सिपकोन्हा माइनर में नहर का पानी नहीं मिलने से किसान आक्रोशित, 16 अक्टूबर को करेंगे चक्काजाम और धरना-प्रदर्शन

  • रानीतराई में सुबह 11 बजे होगा आंदोलन, मांग पूरी नहीं होने पर जिला मुख्यालय दुर्ग में भी धरना देने की चेतावनी

पाटन। सिपकोन्हा माइनर के टेल एरिया में पर्याप्त नहर का पानी नहीं पहुंचने से दक्षिण पाटन अंचल के किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। धान की फसल पकने के अंतिम चरण में सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने से परेशान किसानों ने 16 अक्टूबर को आंदोलन करने का ऐलान किया है। किसानों ने चेतावनी दी है कि पर्याप्त नहर पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो वे रानीतराई में चक्काजाम और धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद जिला मुख्यालय दुर्ग में भी धरना देने के लिए मजबूर होंगे।

किसानों के अनुसार, सिपकोन्हा माइनर के टेल एरिया के अंतर्गत रानीतराई, डिड़ाभाठा, करेला, ढिसारी, ओंसर, पाहंदा, झाड़मोखली, डिड़गा, रंगाकठेरा, असोगा, कोहटी, खपरी और चुलगहन सहित आसपास के गांवों के किसानों को पर्याप्त नहर पानी नहीं मिल पा रहा है। बारिश थमने के बाद पिछले 15 से 20 दिनों से किसान सिंचाई विभाग से लगातार पानी की मांग कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

किसानों का कहना है कि तांदुला जलाशय में पर्याप्त पानी होने के बावजूद 15 अक्टूबर तक उनके खेतों में नहर का पानी नहीं पहुंच पाया है। इसी समस्या को लेकर 12 अक्टूबर को रानीतराई में सैकड़ों किसान एकत्रित हुए थे और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से पानी उपलब्ध कराने की मांग की थी। उस दौरान दो दिनों के भीतर पर्याप्त पानी पहुंचाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन किसानों के मुताबिक अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

किसानों ने जिला कलेक्टर दुर्ग को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या से अवगत कराया है। उन्होंने मांग की है कि धान की फसल को बचाने के लिए टेल एरिया तक तत्काल पर्याप्त नहर पानी पहुंचाया जाए, ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

16 अक्टूबर को होगा आंदोलन

ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने प्रशासन को सूचित किया है कि मांग पूरी नहीं होने पर 16 अक्टूबर को सुबह 11 बजे रानीतराई विश्रामगृह के पास धरना-प्रदर्शन एवं चक्काजाम किया जाएगा। इसके साथ ही जिला कलेक्टर कार्यालय दुर्ग में भी धरना देने की चेतावनी दी गई है। किसानों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से समय रहते समस्या का निराकरण करने की मांग की है।

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