बघेल मीडिया में सांख्य दर्शन और पतंजलि योग दर्शन की आधी-अधूरी बातें रखकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि सांख्य दर्शन के प्रणेता महर्षि कपिल मुनि ने 25 तत्वों (पंच ज्ञानेंद्रिय, पंच कर्मेंद्रिय, पंच तन्मात्रा, पंच महाभूत, मन, अहंकार, महतत्व, पुरुष और प्रकृति) का विस्तृत विश्लेषण किया है। जब कपिल मुनि ने अपनी माता देवहूति को उपदेश दिया था, तब उन्होंने स्पष्ट किया था कि केवल शुष्क ज्ञान से मोक्ष संभव हो सकता है, लेकिन जब तक उसमें भक्ति योग नहीं जुड़ेगा, तब तक ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती। यह सब हमारे सनातन शास्त्रों में स्पष्ट रूप से दर्ज है। उन्होंने पतंजलि योग सूत्र का हवाला देते हुए कहा कि प्राणायाम और साधना के माध्यम से आंतरिक शुद्धि तभी सार्थक होती है, जब उसमें भक्ति और समर्पण का भाव हो। जहां भक्ति होती है, वहीं साकार स्वरूप और मूर्ति पूजा का प्राकट्य होता है। ईश्वर का स्वरूप उसी प्रकार साकार है, जैसे हमारा और हमारे माता-पिता का स्वरूप है।श्री साहू ने भूपेश बघेल के पाखंड को बेनकाब करते हुए सीधा सवाल दागा कि “अगर भूपेश दाऊ को मूर्ति पूजा और साकार स्वरूप से इतनी ही नफरत है, तो वे डोंगरगढ़ में माँ बमलेश्वरी, बस्तर में माँ दंतेश्वरी और रतनपुर में माँ महामाया के दरबार में माथा टेकने क्यों जाते हैं? क्या वह सब केवल चुनावी नौटंकी और राजनीतिक दिखावा है?” उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली दरबार में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर भूपेश बघेल लगातार सनातन प्रतीकों और आस्थावान समाज को लांछित करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। विजय साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान श्री राम का ननिहाल और माता भगवती शक्ति का पावन धाम है। यहाँ की जनता धर्मपरायण और भक्तिभाव से ओतप्रोत है। भूपेश बघेल अपना आयातित बौद्धिक प्रपंच अपने पास रखें; आस्थावान छत्तीसगढ़िया समाज उनके इस षड्यंत्र को भली-भांति समझ चुका है और आने वाले समय में इसका करारा जवाब देगा।
